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Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf / ठाकुर प्रसाद कैलेंडर 2022 Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

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Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf / ठाकुर प्रसाद कैलेंडर 2022 पीडीऍफ़ 

 

 

 

ठाकुर प्रसाद कैलेंडर 2022 पीडीएफ डाउनलोड 

 

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Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf
Thakur Prasad Calendar 2022 Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

जब श्री राम धनु के समीप आये तब सब स्त्री-पुरुषो ने देवताओ और पुण्यो को मनाया। सबका संदेह और अज्ञानम, नीच राजाओ का अभिमान।

 

 

 

3- परशुराम जी के गर्व की गुरुता देवता और श्रेष्ठ मुनियो की कातरता, सीता जी का सोच, जनक का पश्चाताप और रानियों के दारुण दुःख का दावानल।

 

 

 

 

4- यह सब शिव जी के धनुष रूपी जहाज को पाकर और समाज बनाकर उसपर जा चढ़े, यह श्री राम जी के भुजाओ के बल रूपी अपार समुद्र के पार जाना चाहते है परन्तु कोई केवट नहीं है।

 

 

 

1- हे दिग्गजों! हे कच्छप! हे शेष! हे बाराह! धीरज से इस पृथ्वी को थामे रहो, जिससे यह हिलने न पाए क्योंकि श्री राम जी शिव जी के धनुष को तोडना चाहते है, मेरी आज्ञा सुनकर सब सावधान हो जाओ।

 

 

 

 

260- दोहा का अर्थ-

 

 

 

श्री राम जी ने सब लोगो की ओर देखा और उन्हें चित्र में लिखे हुए से देखकर फिर कृपाधाम श्री राम जी ने सीता की ओर देखकर उन्हें विशेष व्याकुल जाना।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- उन्होंने जानकी जी को बहुत ही विकल देखा। उनका एक-एक पल कल्प के समान बीत रहा था। यदि प्यासा हुआ कोई भी आदमी पानी के बिना मर जाय तो उसके शरीर छोड़ने के बाद अमृत का तालाब भी क्या करेगा।

 

 

 

2- अगर सारी खेती सूख जाय तो पश्चात् में वर्षा किस काम की है? समय के बीत जाने पर फिर पछताने से क्या लाभ? अपने मन में ऐसा समझकर श्री राम जी ने सीता जी की ओर देखा और उनका विषेष प्रेम लखकर बहुत पुलकित हो गए।

 

 

 

3- उन्होंने मन ही मन गुरु को प्रणाम किया और बड़ी फुर्ती से धनु को उठा लिया, जब उसे हाथ में लिया तो वह धनु बिजली की तरह से चमक उठा फिर आकाश में मंडलाकार घेरा की भांति हो गया।

 

 

 

4- हाथ में लेते चढ़ाते और जोर से खींचते हुए कोई भी नहीं लख पाया सबने श्री राम जी को धनु खींचे हुए खड़ा देखा उसी क्षण श्री राम जी ने धनु को बीच से तोड़ डाला धनु के टूटने से भयंकर शब्द नाद हुआ और उस आवाज से सब लोक भर गए।

 

 

 

 

घोर कठोर शब्द से सब लोक भर गए, सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़कर चलने लगे, दिग्गज चिंघाड़ने लगे, धरती डोलने लगी। शेष वाराह और कच्छप कमल लाने लगे, देवता, राक्षस और मुनि अपने-अपने कानो पर हाथ रखकर सब व्याकुल होकर विचारने लगे। तुलसीदास कहते है कि सबको निश्चय हो गया कि श्री राम जी ने धनु तोड़ डाला तब सभी श्री राम जी की जय बोलने लगे।

 

 

 

261- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

शिव जी का धनु जहाज है और श्री राम जी की भुजाओ का बल समुद्र, धनु के टूटने से जो मोहवश इस जहाज पर चढ़ा था वह सारा समाज डूब गया।

 

 

 

 

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