RatRating Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF / वाल्मीकि रामायण फ्री डाउनलोड

Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF / वाल्मीकि रामायण फ्री डाउनलोड

Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF मित्रों यह Valmiki Ramayan Hindi Gita Press Gorakhpur PDF है।  इसमें आप वाल्मीकि रामायण के सभी सोपान को फ्री में डाउनलोड ( Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF ) कर सकते हैं।

 

 

 

Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF

 

 

 

 

 

1- ( बालकाण्ड फ्री डाउनलोड ) Balkand Free Download

 

2- ( किष्किन्धाकाण्ड फ्री डाउनलोड ) Valmiki Kishkindha Kand Download

 

3- ( अयोध्या काण्ड )   Ayodhya Kand

 

4- ( वाल्मीकि अरण्य काण्ड ) Valmiki Aranya Kand

 

5- ( सुन्दर काण्ड ) Valmiki Sundar Kand

 

6- ( युद्ध काण्ड ) Yuddh Kand Free Download

 

7- ( उत्तरकाण्ड ) Valmiki Uttarakhand

 

8- संपूर्ण वाल्मीकि रामायण पीडीएफ फ्री डाउनलोड 

 

 

 

 

वाल्मीकीय रामायण का हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। यह रामायण संस्कृत साहित्य का एक अनमोल अद्वितीय आरंभिक महाकाव्य है। जो अनुष्टुप छंदों में रचित है। इसमें श्री राम के चरित्र का उत्तम एवं वृद्ध विवरण काव्य रूप में मूर्त रूप लिया।

 

 

 

 

इस रामायण की यह अद्वितीय विशेषता है कि इसकी रचना आदि कवि ने श्री राम के अवतरित होने के पूर्व ही लिख दिया था और यह महाकाव्य की अद्भुत विशेषता है कि आदि कवि वाल्मीकि ने इस संस्कृत महाकाव्य में जैसा-जैसा वर्णन किया हुआ है। श्री राम के अवतरित होने के उपरांत वैसा ही घटित होता चला गया है।

 

 

 

 

 

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित होने के कारण ही इसे वाल्मीकीय रामायण के रूप में इस महाकाव्य की ख्याति हुई। वर्तमान में श्री राम के चरित्र पर आधारित जितने भी ग्रंथ उपलब्ध है। उन सबका मूल महर्षि वाल्मीकि कृत वाल्मीकीय रामायण ही है।

 

 

 

Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF
Valmiki Ramayan Hindi Gita Press PDF

 

 

 

 

वाल्मीकीय रामायण के जनक महर्षि वाल्मीकि को आदि  कवि माना जाता है और इसलिए यह महाकाव्य आदिकाव्य माना गया है। यह महाकाव्य भारतीय संस्कृत के महत्वपूर्ण आयामों को दर्शाता है और भारतीय मूल्य को परिलक्षित करने कारण ही यह साहित्य रूप में अक्षयनिधि है। इस महाकाव्य के 7 काण्ड है जो निम्नलिखित है।

 

 

 

1. बालकाण्ड Balkand

 

 

 

रामायण का आरंभ इसी काण्ड से ही होता है। इसमें श्री राम और उनके तीनों भाइयों के जन्म के साथ-साथ श्री राम के अनुपम और अद्भुत लीला का वर्णन है। इसके साथ हीविश्वामित्र ऋषि के आश्रम की रक्षा करते हुए तड़का इत्यादि का वध करने के उपरांत उनकी शिक्षा तथा सीता के साथ पाणिग्रहण तक की आकर्षक और सुंदर ढंग से वर्णित किया गया है।

 

 

2. अयोध्याकाण्ड 

 

 

 

इस काण्ड में कैकेई की दासी मंथरा द्वारा उकसाने पर कैकेई के द्वारा महाराज दशरथ से दो वरदान मांगना। 1. भरत के लिए राजगद्दी और दूसरा  राम के लिए 14 वर्ष का वनवास।

 

 

 

भरत के द्वारा राम को अयोध्या वापस लाने का प्रयास करना फिर विफल होने पर राम की पादुका लेकर वापस अयोध्या आकर पादुका सिंहासन पर आरूढ़ करके स्वयं नंदीग्राम में निवास करने की कथा का यथार्थ वर्णन किया गया है।

 

 

 

3. अरण्य काण्ड 

 

 

 

इस काण्ड में कैकेई वचन के द्वारा राम सीता लक्ष्मण का वन गमन और दंडक वन के पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा द्वारा राम और लक्ष्मण से प्रणय निवेदन करना फिर लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा को नाक विहीन करना तदुपरांत रावण द्वारा सीता के हरण की कहानी वर्णित है।

 

 

4. किष्किंधा काण्ड 

 

 

 

इस काण्ड में राम और लक्ष्मण, सीता की खोज में किष्किंधा नगरी पहुँच जाते है। वहां उनकी मुलाकातहनुमान से होती है। हनुमान के द्वारा सुग्रीव और राम की मित्रता करायी जाती है। तत्पश्चात सुग्रीव के भाई बालि का वध, सुग्रीव की सेना का सीता की खोज के लिए प्रस्थान करना वर्णित है।

