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Tantra Mantra Books in Hindi Pdf / तंत्र मंत्र बुक्स Pdf Free

मित्रों इस पोस्ट में Tantra Mantra Books in Hindi Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से तंत्र मंत्र बुक्स Pdf Free Download कर सकते हैं।

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Tantra Mantra Books in Hindi Pdf तंत्र मंत्र बुक्स Pdf

 

 

 

 

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Tantra Mantra Books in Hindi Pdf
धूमावती और बगलामुखी तांत्रिक साधना 
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श्री षोडशी तन्त्र साधना
श्री षोडशी तंत्र साधना 
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कुण्डिलीनी शक्ति कैसे जागृत करें। 

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तंत्र मन्त्र के बारे में 

 

 

 

ब्रह्माण्ड के पहले तंत्राधिपति ‘महाकाल भगवान शिव’ है। भारत वर्ष में उनके उपासक हर जगह मिल जाते है। लेकिन केवल चार स्थानों पर ही विशेष साधनारत होते है। भारत की पावन धरती पर कुछ ऐसे मंदिर व तीर्थ स्थल विख्यात है जहां साधको की साधनाए अवश्य पूर्ण होती है। इन सिद्ध मंदिरो, तीर्थ स्थलों पर अपने इष्ट मंत्रो के जाप से ही सिद्धिया प्राप्त हो जाती है।

 

 

 

1- तारापीठ कोलकाता – सिद्धपीठ ‘तारापीठ धाम’ कोलकाता के वीर भूमि जिले में स्थापित है। यहां का ‘महाश्मसान’ इसे बहुत ही महत्वपूर्ण बना देता है। ‘तारापीठ’ के कारण ही वीरभूमि जिला विख्यात है। ऐसी मान्यता है कि तंत्र साधक जब तक ‘श्मसान’ में हवन नहीं करते है उनकी साधना अपूर्ण रहती है। कोलकाता का ‘कालीघाट’ तांत्रिको का मुख्य स्थल है वहां की गई साधना सदैव ही पूर्ण होती है।

 

 

 

2- कामाख्या पीठ असम – भारत वर्ष का सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ भारत के एक राज्य ‘असम’ के गुवाहाटी में स्थित है। कालिका पुराण व देवी पुराण में ‘कामाख्या शक्तिपीठ’ का उल्लेख है और इसे सर्वोच्च ‘शक्तिपीठ’ की मान्यता प्राप्त है।

 

 

3- रजप्पा शक्तिपीठ – 52 शक्तिपीठो में ‘रजप्पा शक्तिपीठ’ का भी उल्लेख मिलता है। यहां देवी की 10 महाविद्याओ में एक ‘छिन्न मस्ता ‘ देवी वर्णन मिलता है। यहां साधना करने से साधक की सैकड़ो कामनाए पूर्ण होती है।

 

 

 

4- चक्रतीर्थ स्थान – यह स्थान मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। यह स्थान गढ़ कालिका देवी का स्थान माना जाता है। यहां साधना करने वालो को साधना का फल अतिशीघ्र ही मिल जाता है। श्रावण मास में यहां साधना का बहुत ही महत्व है।

 

 

 

प्राचीन काल में भी आसमान में उड़ने वाले गुब्बारे, पैराशूट, बिजली जैसे उपकरण विद्यमान थे। उस काल में अंतरिक्ष में उड़ने वाले यान, बिजली और वायुयान का विकास हुआ था। इसका उल्लेख वैदिक काल के ग्रंथो में वर्णित है।

 

 

 

वैज्ञानिक ऋषियों के क्रम में अगस्त्य ऋषि का उल्लेख मिलता है। बल्व के अविष्कारक माइकल थामस ने लिखा है – मैं एक बार रात में संस्कृत का एक वाक्य पढ़ते-पढ़ते सो गया और स्वप्न में मुझे संस्कृत के उस वचन का अर्थ समझ में आ गया। जिसकी सहायता से मैं बल्व बना सका।

 

 

 

महर्षि अगस्त्य ने सर्वप्रथम ऋग्वेद के प्रथम मंडल में 165 सूक्त से 191 तक के सूक्तो को बताया था। महर्षि अगस्त्य कौशल नरेश महाराज दशरथ के राजगुरु भी थे। महर्षि अगस्त्य को मंत्र दृष्टा भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने तपस्या काल में ही मंत्रो की शक्ति को पहचान लिया था।

 

 

जप एवं सिद्धि

 

 

प्रायः ऐसे लोग दृष्टि गोचर होते है जो जप करते है लेकिन उन्हें सिद्धि नहीं प्राप्त होने का खेद अवश्य ही रहता है। लेकिन सिद्धि इतनी आसानी से प्राप्त होने वाली वस्तु नहीं है न ही इसे कही से ख़रीदा ही जा सकता है। इसे तो स्वच्छ मन से और कठोर साधना से ही प्राप्त करने की इच्छा की जा सकती है। इसे तो मन की शुद्धता, वाणी की शुद्धता और कर्म की शुद्धता से ही प्राप्त किया जा सकता है।

 

 

 

जैसे मनुष्य अपने शरीर की सफाई के लिए अपने शरीर को पानी और साबुन की सहायता लेता है। वैसे ही साधक को मंत्र की सिद्धि के पहले अपने शरीर के अंदर मन की सफाई करना चाहिए। मन के साथ ही बाहरी प्रवृत्तियो की सफाई भी अनिवार्य होती है। इस सफाई के बिना आध्यात्मिक उन्नतियों का कोई औचित्य नहीं होता है।

 

 

 

जब तक मैं और मेरा, तू और तेरा का परिष्कार कर देना और सब कुछ तेरा (ईश्वर) है भाव होने पर ही सिद्धि स्वतः ही प्राप्त हो जाएगी क्योंकि जब तक मनुष्य ‘तेरा और मेरा’ में उलझा हुआ रहेगा तो (उसका) ईश्वर का कैसे हो पाएगा और जब उसका नहीं हो पाएगा तो सिद्धि कहां से आएगी क्योंकि वह भी तो ‘उसके’ द्वारा ही प्रदत्त होती है। अतः साधक को पहले अपने मन को धोने का प्रयास करना चाहिए जैसे कबीर दास ने कहा है —-

‘कबीरा मन निर्मल भया जैसे गंगा नीर। पीछे, पीछे हरि फिरत कहत कबीर कबीर।।’ 

 

 

Note- हम कॉपीराइट का पूरा सम्मान करते हैं। इस वेबसाइट Pdf Books Hindi द्वारा दी जा रही बुक्स, नोवेल्स इंटरनेट से ली गयी है। अतः आपसे निवेदन है कि अगर किसी भी बुक्स, नावेल के अधिकार क्षेत्र से या अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो आप हमें abhishekpandit8767@gmail.com पर सूचित करें। हम निश्चित ही उस बुक को हटा लेंगे। 

 

 

 

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Note- मित्रों उपरोक्त किसी भी तंत्र साधना को किसी गुरु के सानिध्य में ही करें। इससे होने वाले किसी भी शुभ या अशुभ फल का जिम्मेदार Pdf Books Hindi Team या लेखक नहीं होंगे।

 

 

 

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