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या देवी सर्व भूतेषु Pdf / Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Hanuman Jyotish Book Pdf कर सकते हैं।

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Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf
पुस्तक के लेखक 
भाषा  हिंदी 
साइज  0.06 Mb 
पृष्ठ 
श्रेणी  धार्मिक 
फॉर्मेट  Pdf 

 

 

 

या देवी सर्व भूतेषु Pdf Download

 

 

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Ya Devi Sarva Bhuteshu Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

उन्होंने हर्ष पूर्वक मुसकराकर कुमार को परमोत्तम ऐश्वर्य प्रदान किया साथ ही चिरंजीवी भी बना दिया। लक्ष्मी ने दिव्य सम्पत तथा एक विशाल मनोहर हार अर्पित किया। सावित्री ने प्रसन्न होकर सारी सिद्ध विद्याये प्रदान की। मुनिश्रेष्ठ! इस प्रकार वहां महोत्सव मनाया गया। सभी के मन प्रसन्न थे।

 

 

 

विशेषतः शिव और पार्वती के आनंद का पार नहीं था। इसी बीच देवताओ ने भगवान शंकर से कहा – प्रभो! यह तारकासुर कुमार के हाथो ही मारा जाने वाला है इसिलए यह उत्तम चरित्र घटित हुआ है। अतः हम लोगो के सुखार्थ उसका काम तमाम करने हेतु कुमार को आज्ञा दीजिए।

 

 

 

हम लोग आज ही सेना से सुसज्जित होकर तारक को मारने के लिए रण यात्रा करेंगे। ब्रह्मा जी कहते है – मुने! यह सुनकर भगवान शंकर का हृदय दयार्द्र हो गया। उन्होंने उनकी प्रार्थना स्वीकार करके उसी समय तारक का वध करने के लिए अपने पुत्र कुमार को देवताओ को सौप दिया।

 

 

 

फिर तो शिव जी की आज्ञा मिल जाने पर ब्रह्मा, विष्णु आदि सभी देवता एकत्र होकर गुह्यको आगे करके तुरंत ही उस पर्वत से चल दिए। उस समय श्री हरि आदि देवताओ के मन में पूर्ण विश्वास था कि ये अवश्य तारका का वध कर डालेंगे। वे भगवान शंकर के तेज से भावित हो कुमार के सेनापतित्व में तारक का संहार करने के लिए रणक्षेत्र में आये।

 

 

 

उधर महाबली तारक ने इस युद्धोद्योग को सुना तब वह भी एक विशाल सेना के साथ देवो से युद्ध करने के लिए तुरंत ही चल पड़ा। उसकी उस विशाल वाहिनी को आती देख देवताओ को परम विस्मय हुआ। फिर तो वे बलपूर्वक बारंबार सिंहनाद करने लगे।

 

 

 

उसी समय तुरंत ही भगवान शंकर की प्रेरणा से विष्णु आदि सम्पूर्ण देवताओ के प्रति आकाशवाणी हुई। देवगण! तुम लोग जो कुमार के अधिनायकत्व में युद्ध करने के लिए उद्यत हुए हो इससे तुम संग्राम में दैत्यों को जीतकर विजयी होओगे। ब्रह्मा जी कहते है – मुने! उस समय आकाशवाणी को सुनकर सभी देवताओ का उत्साह बढ़ गया।

 

 

 

उनका डर जाता रहा और वे वीरोचित गर्जना करने लगे। उनकी युद्ध कामना बलवती हो उठी और वे सब के सब कुमार को अग्रणी बनाकर बड़ी उतावली के साथ महीसागर संगम को गए। वह बहुसंख्यक असुररो से घिरा हुआ तारक भी बहुत बड़ी सेना के साथ शीघ्र ही वहां आ धमका जहां वे सभी देवता खड़े थे।

 

 

 

उस असुर के आगमन काल में प्रलयकालीन मेघो के समान गर्जना करने वाली रणभेरियां तथा अन्यान्य कर्कश शब्द करने वाले रणबाद्य बज रहे थे। उस समय तारकासुर के साथ आने वाले दैत्य ताल ठोकते हुए गर्जना कर रहे थे। उनके पदाघात से धरती हिल जाती थी।

 

 

 

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