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Yashpal Ki Kahaniyan Pdf / यशपाल की कहानियां Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Yashpal Ki Kahaniyan Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Yashpal Ki Kahaniyan Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Main Kaise Bana Ambedkar Books Pdf कर सकते हैं।

 

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Yashpal Ki Kahaniyan Pdf Download

 

 

 

 

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जग का मुजरा हिंदी कहानी यहां से डाउनलोड करे।
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लैम्प शेड कहानी by यशपाल यहां से डाउनलोड करे।
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भूख के तीन दिन हिंदी कहानी यहां से डाउनलोड करे।
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देखा, सोचा, समझा हिंदी कहानी By यशपाल यहां से डाउनलोड करे।
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ओ भैरवी हिंदी कहानी यहां से डाउनलोड करे।
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धर्मयुद्ध हिंदी कहानी By यशपाल यहां से डाउनलोड करे।
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नकारा राजा Story Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

रघुराज सोनकर दौड़ते हुए ही बाजार में पहुँच गया जो उसके गांव के समीप ही था। वहां जाकर एक हलवाई की दुकान पर बैठकर बोला – वहां सब रघुराज को पहचानते थे। हलवाई का नाम दिनेश था। रघु ने कहा – दिनेश भाई हनुमान जी के मंदिर पर जितने भी श्रद्धालु आये हुए है।

 

 

 

 

 

उनके लिए चाय और जलपान लेकर आपको अभी जाना है तथा वहां आये हुए सभी श्रद्धालुओं की सेवा में उपस्थित करना है लेकिन मेरा नाम नहीं बताना अगर कोई पुछे तो कह देना कि यह सरोज सेवा केंद्र की तरफ से है और वहां से आने के बाद हमसे तुरंत ही पैसे ले लेना।

 

 

 

 

दिनेश चाय और अन्य अल्पाहार लेकर हनुमान  आये सभी श्रद्धालुओं को समर्पित करके लौट आया। तब उससे रघु ने पूछा कितना रुपया आपका हुआ तो दिनेश बोला पचास रुपया। दिनेश ने कुछ इस तरह से कहा कि शायद रघु पचास रूपये देने में हिचकेगा क्योंकि देहात में आज भी पचास रुपये बहुत होता है।

 

 

 

 

लेकिन रघु ने पचास रूपया तुरंत ही दिनेश को दे दिया। पैसा लेने के बाद दिनेश रघु का मुंह देखता रह गया लेकिन रघु ने हनुमान जी की मूर्ति के सामने सिर झुकाकर प्रणाम करके घर की तरफ चल दिया।

 

 

 

 

डा. निशा भारती अपने क्लिनिक में मरीजों की सेवा में व्यस्त थी। तभी तीन साल की सरिता दौड़कर उनके पास आयी और बोली – मम्मी-मम्मी उधर देखो एक आदमी सड़क के उस पार गिर पड़ा है उसे बहुत घाव लगी है। आप उसको दवा दे दो ना मम्मी।

 

 

 

 

डा. निशा की नजर सड़क के उस पार गयी। वहां एक 60-62 साल का अधेड़ आदमी गिरा हुआ था। उसको गहरा घाव लगा हुआ था। वह घायल आदमी उठने का प्रयास करता था लेकिन उठ नहीं सकता था। डा. निशा भारती स्वयं ही चलकर उसके पास गयी।

 

 

 

 

डा. निशा भारती को देखकर कुछ लोग स्वयं सहायता करने के लिए वहां पहुँच गए और उसे उठाकर डा. भारती के क्लिनिक में लेकर आ गए। डा. भारती ने उसे स्वयं अपने हाथो से मरहम पट्टी करके प्राथमिक उपचार किया। उसे सभी लोग पहचानते थे।

 

 

 

 

उनका परोपकारी स्वभाव और एक सरकारी डा. इसलिए ही उस अनजान आदमी का विशेष ध्यान उस अस्पताल में रखा गया था। डा. निशा के क्लिनिक में उपस्थित सभी के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा। जैसी मां वैसी ही बेटी। कई लोग कह रहे थे।

 

 

 

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