Yoga Books Pdf Hindi / शिव पुराण पीडीऍफ़ / Laxmi Chalisa Pdf

मित्रों इस पोस्ट में Yoga Books Pdf Hindi/ Laxmi Chalisa Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से Yoga Books Pdf Hindi  फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

Yoga Books Pdf Hindi

 

 

 

 

 Patanjali Yoga Sutras PDF in Hindi फ्री डाउनलोड

 

1- योग प्रवाह 

 

2- धारव योग Dharav Yog Download

 

3- योग और उसके उद्देश्य Yog Aur Usake Uddeshya Free

 

4- योग के चमत्कार Yog Ke Chamatkar Free PDF

 

5- अध्यात्म योग Adhyatma Yoga Pdf

 

6- योग और शिक्षा Yog Aur Shiksha Free Download

 

7- पतंजलि योग सूत्र Patanjali Yog Sutra Download

 

8- पतंजलि योग दर्शन Patanjali Yog Darshan Free Pdf

 

9- गीता का ज्ञान योग 

 

10 – क्रिया योग पीडीएफ यहाँ से डाउनलोड करें। 

 

 

शिव पुराण पीडीऍफ़ डाउनलोड 

 

 

Shiv Puran in Hindi PDF Download

 

शिव पुराण हिंदी Pdf Free Download

 

 

Laxmi Chalisa Pdf Free Download

 

 

क्ष्मी चालीसा फ्री डाउनलोड

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

श्री कृष्ण कहते है – इन्द्रिय विषयो का चिंतन करते हुए मनुष्य की उनमे आसक्ति उत्पन्न हो जाती है और ऐसी आसक्ति से काम उत्पन्न होता है और फिर काम से क्रोध उत्पन्न होता है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – जो मनुष्य कृष्ण भावनाभावित नहीं है उसमे इन्द्रिय विषयो के चिंतन से भौतिक इच्छाए उत्पन्न होती है। इस संसार के जंजाल से निकलने का एकमात्र उपाय है – कृष्ण भावनाभावित होना। जैसा कि यामुनाचार्य के उपर्युक्त श्लोक में बताया जा चुका है। भगवान का एकनिष्ट भगवान की संगति के आध्यात्मिक सुख का आस्वादन करने के कारण ही समस्त भौतिक इन्द्रिय सुख का त्याग कर देता है। अतः जो लोग कृष्ण भावनाभावित नहीं है वह कृतिम दमन के द्वारा अपनी इन्द्रियों को वश में करने में कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो अंत में अवश्य ही असफल होता है क्योंकि विषय सुख का रंचमात्र विचार भी उसे इद्रिय तृप्ति के लिए उत्तेजित कर देता है।

 

 

 

 

इन्द्रियों को किसी न किसी कार्य में लगे रहना चाहिए। यदि वह भगवान की दिव्य प्रेमाभक्ति में नहीं लगी रहेगी तो वह निश्चित ही भौतिकतावाद में लगना ही चाहेगी। इस भौतिक जगत में हर एक प्राणी इन्द्रिय विषय के ही अधीन रहता है। यहां तक कि ब्रह्मा तथा शिव जी भी तो स्वर्ग के अन्य देवताओ के विषय में क्या कहा जा सकता है।

 

 

 

 

शिव जी ध्यान मग्न थे जब पार्वती ने विषय भोग के लिए शिव जी को उत्तेजित किया तो वह सहमत हो गए जिसके फलस्वरूप ही कार्तिकेय का जन्म हुआ। इसी प्रकार से तरुण भगवद्भक्त हरिदास ठाकुर को मायादेवी के अवतार ने मोहित करने का प्रयास किया था किन्तु विशुद्ध कृष्ण भक्त के कारण ही वह इस कसौटी में खरे उतर पाए थे। जैसा कि यामुनाचार्य के श्लोक में बताया जा चुका है।

 

 

 

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