Wings Of Fire Pdf in Hindi / विंग्स ऑफ़ फॉयर इन हिंदी पीडीएफ

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Agni Ki Udaan in Hindi Pdf / अग्नि की उड़ान बुक डाउनलोड PDF in Hindi

 

 

 

विंग्स ऑफ़ फॉयर इन हिंदी Pdf Free Download भाग 1 

 

विंग्स ऑफ़ फॉयर इन हिंदी पीडीएफ भाग 2 

 

 

 

 

 

 

विंग ऑफ़ फायर भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक Dr. A.P.J . Abdul Kalam की आत्मकथा है। Wings Of Fire के सहलेखक अरुण तिवारी है।

 

 

 

डा.कलाम का जन्म 1931 में भारत के तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। डा.कलाम का जन्म एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था।

 

 

 

उनका प्रारंभिक जीवन अत्यंत संघर्षमय गुजरा। उन्होंने अत्यंत कठिनाईयों से गुजरते हुए अपनी शिक्षा पूरी की और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और फिर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की बागडोर संभाली।

 

 

 

 

उन्होंने कई सफल अनुसंधान किये। रॉकेट साइंस और स्पेस टेक्नोलॉजी में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए। Wings Of Fire डा. कलाम की जीवन में महत्वपूर्ण घटनाओ पर प्रकाश डालती है।

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

श्री कृष्ण कहते है – हे भरत पुत्र ! सतोगुण मनुष्य को सुख से बांधता है, रजोगुण सकाम कर्म से बांधता है और तमोगुण मनुष्य के ज्ञान को ढककर पागलपन से बांधता है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – जिस प्रकार शिक्षक, दार्शनिक या वैज्ञानिक अपनी विद्याओ में निरंतर रहकर संतुष्ट रहते है। उसी प्रकार से सतोगुण में स्थित पुरुष अपने कर्म या बौद्धिक तृप्ति से संतुष्ट रहता है।

 

 

 

 

रजोगुण में स्थित मनुष्य यथा संभव धन प्राप्त करके उत्तम कार्यो में लगता है। कभी-कभी वह अस्पताल खोलता है और धर्मार्थ संस्थाओ को दान देता है।

 

 

 

 

रजोगुणी व्यक्ति सकाम कर्मो में लगा रहता है। यह सब लक्षण रजोगुणी व्यक्ति के है। तमोगुण में रहकर मनुष्य जो भी करता है वह कार्य न तो उसके लिए न तो अन्य लोगो के लिए हितकर होता होता है क्योंकि तमोगुण में रहने के कारण उस व्यक्ति का ज्ञान तमोगुण के अंधकार से ढका हुआ रहता है जिसे भ्रष्ट बुद्धि कहते है।

 

 

 

 

10- सतोगुण,  रजोगुण, तमोगुण में श्रेष्ठता की प्रतिस्पर्धा –  श्री कृष्ण सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण के विषय में बताते हुए कहते है। हे भरत पुत्र ! कभी-कभी सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण को परास्त करके प्रधान बन जाता है तो कभी रजोगुण, सतो तथा तमोगुण को परास्त कर देता है और कभी ऐसा होता है कि तमोगुण, सतो तथा रजोगुण को परास्त कर देता है। इस प्रकार से निरंतर श्रेष्ठता के लिए स्पर्धा चलती रहती है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – प्रकृति के किसी एक गुण की प्रधानता मनुष्य के आचरण में, उसके कार्य कलापो में उसके खान-पान आदि में प्रकट होती रहती है।

 

 

 

 

इन सबकी व्याख्या अगले अध्यायों में की जाएगी लेकिन यदि कोई चाहे तो अभ्यास के द्वारा सतोगुण विकसित कर सकता है इस प्रकार रजोगुण तथा तमोगुण को परास्त कर सकता है।

 

 

 

 

जब रजोगुण की प्रधानता रहती है तब सतोगुण तथा तमोगुण परास्त रहते है। जब सतोगुण की प्रधानता रहने पर रजोगुण तथा तमोगुण परास्त हो जाते है।

 

 

 

इन तीनो गुणों की यह प्रतियोगिता निरंतर ही चलती रहती है। अतः कृष्ण भावनामृत जो व्यक्ति उन्नति करने की वास्तविक इच्छा रखता है उसे इन तीनो गुणों को जो प्रकृति द्वारा प्रदत्त होते है लांघना पड़ता है।

 

 

 

 

इस प्रकार रजोगुण विकसित करके तमोगुण तथा सतोगुण को परास्त कर सकता है अथवा कोई चाहे तो अपने अंदर के तमोगुण को विकसित करते हुए सतोगुण और रजोगुण को परास्त कर सकता है।

 

 

 

यद्यपि यह प्रकृति के तीन गुण होते है। यदि कोई संकल्प कर ले तो उसे सतोगुण का आशीर्वाद मिल ही सकता है और वह इसे लांघकर शुद्ध सतोगुण की स्थिति हो सकता है जिसे वासुदेव अवस्था कहते है।

 

 

 

 

 

जिसमे उसे ईश्वर के विज्ञान को समझने की बुद्धि प्राप्त हो जाती है। किसी व्यक्ति के विशिष्ट कार्यो को देखकर ही समझा जा सकता है। कि वह व्यक्ति किस गुण में स्थित है।

 

 

 

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