10 +Yoga Books in Hindi PDF Free Download / योगा बुक्स हिंदी में

Yoga Books in Hindi PDF Free मित्रों इस पोस्ट में  Yoga in Hindi PDF के बारे दिया गया है।  आप यहां से Yoga Books PDF फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

Yoga Books in Hindi PDF Free ( योगा बुक्स हिंदी में फ्री डाउनलोड करें ) 

 

 

 

 

 

 

 

1- योग प्रवाह 

 

2- धारव योग Dharav Yog Download

 

3- योग और उसके उद्देश्य Yog Aur Usake Uddeshya Free

 

4- योग के चमत्कार Yog Ke Chamatkar Free PDF

 

5- अध्यात्म योग Adhyatma Yoga Pdf

 

6- योग और शिक्षा Yog Aur Shiksha Free Download

 

7- पतंजलि योग सूत्र Patanjali Yog Sutra Download

 

8- पतंजलि योग दर्शन Patanjali Yog Darshan Free Pdf

 

9- गीता का ज्ञान योग 

 

 

 

योगा क्या है? ( What is Yoga in Hindi ) 

 

 

 

योग भारतीय ज्ञान के भंडार की एक विशिष्ट खोज है। यह बहुत ही पुरानी है और इसका उल्लेख हमारे धर्मग्रंथो में भी मिलता है। योग सिर्फ व्यायाम या फिर आसन नहीं है यह भावनाओ का एकीकरण है।

 

 

 

 

योग हमारे मन को शांत करता है। छान्दोग्य उपनिषद में भी योग की व्याख्या की गई है और भगवद्गीता के साथ ही महाभारत के शांति पर्व में भी योग का उल्लेख है। भगवान शिव को पहला योगी या आदि योगी कहा जाता है।

 

 

 

 

 

Yog Bhartiya Gyan Ke Bhndaar Ki Ek Vishisht Khoj Hai. Yah Bahut Hi Purani Hai Aur Isaka Ullekh Hamare Dharmagrtho Me Bhi Milata Hai.

 

 

 

 

Yog Sirf Vyayam Ya Fir Aasan Nhi Hai, Yah Bhawanao Ka Ekikarn Hai. Yog Hamare Man Ko Shant Karata Hai. Chaandogy Upnishad Me Bhi Yog Ki Vyakhya Ki Gai Hai Aur Bhagwadgita Ke Sath Hi Mahabharat Ke Shanti Parv Me Bhi Yog Ka Ullekh Hai. Bhagawan Shiv Ko Pahala Yogi Ya Aadi Yogi Kaha Jata Hai. 

 

 

 

आज के समय में योग पूरी दुनिया में विख्यात हो चुका है। भारत में पहले स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है। आज की भागा दौड़ी में अपने चित्त को शांत रखने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग बहुत ही जरुरी है।

 

 

 

 

योग की मान्यता हिन्दू धर्म ग्रंथो में दी गई है। पहले के समय में ऋषि मुनि योग के माध्यम से अपने शरीर को ऊर्जावान बनाते थे। हठ योग, देव योग, धराव योग जैसे विशेष योग विधिया है।

 

 

 

 

इन योग क्रियाओं को जानने के लिए योगा बुक्स डाऊनलोड कर ले और अच्छे योगा शिक्षक के सानिध्य में योग जरूर करे।

 

 

 

 

 

Aaj Ke Samay Me Yoga Puri Duniya Me Vikhyat Ho Chuka Hai. Bhart Me Pahale Star Par Yoga Diwas Manaya Jata Hai. 

 

 

 

 

Aaj Ki Bhaga Daudi Me Apane Chitt Ko Shant Rakhane Aur Sharir Ko Swasth Rakhane Ke Liye Yog Bahut Hi Jaruri Hai.

 

 

 

Yog Ki Manyata Hindu Dharm Grntho Me Di Gai Hai. Pahale Ke Samay Me Rishi Muni Yog Ke Madhyam Se Apane Sharir Ko Urjawan Bnate The. 

 

 

 

 

Hath Yog, Dev Yog, Dharav Yog Jaise Vishesh Yog Vidhiya Hai. In Yog Kriyayo Ko Janane Ke Liye Yoga Books Download Kar Le Aur Achhe Yoga Shikshak Ke Sanidhy Me Yog Jarur Kare.

