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Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf free Download कर सकते हैं और आप यहां से  यजुर्वेद इन हिंदी पीडीएफ भी पढ़ सकते हैं।

 

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Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf / यजुर्वेद संध्यावन्दनं पीडीएफ 

 

 

Yajurveda Sandhyavandanam Sanskrit pdf

 

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Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf Download
Yajurveda Sandhyavandanam in Hindi Pdf Download
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Krishna Yajurveda Sandhyavandanam Sanskrit Pdf

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सीता जी बार-बार श्री राम जी को देखती है और सकुचा जाती है। पर उनका मन नहीं सकुचाता है। प्रेम की प्यास से उनके नैन मछलियों की छवि का हरण कर रहे है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- श्री राम जी का शरीर स्वभाव से ही सुंदर है। उनकी शोभायमान छवि से करोडो कामदेव लज्जित हो जाते है। उनके चरण कमल में महावर लगी हुई है, जो बड़े ही सुहावने लगते है। जिसके ऊपर मुनियो के मन रूपी भँवरे सदा गुंजायमान रहते है।

 

 

 

 

2- पवित्र और मनोहर धोती की शोभा से प्रातः काल का सूर्य मलिन जान पड़ता है और बिजली की ज्योति भी फीकी पड़ जा रही है। कमर में कटिसूत्र के साथ ही सुंदर किं किणी बंधी हुई है जो अतिशय सुंदर लगती है और उनकी विशाल भुजाओ में सुंदर आभूषण सुशोभित हो रहे है।

 

 

 

 

3- श्री राम के कंधे पर पीला जनेऊ ऐसे शोभा पा रहा है मानो स्वर्ण की पतली रेखा विराजमान हो, और उनके हाथ की अंगूठी तो सबके ही चित्त को चुरा लेती है। ब्याह के सभी साज सजे हुए भली प्रकार सुशोभित हो रहे है और चौड़े वक्षस्थल पर पहनने योग्य सुंदर आभूषण विद्यमान है।

 

 

 

 

4- सुंदर भौहे और मनोहर नासिका है। ललाट पर तिलक तो सुंदरता का घर है जो अपनी तरफ सबको आकर्षित कर लेता है और उस मौर में मंगलमय मोती और मणियों को लगाया गया है जो शोभा की अपार मूर्ति श्री राम जी की शोभा को अधिक रूप से बढ़ा रहा है।

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

 

1- सुंदर मौर में सुंदर मणियों को भली प्रकार से लगाया गया है। सभी अंग चित्त को चुरा लेते है। नगर की भी सुंदर स्त्रियां और देव सुंदरियां दुलह को देखकर तिनका तोड़ते हुए बलैया ले रही है और मणि, वस्त्र तथा आभूषण निछावर करके आरती उतार रही है और सूत, मागध, भाट सुयश सुना रहे है।

 

 

 

 

2- सुहागिन स्त्रियां सुख पाकर कुंवर और कुमारियों को कोहवर में कुल देवता के स्थान पर ले आयी और अत्यंत ही प्रेम से मंगल गीत गाते हुए लौकिक रीतियों का निर्वाहन कर रही है।

 

 

 

 

पार्वती जी स्वयं श्री राम जी को लहकौर की रीति, जिसमे वर-वधु का परस्पर ग्रास देना सिखा रही है। तो स्वयं सरस्वती उपस्थित होकर सीता को सिखाती है। रनिवास हास-विलास के आनंद में मग्न है और श्री राम जी को देख-देखकर सभी जन्म सुफल प्राप्त कर रही है।

 

 

 

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