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Yogini Tantra Pdf / 64 Tantra Pdf in Hindi

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Yogini Tantra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Yogini Tantra Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  असली प्राचीन लाल किताब pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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64 Yogini Tantra Pdf / योगिनी तंत्र Pdf 

 

 

64 योगिनी तंत्र पीडीएफ डाउनलोड 

 

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Yogini Tantra Pdf
Yogini Tantra Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सब लोग जोहार (वंदन) करके आशीर्वाद दे रहे है और गुण समूहों गाथाये कह रहे है। तब गुरु और ब्राह्मणो के साथ राजा दशरथ जी ने महल में प्रस्थान किया।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- वशिष्ठ जी ने जो भी आज्ञा दिया उसे राजा ने लोक और वेद की विधि के अनुसार ही आदर पूर्वक किया। ब्राह्मणो को भीड़ देखकर अपना बड़ा भाग्य जानते हुए सब रानियां आदर के साथ उठी।

 

 

 

2- चरण धोकर उन्होंने सबको स्नान कराया और राजा ने भली-भांति ही पूजा करके उन्हें सादर भोजन कराया। आदर, दान और प्रेम से पुष्ट हुए वह सभी ब्राह्मण आशीर्वाद देते हुए संतुष्ट मन से चले।

 

 

 

3- तब राजा ने गाधि पुत्र विश्वामित्र की बहुत प्रकार से पूजा किया और कहा – हे नाथ! मेरे समान कोइ दूसरा धन्य नहीं है। राजा ने उनकी बहुत प्रसंशा करते हुए उनकी चरण की धूलि को ग्रहण किया।

 

 

 

4- उन्होंने महल के भीतर रहने के लिए उत्तम स्थान दिया, जिसमे राजा और सब रनिवास स्वयं मुनि के इच्छा के अनुसार आराम की व्यवस्था कर सके। फिर राजा ने गुरु वशिष्ठ जी के चरण कमलो की पूजा किया और विनती की, उनके हृदय में मुनि के लिए अपार स्नेह और प्रीति थी।

 

 

 

 

352- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

बहुओ सहित सब राजकुमार और सब रानियों समेत राजा बार-बार गुरु के चरणों की वंदना करते है और मुनीश्वर उन्हें आशीर्वाद दे रहे है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- राजा ने अत्यंत प्रेम पूर्ण हृदय से पुत्रो को और सारी सम्पत्ति को आगे रखते हुए मुनि की विनती की। परन्तु मुनिराज ने पुरोहित का उचित सम्मान समझकर केवल अपना नेग मांग लिया और राजा को बहुत प्रकार से आशीर्वाद दिया।

 

 

 

2- फिर सीता जी सहित श्री राम जी को हृदय में रखकर गुरु वशिष्ठ जी अपने स्थान को गए। राजा ने सब ब्राह्मणो की स्त्रियों को बुलाया और उन्हें सुंदर वस्त्र तथा आभूषण पहनने के लिए दिए।

 

 

 

3- फिर सब सुआसिनियो को “नगर भर की सौभाग्यवती, बहन, बेटी, भानजी” आदि को बुलाया और उनकी रुचि समझकर उसी के अनुसार ही पहिरावनी दिया। सभी नेग मांगने वाले नेगी लोगो को राजाओ के शिरोमणि दशरथ जी उनकी इच्छा के अनुसार ही नेग जोग देते है।

 

 

 

4- जिन मेहमानो को पूजनीय और प्रिय जाना, उनका राजा ने भली प्रकार से सम्मान किया। देवतागण श्री राम जी का विवाह देखकर, उत्सव की प्रसंशा करते हुए फूल बरसाते हुए।

 

 

 

 

 

 

 

 

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