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Yoga Books Pdf Hindi / शिव पुराण पीडीऍफ़ / Laxmi Chalisa Pdf

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मित्रों इस पोस्ट में Yoga Books Pdf Hindi/ Laxmi Chalisa Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से Yoga Books Pdf Hindi  फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

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Kriya Yoga Pdf Hindi Free
क्रिया योग पीडीएफ यहाँ से डाउनलोड करें। 
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योग प्रवाह 
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धारव योग 
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योग और शिक्षा Yog Aur Shiksha Free Download
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गीता का ज्ञान योग 
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Laxmi Chalisa Pdf Free Download

 

 

क्ष्मी चालीसा फ्री डाउनलोड

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

श्री कृष्ण कहते है – इन्द्रिय विषयो का चिंतन करते हुए मनुष्य की उनमे आसक्ति उत्पन्न हो जाती है और ऐसी आसक्ति से काम उत्पन्न होता है और फिर काम से क्रोध उत्पन्न होता है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – जो मनुष्य कृष्ण भावनाभावित नहीं है उसमे इन्द्रिय विषयो के चिंतन से भौतिक इच्छाए उत्पन्न होती है। इस संसार के जंजाल से निकलने का एकमात्र उपाय है – कृष्ण भावनाभावित होना। जैसा कि यामुनाचार्य के उपर्युक्त श्लोक में बताया जा चुका है। भगवान का एकनिष्ट भगवान की संगति के आध्यात्मिक सुख का आस्वादन करने के कारण ही समस्त भौतिक इन्द्रिय सुख का त्याग कर देता है। अतः जो लोग कृष्ण भावनाभावित नहीं है वह कृतिम दमन के द्वारा अपनी इन्द्रियों को वश में करने में कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो अंत में अवश्य ही असफल होता है क्योंकि विषय सुख का रंचमात्र विचार भी उसे इद्रिय तृप्ति के लिए उत्तेजित कर देता है।

 

 

 

 

इन्द्रियों को किसी न किसी कार्य में लगे रहना चाहिए। यदि वह भगवान की दिव्य प्रेमाभक्ति में नहीं लगी रहेगी तो वह निश्चित ही भौतिकतावाद में लगना ही चाहेगी। इस भौतिक जगत में हर एक प्राणी इन्द्रिय विषय के ही अधीन रहता है। यहां तक कि ब्रह्मा तथा शिव जी भी तो स्वर्ग के अन्य देवताओ के विषय में क्या कहा जा सकता है।

 

 

 

 

शिव जी ध्यान मग्न थे जब पार्वती ने विषय भोग के लिए शिव जी को उत्तेजित किया तो वह सहमत हो गए जिसके फलस्वरूप ही कार्तिकेय का जन्म हुआ। इसी प्रकार से तरुण भगवद्भक्त हरिदास ठाकुर को मायादेवी के अवतार ने मोहित करने का प्रयास किया था किन्तु विशुद्ध कृष्ण भक्त के कारण ही वह इस कसौटी में खरे उतर पाए थे। जैसा कि यामुनाचार्य के श्लोक में बताया जा चुका है।

 

 

 

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