 

 

5. सुन्दर काण्ड

 

 

 

इस काण्ड में हनुमान सीता की खोज में लंका पहुँचते है। विभीषण द्वारा सीता के पास पहुंचकर अपना परिचय रामदूत के रूप में देना उसके उपरांत लंका दहन करने के पश्चात राम के पास लौटने के दृश्य का वर्णन है।

 

 

6. युद्ध काण्ड या लंका काण्ड 

 

 

 

जैसा कि यह काण्ड अपने नाम के अनुरूप ही है। इस काण्ड में सभी असुरों के साथ ही रावण, मेघनादकुंभकर्ण का वध करने के उपरांत सीता को रावण की कैद से आजाद कराकर लाना फिर सभी वानरी सेना के साथ अयोध्या वापस लौटना अयोध्या में दीपावली जैसा उत्सव का प्रादुर्भाव होना है।

 

 

 

7. उत्तर काण्ड 

 

 

 

इस काण्ड में राम सीता लक्ष्मण के साथ-साथ सभी वानरी सेना अयोध्या आई। राम का सभी से एक साथ भेंट करना। भरत के साथ गुरु वशिष्ठ से भेंट तीनों माताओं का आशीर्वाद लेना तदुपरांत राम का राज्याभिषेक का सजीव वर्णन किया गया है।

 

 

 

वाल्मीकि रामायण के रहस्य 

 

 

 

रामायण में 1000 श्लोक आने के बाद के प्रथम अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है। पाठक गणो गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षर है और वाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक है। रामायण के प्रत्येक 1000 श्लोक के बाद आने वाले प्रथम अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है।

 

 

 

1. भगवान राम की बहन ‘शांता’ – आप में से बहुत कम ही लोगो को पता होगा कि भगवान श्री राम की एक बहन भी थी। वह चारो भाइयो “राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न” से बड़ी थी।

 

 

 

 

कहा जाता है कि एक बार अंगदेश के राजा रोमपद और रानी वर्षिणी भेट करने के लिए अयोध्या आए और बात ही बात में दुखी होकर राजा रोमपद ने कहा, “हमारी कोई संतान नहीं है।”

 

 

 

 

वे बहुत ही दुखी थे। तब राजा दशरथ ने कहा, “मैं अपनी बेटी शांता को आपको संतान के रूप में दूंगा।”

 

 

 

 

यह सुनकर राजा रोमपद और रानी वर्षिणी बहुत खुश हुए और एक संतान के रूप में शांता का लालन-पालन किया। एक दिन की बात है राजा रोमपद अपनी पुत्री से बात कर रहे थे और तभी एक साधु आए और भिक्षा मांगी।

 

 

 

 

लेकिन राजा रोमपद उनकी बात को सुन नहीं पाए और उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। इससे साधु बहुत क्रोधित हुए और राज्य छोड़कर चले गए।

 

 

 

 

साधु भगवान इंद्र के परम भक्त थे। इस घटना से इंद्र देव बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने राज्य में वर्षा रोक दी। इससे चिंतित राजा ऋष्यश्रृंग ऋषि के पास गए और उनसे इसका उपाय पूछा तो ऋषि ने कहा कि भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ करना होगा।

 

 

 

 

 

उसके बाद यज्ञ हुआ और राज्य में खूब वर्षा हुई। इसके बाद ऋष्यश्रृंग ऋषि का शांता से विवाह हो गया। बाद में ऋष्यश्रृंग ऋषि ने ही राजा दशरथ के लिए पुत्र कामेष्टि का यज्ञ करवाया। आज भी यह स्थान अयोध्या में 39 कि. मी. दूर स्थित है।

 

 

 

रामायण में श्री राम सहित चारो भाई किसके अवतार थे?

 

 

 

भगवान श्री राम के बारे में लोगो को जानकारी है कि वे भगवान विष्णु के अवतार थे और लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार थे। परन्तु भरत और शत्रुघ्न किसके अवतार थे।

 

 

 

 

यह बहुत कम लोगो को पता है तो आपको हम बता रहे है कि भरत और शत्रुघ्न क्रमशः सुदर्शन चक्र और शैल नामक शंख के अवतार थे। सुदर्शन चक्र और शैल शंख को भगवान विष्णु ही धारण करते है।

 

 

 

 

सीता जी के स्वयंवर में भगवान श्री राम ने किस धनुष को तोड़ा था ?

 

 

 

 

आप लोग जानते ही है कि भगवान श्री राम और सीता जी का विवाह स्वयंवर के माध्यम से हुआ था और धनुष तोड़ने की शर्त थी। जिसे भगवान श्री राम ने तोड़ दिया था। आज हम आपको बता रहे है कि वह धनुष भगवान शिव का धनुष “पिनाक” था। यहां आपको यह बात भी जाननी बहुत जरुरी है कि लक्ष्मण रेखा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में नहीं है।

 

 

 

 

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