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Vicky Anand Hindi Novel Pdf download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Vicky Anand Hindi Novel Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Vicky Anand Hindi Novel Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से ओम प्रकाश शर्मा नावेल फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

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Vicky Anand Hindi Novel Pdf 

 

 

 

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Vicky Anand Hindi Novel Pdf
शैतान उपन्यास Pdf Free Download
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तबाही उपन्यास Pdf Free Download
शाहीन की तबाही उपन्यास Pdf Free Download
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कोहराम उपन्यास Pdf Free Download
कोहराम उपन्यास Pdf Free Download
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

कार्तिक रात को दस बजे अपने घर आया तो उसने देखा माता पिता के साथ एक अजनबी युवक भी है। वह कुछ पूछता उसके पहले ही पराग बोले – बेटा यह सरदार युवक कानपुर का रहने वाला है और कलकत्ता घूमने आया है क्या इसके लिए तुम्हारी कम्पनी में कोई कार्य है?

 

 

 

अगर कोई कार्य है तो इसे बताओ अन्यथा यह दस दिन में कानपुर चला जायेगा। जबकि दास पाढ़ा में इसके मामा की दाल मिल है लेकिन वह अपने मामा के पास नहीं जाता चाहता है। कार्तिक बोला इस विषय में हम कल बात करेंगे अभी तो हमे भूख लगी हुई है।

 

 

 

केतकी रसोई में जाने लगी तो राजिंदर बोला मां जी मैं कार्तिक जी के लिए भोजन निकालकर लाता हूँ और वह रसोई में सबके लिए ही भोजन निकालने लगा। कार्तिक ने पूछा मां आपने भोजन क्यों नहीं निकाला? केतकी बोली यह राजिंदर हमे मना कर देता है और भोजन भी इसी ने तैयार किया है।

 

 

 

हम लोग जब गांव में थे तब तुम्हारा भोजन कैसे बनता था केतकी ने पूछा। कार्तिक बोला मां तुम्हे मालूम है कि मैं अपना भोजन बना लेता हूँ, सुबह का भोजन मैं खुद बना लेता था और रात्रि का भोजन कम्पनी से एक नौकर आकर बना देता था लेकिन केतकी ने कार्तिक की इस बात पर विश्वास नहीं किया।

 

 

 

सभी लोग भोजन करके रात्रि विश्राम करने लगे। केतकी ने राजिंदर के लिए एक कमरा अलग से दे दिया था। सुबह होने पराग भी ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गए थे क्योंकि वह बहुत दिनों से ऑफिस नहीं गए थे। कम्पनी में सफाई कर्मचारी साढ़े आठ बजे आ गया था उसी समय पराग भी कम्पनी में पहुँच गए।

 

 

 

सफाई कर्मचारी का नाम गोलू था उसने सबसे पहले ऑफिस साफ किया। पराग जाकर ऑफिस में बैठ गए। गोलू अपने दूसरे काम में लग गया। नौ बजे सभी कर्मचारी आ गए और कम्पनी में कार्य शुरू हो गया। पराग एक-एक करके सभी फ़ाइल को देखते जा रहे थे।

 

 

 

सब कुछ सही ढंग से फ़ाइल में लिखा गया था। कम्पनी और दुकान का टैक्स, बिजली विभाग का बिल,

 

 

 

पराग बोले – मैं कार्तिक की इसी तलाश में यहां तक आया हूँ कि शायद आपसे कुछ सहायता मिल सके। पराग की बात सुनकर केशरी सोचने लगे। तभी पराग बोले – केशरी भाई! आप हमारे मां के लड़के हो गांव में ही रहते हुए हर तरह के समाज को देखते रहते हो अब आप ही कुछ सहायता करो।

 

 

 

केशरी बोले – इस आधुनिक युग में श्रवण कुमार कहाँ से आ गया जो अपने विचार को जिंदगी की कांवर में बैठाकर जीवन संग्राम की यात्रा में चल पड़ा है कि शायद उसे कही मंजिल मिल जाए जहां वह थक हारकर दो पल विश्राम कर सके।

 

 

 

ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है पराग भाई कि इस आधुनिक युग मे कोई व्यक्ति कोयले के बीच से निकल जाये और उसे जरा भी दाग न लग सके। शायद यह हमारे दोनों के खानदान का असर है जो कार्तिक जैसा कुल दीपक पैदा हुआ है।

 

 

 

केशरी फिर बोले – पराग भाई! यह ब्रिटेन नहीं भारत है भारत कितना भी आधुनिक हो गया हो लेकिन अभी यहां संस्कारवान मनुष्य और उनके खानदान मिल जायेंगे जो अपने संस्कार के आगे सम्पत्ति को कुछ भी नहीं समझते है। मै कई जगह देखने के बाद फिर आपको बताऊंगा।

 

 

 

पराग अपने ननिहाल से लौटकर अपने गांव कीरतपुर आ गए थे। गांव में पारग का कच्चा मकान पुराने ढंग से बना हुआ था जो आज भी अपनी बनावट से ईट के बने हुए घरो का उपहास करता था। एक दिन शाम को पराग अपने दरवाजे पर बैठे थे तो उनके पड़ोस का वृजेश जिसे लोग विरजू कहते थे वहां आया।

 

 

 

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