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Vishnu Sahasranamam Pdf / Ram Raksha Stotra Pdf / Lokgeet Pdf

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मित्रों इस पोस्ट में Vishnu Sahasranamam Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से Vishnu Sahasranamam Pdf फ्री डाउनलोड कर सकते हैं और आप यहां से  अजातशत्रु Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Vishnu Sahasranamam Pdf

 

 

 

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Vishnu Sahasranamam Pdf
यहां से Vishnu Sahasranamam Pdf डाउनलोड करे।
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Ram Raksha Stotra In Hindi Pdf
आप यहां से Shri Ram Raksha Stotra In Hindi Pdf Free Download कर सकते है। 
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Vishnu Sahasranamam Pdf
Ram Raksha Stotra In Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Vishnu Sahasranamam Pdf
हिंदी प्रदेश के लोकगीत फ्री डाउनलोड यहां से करे।
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Lok Geet in Hindi Pdf
जब निमाड़ गाता है। 
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Lok Geet in Hindi Pdf
बांसुरी बज रही है 
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कृष्ण कहते है – देहधारी जीव इन्द्रिय भोग से भले ही निवृत्त हो जाय पर उसमे इन्द्रिय भोगो की इच्छा बनी रहती है। लेकिन उत्तम रस के अनुभव होने से ऐसे कार्यो को बंद करने पर वह भक्ति में स्थिर हो जाता है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – जिसने भी कृष्ण भावनामृत के पथ पर प्रगति के क्रम में परमेश्वर कृष्ण के सौंदर्य का रसास्वादन कर लिया है। उसे जड़, भौतिक वस्तुओ में कोई रूचि नहीं रह जाती है। अतः आध्यात्मिक जीवन में यह यह सारे प्रतिबंध अल्पज्ञानी नवदीक्षितों के लिए है और ऐसे प्रतिबंध तभी तक ठीक है जब तक कृष्ण भावनामृत में रूचि जागृत नहीं हो जाती है। जब तक कोई आध्यात्म को प्राप्त न हो तब तक इन्द्रिय भोग से विरत होना असम्भव है।

 

 

 

 

विधि विधानों द्वारा इन्द्रिय भोग को संयमित करने की विधि वैसी ही है जैसे किसी रोगी के किसी भोज्य पदार्थ खाने पर प्रतिबंध लगाना। किन्तु इससे रोगी को न तो भोजन के प्रति रूचि समाप्त होती है और न वह ऐसा प्रतिबंध ही लगाया जाना चाहता है। इसी प्रकार से अल्पज्ञानी व्यक्तियों के लिए इन्द्रिय संयमन के लिए अष्टांग योग जैसी विधि की संस्तुति की जाती है। जिससे यम, नियम, आसन, प्राणायाम, पत्याहार, धारणा, ध्यान आदि सम्मिलित है। जब कृष्ण भावनामृत में रूचि जग जाती है तो मनुष्य में स्वतः ऐसी वस्तुओ के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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