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Vardi Wala Gunda Novel pdf / वर्दी वाला गुंडा उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Vardi Wala Gunda Novel pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Vardi Wala Gunda Novel pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Yashpal Ki Kahaniyan Pdf कर सकते हैं।

 

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Vardi Wala Gunda Novel pdf Download

 

 

 

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Vardi Wala Gunda Novel pdf
Vardi Wala Gunda Novel pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Vinashdoot Ved Prakash Sharma Hindi novel Vijay Vikas Pdf Download
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pahali kranti novel pdf पहली क्रांति उपन्यास Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सुधीर रोज की तरह नरेश के घर पर आ गया था उसकी रजनी के साथ अच्छी जमती थी और हमेशा ही दीदी यह बात दीदी वह बात करते रहता था। उसका मुंह कभी बंद नहीं होता था। रजनी तो कभी-कभी उसकी बातों से झुंझला उठती थी लेकिन अगले ही पल वह सामान्य हो जाती थी।

 

 

 

 

सुधीर उसका मुँह बोला भाई जो था। नरेश को अपने पढ़ाई से ही अवकाश नहीं मिलता था वह सदैव ही विवेक के घर पर पढ़ाई की ही बातें करता था। राजीव और मालती अपनी जीविका में ही उलझे हुए थे। एक सुधीर ही तो था जिससे रजनी अपनी बात कहती थी और सुधीर की परेशानी समझती थी।

 

 

 

 

इस समय सुधीर और रजनी दोनों कच्चे मिट्टी के बर्तन उठाकर ले आते थे जिन्हे मालती राजीव को देती थी और राजीव पूरी लगन के साथ ही उन कच्चे बर्तन को पकाने के लिए लाइन में रखते थे और छोटे बच्चो का मन भी इन्ही कच्चे मिट्टी के बर्तन के समान होता है।

 

 

 

 

अगर उनके ऊपर ध्यान न दिया जाय तो टूटने का खतरा अवश्य रहता है अन्यथा समय तो हर दर्द की हर मर्ज की दवा होती है लेकिन समय के साथ परिपक़्व होने में अपने से बड़े और बुजुर्ग लोगो का अनुभव सदैव ही कारगर होता है।

 

 

 

 

निशा कहने लगी – अब हम लोग चलेंगे नहीं तो आज कितने ही मरीजों को दवा नहीं मिल पायेगी। निशा प्रताप से बोली – पिता जी आप भी हमारे साथ चलो। बहुत दिन हो गए आप भी व्यस्त रहते है और मैं भी अपने मरीजों को नहीं छोड़ सकती हूँ। प्रताप बोला – अभी मैं चार दिन तक अपने गांव में और विंदकी में रहूंगा उसके मैं तुमसे मिलते हुए बंगलोर जाऊंगा।

 

 

 

 

निशा भारती, विपिन, कोमल तथा सरिता को लेकर आगरा आ गयी। प्रताप भारती और रघुराज सोनकर दोनों बाजार की तरफ चल दिए। सोनकर ने कहा – भारती जी मैं आपको गांव की बाजार ले चलता हूँ। आप तो बंगलौर जैसे शहर के रहने वाले है आपको गांव की बाजार अच्छी नहीं लगेगी।

 

 

 

 

अरे रघु भाई मैं भी तो इसी गांव में पला बढ़ा हूँ किस्मत मुझे बंगलोर लेकर गयी तो क्या मैं अपने गांव को भूल जाऊंगा? भगवान ने हमे इतनी सम्पदा दिया है कि मैं अपने गांव के लिए कुछ करना चाहता हूँ। मैं यहां के लोगो के लिए कुछ योगदान देना चाहता हूँ। रघु और प्रताप दोनों बाते करते हुए गांव के बाजार में पहुँच गए।

 

 

 

 

वहां हनुमान जी का एक मंदिर बना हुआ था। प्रताप ने पूछा यहां आने वाले श्रद्धालुओ की सेवा कौन करता है? क्या मतलब? प्रताप के प्रश्न को सुनकर रघु बोला – मतलब यह कि श्रद्धालुओं के चाय पानी की व्यवस्था और गर्मी में पानी पीने की व्यवस्था और अल्पाहार की व्यवस्था कैसी है।

 

 

 

 

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