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Vashikaran Mantra Pdf / वशीकरण मंत्र Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Vashikaran Mantra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Vashikaran Mantra Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से इंद्रजाल बुक फ्री डाउनलोड भी पढ़ सकते हैं।

 

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Vashikaran Mantra Pdf / वशीकरण मंत्र पीडीएफ

 

 

 

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Vashikaran Mantra Pdf
वशीकरण मंत्र Pdf Download
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Vashikaran Mantra Pdf
वशीकरण मंत्र मोहिनी मंत्र pdf Download यहां से करे।
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Vashikaran Mantra Pdf
पुराना इंद्रजाल वशीकरण मंत्र pdf Download
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

 

उन श्रेष्ठ पतिव्रता स्त्रियों में शिरोमणि सीता जी की साथरी (कुश शय्या) देखकर मेरा हृदय दहलकर क्यों नहीं फट जाता है? हे शंकर! क्या यह वज्र से भी अधिक कठोर है?

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

1- मेरे छोटे भाई लक्ष्मण बहुत ही सुंदर और प्रिय है। ऐसे भाई न तो किसी के हुए, न है, न होने वाले है। जो लक्ष्मण अवध के लोगो को प्यारे, माता पिता के दुलारे और श्री राम जी को प्राण से भी प्यारे है।

 

 

 

2- जिसकी कोमल मूर्ति और सुकुमार स्वभाव है जिनके शरीर में कभी गरम हवा तक नहीं लगी वह वन में इस प्रकार की विपत्तियां सह रहे है। हाय! मेरी छाती ने कठोरता में करोडो बज्रो की निंदा करके उनसे भी कठोर है, नहीं तो यह कब की फट गई होती।

 

 

 

 

3- श्री राम जी अवतार लेकर जगत को प्रकाशित परम सुशोभित कर दिया। वह रूप, शील, सुख और समस्त गुणों के समुद्र है। पुरवासी कुटुंबी, गिरु, पिता-माता सबको ही श्री राम जी का स्वभाव सुख प्रदान करने वाला है।

 

 

 

 

4- शत्रु भी श्री राम जी की बड़ाई करते है, बोल-चाल मिलने का ढंग और विनय से वह मन को हर लेते है। करोडो सरस्वती और करोडो शेष जी भी प्रभु श्री राम जी गुण समूहों की गिनती नहीं कर सकते है।

 

 

 

 

200- दोहा का अर्थ-

 

 

जो सुख स्वरुप रघुवंशमणि श्री राम जी मंगल और आनंद के भंडार है, वह पृथ्वी पर कुशा बिछाकर सोते है (विधाता की गति बड़ी ही बलवान है)।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

1- श्री राम जी कभी दुःख का नाम नहीं सुना, महाराज स्वयं ही जीवन वृक्ष की तरह उनकी देख-भाल करते थे। सब माताएं भी रात-दिन उनकी ऐसी देख-रेख करती थी, जैसे पलक नेत्र की और सांप मणि की करते है।

 

 

 

2- वही श्री राम जी अब जंगल में पैदल विचरण कर रहे है और कंद-मूल तथा फल-फूलो का भोजन करते है। इस अमंगल मूल कैकेयी को धिक्कार है जो अपने प्राण प्रियतम पति से भी प्रतिकूल हो गई।

 

 

 

 

3- मुझ पाप के समुद्र को धिक्कार है, धिक्कार है, जिसके कारण ही यह सब उत्पात हुआ। विधाता ने मुझे कुल का कलंक बनाकर पैदा किया और कुमाता ने मुझे स्वामिद्रोही बना दिया।

 

 

 

 

4- यह सुनकर निषाद राज प्रेम पूर्वक समझाने लगा, हे नाथ! आप किसलिए व्यर्थ विषाद करते है। श्री राम जी आपको प्रिय है और आप श्री राम जी को प्रिय है। यही निचोड़ (निश्चित सिद्धांत है) दोष तो प्रतिकूल विधाता का है।

 

 

 

 

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