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Ved Prakash Sharma Hindi novel Vijay Vikas Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ved Prakash Sharma Hindi novel Vijay Vikas Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ved Prakash Sharma Hindi novel Vijay Vikas Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से यार जादूगर pdf Download कर सकते हैं।

 

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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

कार्तिक हैंडलूम में चार औरत कर्मचारियों की जगह खाली थी। कार्तिक अपने ऑफिस में आकर जैसे ही बैठा उसी कम्पनी के में दरवाजे पर खड़े दरबान ने आकर कार्तिक से बताया कि दो औरते काम के लिए आपसे मिलना चाहती है। कार्तिक ने दरबान से कहा कि उन्हें ऑफिस में भेज दो।

 

 

 

 

दरबान तुरंत ही बाहर चला गया और अपने साथ दो औरतो को लिवा लाया। दोनों औरते कार्तिक के सामने कुर्सी पर बैठ गयी। कार्तिक दुकान और कम्पनी की फ़ाइल में उलझा हुआ था। वह फ़ाइल देखते हुए ही पूछा आप लोगो का नाम क्या है।

 

 

 

 

दोनों औरतो ने अपना नाम रचना दास प्रिय मोहंथी बताया। कुछ समय के बाद फ़ाइल रखते हुए कार्तिक ने अपना चेहरा ऊपर किया तो एकदम ही चौक गया क्योंकि उसके सामने वही भिखारन लड़की बैठी थी जो चितरपुर रोड की बैंक शाखा में मैनेजर थी और सबकी नजरो से बचकर भीख मांगती थी।

 

 

 

 

रचना दास भी कार्तिक को देखकर चौंक गयी थी चौंकने का उचित कारण भी था। वह जिसे एक साधारण धनी वर्ग का लड़का समझती थी वह तो उससे भी बढ़कर एक कम्पनी का मालिक निकला। अब रचना दास ने अपने मन में निश्चय किया कि कार्तिक से कुछ नहीं छुपाएगी।

 

 

 

 

कार्तिक ने रचना दास से प्रश्न किया क्या आप पहले बैंक में मैनेजर थी। रचना ने हां में जवाब दिया। कार्तिक ने दूसरा प्रश्न किया क्या आप भिखारियों की सहायता के लिए भीख मांगती थी? रचना ने पूरी निडरता के साथ कहा हां। कार्तिक ने तीसरा प्रश्न किया क्या आपने बैंक मैनेजर का पद छोड़ दिया है अगर छोड़ दिया तो क्यों और आप यहां क्यों कार्य करना है?

 

 

 

 

एक साथ तीन प्रश्न का उत्तर रचना को देना था। उसे बहुत ही झुंझलाहट होने लगी लेकिन उसने खुद को संयत किया और कार्तिक के सभी प्रश्नो का उत्तर देने लगी। रचना बोली पहले मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूँ मैंने बैंक मैनेजर के पद का त्याग नहीं किया है और ना ही उसे त्यागने का इरादा है।

 

 

 

 

मैं अन्य लोगो की सहायता के लिए ही आपके पास कार्य करना चाहती हूँ ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगो की सहायता कर सकूँ।

 

 

 

कार्तिक पूछने लगा आप बैंक और कम्पनी के बीच में कैसे ताल-मेल बैठा पाएंगी। रचन अबोली बैंक में कार्य का समय आठ घंटे का रहता है और आपकी कम्पनी में हमे सिर्फ चार घंटा ही कार्य करना है और वह कार्य भी कर्मचारियों की फाइलो से संबंधित है जो मैं बहुत आसानी से पूरा कर सकती हूँ।

 

 

 

 

ठीक है आप दोनों कल से यहां कार्य के लिए आ सकती है। रचना बोली लेकिन कार्तिक जी हमे आपके पास कार्य नहीं करना है। कार्तिक बोला लेकिन यहां क्यों नहीं कार्य करना है। रचना बोली आप कार्य के शुरुवात मे इतना दबाव प्रश्नो के माध्यम से बना रहे है तो कार्य करते समय हस्तक्षेप नहीं होगा यह कैसे संभव है।

 

 

 

 

कार्तिक बोला आपका सोचना एकदम सही है लेकिन आप भी एक बैंक में मैनेजर है क्या आप अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से प्रश्न नहीं करती है? रचना जी हर कम्पनी के अपने नियम होते है। हमारी कम्पनी में औरतो की संख्या आदमियों से ज्यादा है।

 

 

 

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