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Vairagya Shatak Pdf / वैराग्य शतक Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Vairagya Shatak Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Vairagya Shatak Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Dasbodh Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Vairagya Shatak Pdf

 

पुस्तक का नाम  Vairagya Shatak Pdf
पुस्तक के लेखक  भर्तृहरि 
भाषा  हिंदी 
साइज  8 Mb 
पृष्ठ  503 
फॉर्मेट  Pdf 
श्रेणी  पौराणिक

 

 

वैराग्य शतक Pdf Download

 

 

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Vairagya Shatak Pdf
Vairagya Shatak Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

पति की आज्ञा लिए बिना बिना उपवास व्रत आदि न करे अन्यथा उसे उसका कोई फल नहीं मिलता और वह परलोक में नरकगामिनी होती है। पति सुख पूर्वक बैठा हो तो उस अवस्था में कोई आंतरिक कार्य आ पड़े तो भी पतिव्रता स्त्री अपने पति को कदापि न उठाये।

 

 

 

पति नपुंसक हो गया हो, दुर्गति में पड़ा हो, रोगी हो, बूढ़ा हो, सुखी हो अथवा दुखी हो किसी भी दशा में नारी अपने उस एकमात्र पति का उल्लंघन न करे। रजस्वला होने पर वह तीन रात्रि तक पति को अपना मुंह न दिखाए अर्थात उससे अलग रहे।

 

 

 

जब तक स्नान करके शुद्ध न हो जाय तब तक अपनी कोई बात भी वह पति के कानो में न पड़ने दे। अच्छी तरह स्नान करने के पश्चात सबसे पहले वह अपने पति के मुख का दर्शन करे दूसरे किसी का मुख कदापि न देखे अथवा मन ही मन पति का चिंतन करके सूर्य का दर्शन करे।

 

 

 

पति की आयु बढ़ने की अभिलाषा रखने वाली पतिव्रता नारी हल्दी, रोली, सिंदूर, काजल आदि चोली, पान, मांगलिक आभूषण आदि केशों का संवारना, चोटी गूथना तथा हाथ कान के आभूषण इन सबको अपने शरीर से दूर न करे।

 

 

 

पति से द्वेष रखने वाली स्त्री का वह कभी आदर न करे। कही अकेली न खड़ी हो। सती स्त्री ओखली, मूसल, झाड़ू, सिल, जांत और द्वार के चौखट के नीचे वाली लकड़ी पर कभी न बैठे। जिस-जिस वस्तु में पति की रुचि हो उससे वह स्वयं भी प्रेम करे।

 

 

 

पतिव्रता देवी हमेशा पति का हित चाहने वाली होती है। वह पति के हर्ष में हर्ष माने। पति के मुख पर विषाद की छाया देख स्वयं भी विषाद में डूब जाय तथा वह प्रियतम पति के प्रति ऐसा बर्ताव करे जिससे वह उन्हें प्यारी लगे। पुण्यात्मा पतिव्रता स्त्री सम्पत्ति और विपत्ति में भी पति के लिए एक सी रहे।

 

 

 

अपने मन में कभी विकार न आने दे और सदा धैर्य धारण किए रहे। घी, नमक, तेल आदि के समाप्त हो जाने पर भी पतिव्रता स्त्री पति से सहसा यह न कहे कि अमुक वस्तु नहीं है। वह पति को कष्ट में न डाले। देवेश्वरी! पतिव्रता नारी के लिए एकमात्र पति ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव से भी अधिक माना गया है।

 

 

 

उसके लिए अपना पति शिवरूप ही है। जो पति की आज्ञा का उल्लंघन करके व्रत और उपवास आदि के नियम का पालन करती है वह पति की उम्र को हर लेती है और मृत्यु के बाद नरक में जाती है। जो स्त्री पति के कुछ कहने पर क्रोधपूर्वक कठोर उत्तर देती है वह निर्जन वन में सियारिन होती है।

 

 

 

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