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Tulsi Comics Pdf Free Download / तुलसी कॉमिक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Tulsi Comics Pdf Free Download देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Tulsi Comics Pdf Free Download कर सकते हैं और आप यहां से हवलदार बहादुर कॉमिक्स Pdf Download कर सकते हैं।

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Tulsi Comics Pdf Free Download

 

 

 

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Tulsi Comics Pdf
यह कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

जब मैं कामासक्त होऊं तब उसे भी कामिनी के रूप में ही मेरे पास रहना होगा। वेदवेत्ता विद्वान जिन्हे अविनाशी बतलाते है उन ज्योतिःस्वरूप सनातन शिव का मैं हमेशा चिंतन करता हूँ और करता रहूंगा। ब्रह्मन! उस सदाशिव के चिंतन में जब मैं लगा होऊं तभी उस भामिनि के साथ समागम कर सकता हूँ।

 

 

 

 

जो मेरे शिव चिंतन में विघ्न डालने वाली होगी वह जीवित नहीं रह सकती उसे अपने जीवन से हाथ धोना पड़ेगा। तुम, विष्णु और मैं तीनो ही ब्रह्मस्वरूप शिव के अंश भूत है। अतः महाभागगण! हमारे लिए उनका लगातार चिंतन करना ही उचित है। कमलासन! उनके चिंतन के लिए मैं बिना विवाह के भी रह लूंगा।

 

 

 

 

अतः तुम मुझे ऐसी पत्नी प्रदान करो जो हमेशा मेरे कर्म के अनुकूल चल सके। ब्रह्मन! उसमे भी मेरी एक और शर्त है उसे तुम सुनो, यदि उस स्त्री का मुझपर और मेरे वचन पर अविश्वास होगा तो मैं उसे त्याग दूंगा। उनकी यह बात सुनकर मैंने और श्रीहरि ने मंद मुस्कान के साथ मन ही मन प्रसन्नता का अनुभव किया।

 

 

 

 

फिर मैं विनम्र होकर बोला – नाथ! महेश्वर! प्रभो! आपने जैसी नारी की खोज आरंभ की है वैसी ही स्त्री के विषय में मैं आपको प्रसन्नता पूर्वक कह रहा हूँ। साक्षात् सदाशिव की धर्मपत्नी जो उमा है वे ही जगत का कार्य सिद्ध करने के लिए भिन्न-भिन्न रूप में प्रकट हुई है।

 

 

 

 

प्रभो! सरस्वती और लक्ष्मी ये दो रूप धारण करके वे पहले ही यहां आ चुकी है। इनमे लक्ष्मी तो श्री विष्णु की प्राण वल्लभा हो गयी और सरस्वती मेरी। अब हमारे लिए वे तीसरा रूप धारण करके प्रकट हुई है। प्रभो! लोकहित का कार्य करने की इच्छा वाली देवी शिवा दक्ष पुत्री रूप में अवतीर्ण हुई है। उनका नाम सती है।

 

 

 

 

सती ही ऐसी भार्या हो सकती है जो हमेशा आपके लिए हितकारिणी हो। देवेश! महातेजस्विनी सती आपके लिए आपको पतिरूप में प्राप्त करने के लिए दृढ़ता पूर्वक कठोर व्रत का पालन करती हुई तपस्या कर रही है। महेश्वर! आप उन्हें वर देने के लिए जाइये।

 

 

 

 

कृपा कीजिए और बड़ी प्रसन्नता के साथ उनकी तपस्या के अनुरूप वर देकर उनके साथ विवाह कीजिए। शंकर! भगवान विष्णु की मेरी तथा इन सम्पूर्ण देवताओ की यही इच्छा है। आप अपनी शुभ दृष्टि से हमारी इस इच्छा को पूर्ण कीजिए जिससे हम आदर पूर्वक इस उत्सव को देख सके।

 

 

 

 

ऐसा होने से तीनो लोको में सुख देने वाला परम मंगल होगा और सबकी सारी चिंता मिट जाएगी इसमें संशय नहीं है। तदनन्तर मेरी बात समाप्त होने पर लीला विग्रह धारण करने वाले भक्त वत्सल महेश्वर से मधुसूदन अच्युत ने इसी का समर्थन किया।

 

 

 

 

तब भक्त वत्सल भगवान शंकर ने हंसकर कहा – बहुत अच्छा ऐसा ही होगा। उनके ऐसा कहने पर हम दोनों उनसे आज्ञा ले अपनी पत्नी तथा देवताओ और मुनियो के साथ अत्यंत खुश हो अपने अभीष्ट स्थान को चले गए।

 

 

 

 

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