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Tiger ke hindi Novel Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Tiger ke hindi Novel Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Tiger ke hindi Novel Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से 5 + Gulshan Nanda novels in Hindi Pdf Download कर सकते हैं।

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

हां दीदी यही हमारे जीवन का सहारा है दीपक बोला। निशा भारती बोली क्या तुम अकेले हो? दीपक बोला मैं पहले अकेला था लेकिन अब मैं अकेला नहीं हूँ हम पांच लोग है। वह सब भी परिस्थिति के सताये हुए है और आपसे प्रेरणा लेकर मैंने उन्हें अपने साथ रखा और आजीविका के साधन भी मुहैया कराये है।

 

 

 

 

हमारे साथ और भी लोग जुड़ने वाले है। हम लोगो ने डा. भारती सहयोग संस्था बना रखी है और गरीब लोगो को स्वरोजगार के लिए सहायता करते है। दीपक कहते जा रहा था लेकिन डा. निशा भारती मानो कोई स्वप्न देख रही थी तभी रोशन उनके पास आकर बोला मम्मी घर नहीं चलना है क्या?

 

 

 

 

डा. भारती रोशन की आवाज सुनकर चौंक उठी उनके सामने दीपक पंद्रह हजार रुपये लेकर खड़ा था। डा. निशा भारती ने दीपक से कहा भैया हमारी तरफ से यह रुपया आप ही रख लो किसी की सहायता कर देना और हमारे साथ ही घर चलो।

 

 

 

 

दीपक बोला नहीं दीदी हमारे साथ रहने वाले परेशान हो जायेंगे क्योंकि मैं उन्हें बता कर नहीं आया हूँ। डा. निशा भारती ने ऑटो रिक्शा रोकते हुए कहा दीपक अब तुम नशा तो नहीं करते हो ना। दीपक बोला दीदी मैं ही नहीं हमारे साथ रहने वाला कोई भी किसी प्रकार का नशा नहीं करता है।

 

 

 

 

तभी ऑटो रिक्शा चल पड़ा। निशा भारती को आज अपना जीवन सफल लग रहा था क्योंकि उनकी प्रेरणा से दीपक खुद तो स्वरोजगार शुरू किया और दूसरो की भी सहायता करने लगा था। दीपक अपना खाली ठेला लेकर अपने साथियो के पास पहुँच गया था।

 

 

 

 

उसके सभी साथी पंकज स्वीट के पास उसका इंतजार कर रहे थे और वहां से थोड़ी दूर पर ही किराये के मकान में रहते थे। दीपक अपने साथियो से बोला भाइयो हम लोगो की संख्या बढ़ रही है इस छोटे से घर में रहना मुश्किल हो रहा है।

 

 

 

 

आप लोग कही जमीन देखकर बताओ वहां हम लोग अपनी फैक्ट्री लगाएंगे जहाँ पर पेठा बनाने का कार्य होगा और हम लोग वही पर रहने की व्यवस्था भी करेंगे। तभी उसमे से एक राधे नाम का आदमी बोला यह तो बहुत ही बढ़िया है। अब मैं कल से धंधा करते हुए जमीन की तलाश शुरू कर दूंगा। इसके बाद सब लोग भोजन करके विश्राम करने लगे।

 

 

 

बंगलोर में प्रताप भारती का व्यवसाय ठीक चल रहा था लेकिन जब से उन्होंने सरोज सेवा केंद्र की स्थापना किया था तब से उनके व्यापार में बहुत ही उछाल आ गया था। प्रताप भारती को कई प्रकार के कपड़े तैयार करने वाली कम्पनी के कपड़े धुलाई और प्रेस करने के बहुत सारे ऑर्डर मिले थे।

 

 

 

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