 

 

 

Yoga Books in Hindi PDF Free
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प्राणायाम

 

 

प्राणायाम को आमतौर पर स्वांस को नियंत्रित करने की प्रक्रिया समझा जाता है, परन्तु यह इससे बहुत आगे है। प्रणायाम को समझने के पहले उसके अर्थ को समझना होगा, फिर आप प्राणायाम के बारे में बेहतर समझ पाएंगे।

 

 

 

प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है प्राण और आयाम। प्राण का मतलब है महत्वपूर्ण ऊर्जा या फिर जीवन शक्ति और आयाम का अर्थ है विस्तार करना। प्राणायाम के माध्यम से ऊर्जा शरीर के सभी नाड़ियो में पहुंचती है।

 

 

 

प्राणायाम के प्रकार कौन-कौन से है?

 

 

 

1- नाड़ी शोधन प्राणायाम।

2- शीतली प्राणायाम।

3- उज्जयी प्राणायाम।

4- कपालभाती प्राणायाम।

5- डिग्र प्राणायाम।

6- भास्त्रिका प्राणायाम।

7- बाह्य प्राणायाम।

8- भ्रामरी प्राणायाम।

9- अनुलोम-विलोम प्राणायाम।

10- अग्निसार प्राणायाम।

 

 

 

प्राणायाम के लाभ 

 

 

 

प्राणायाम के माध्यम से अस्थमा, तनाव, हकलाना आदि बीमारी को ठीक किया जा सकता है।

2- चित्त शांत और प्रसन्न रहता है।

3- नियमित प्राणायाम से आयु लंबी होती है।

4- प्राणायाम करने से शरीर, मन, आत्मा में तालमेल बना रहता है।

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने  के लिये – वास्तु शास्त्र की महत्वपूर्ण बातें, जैसे शरीर का निर्माण पांच तत्वों से होता है। क्षिति जल पावक गगन समीरा , पंच रचित यह अधम शरीरा। उसी तरह घर बनाने में इन पंच तत्वों का और दशो दिशाओं का विशेष ध्यान दिया जाता है।

 

 

 

 

अगर वास्तु के अनुसार घर का प्रत्येक कोना दिशाओं के अनुरूप होता है, तो घर में सुख शांति बनी रहती है और प्रतिकूल रहने पर अशांति को आमंत्रण देती है।

 

 

 

 

वास्तु का सीधा संबंध दिशाओं और ऊर्जाओं से होता है। इसके अंतर्गत दिशाओं को आधार बनाकर आस-पास मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं को सकारात्मक किया जाता है। जिससे मानव का जीवन अनुकूल बना रहे।

 

 

 

 

वास्तु में घोड़े की नाल, रसोईं घर में बल्ब और स्वास्तिक का ध्यान रखना चाहिए। घोड़े की नाल को घर के मुख्य दरवाजे पर लगवाना चाहिए। रसोईं गृह में एक जलता हुआ बल्ब अवश्य लगाना चाहिए।

 

 

 

 

घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से बड़ा सा स्वास्तिक चिन्ह बना देने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह या प्रभाव कम हो जाता है। सोने की दिशा, पेटी और टॉयलेट का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

 

 

 

आपकी सोने की दिशा दक्षिण की तरफ होनी चाहिए। आपका सिर दक्षिण की होना चाहिए। पश्चिम की तरफ सिर रखकर नहीं सोना चाहिए और कचरा उत्तर पूर्व में इकट्ठा ना होने दें और घर के पूर्व में टॉयलेट होने पर उसकी सीट इस तरह से लगवाए कि उसपर दक्षिण या उत्तर की तरफ मुख करके बैठ सके।

 

 

 

 

घर में रामायण का पाठ अवश्य करवाना चाहिए और घर के हाल में जहां आप बैठते है, वहां पीठ की तरफ पर्वत का चित्र लगवाना चाहिए। घर के उत्तर पूर्व में एक कलश रखें और वह कलश मिट्टी का होना चाहिए तथा खंडित नहीं होना चाहिए। कलश में हमेशा पानी भरा हुआ होना चाहिए। इस उपाय से आप वास्तु दोष को दूर कर सकते है।

 

 

 

 

 

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