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Swami Samarth Tarak Mantra Pdf / स्वामी समर्थ तारक मंत्र Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Swami Samarth Tarak Mantra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Swami Samarth Tarak Mantra Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Navodaya Book Pdf Download पढ़ सकते हैं।

 

 

 

Swami Samarth Tarak Mantra Pdf Download

 

 

 

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Swami Samarth Tarak Mantra Pdf
Swami Samarth Tarak Mantra Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Swami Samarth Tarak Mantra Pdf
शाबरी विद्या मराठी पुस्तक Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

मन को सुस्थिर करके पूजागृह में प्रवेश करे। वहां पूजन सामग्री लेकर सुंदर आसन पर बैठे। पहले न्यास आदि करके क्रमशः महादेव जी की पूजा करे। शिव की पूजा से पहले गणेश जी की, द्वारपालों की और दिक्पालों की भली भांति पूजा करके पीछे देवता के लिए पीठ स्थान की कल्पना करे।

 

 

 

 

अथवा अष्टदलकमल बनाकर पूजा द्रव्य के नजदीक बैठे और उस कमल पर ही भगवान शंकर को समासीन करे। तत्पश्चात तीन आचमन करके पुनः दोनों हाथ जोड़कर तीन प्राणायाम करके मध्यम प्राणायाम अर्थात कुंभक करते समय त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का इस प्रकार ध्यान करे।

 

 

 

 

उनके पांच मुख है, दस भुजाये है, शुद्ध स्फटिक के समान उज्ज्वल कांति है, सब प्रकार के आभूषण उनके श्रीअंगो को विभूषित करते है तथा व्याघ्रचर्म की चादर ओढ़े हुए है। इस तरह ध्यान करके यह भावना करे कि मुझे भी इनके समान ही रूप प्राप्त हो जाय।

 

 

 

 

ऐसी भावना करके मनुष्य हमेशा के लिए अपने पाप को डाले। इस प्रकार भावना द्वारा शिव का ही शरीर धारण करके उन परमेश्वर की पूजा करे। शरीर शुद्धि करके मूल मंत्र का क्रमशः न्यास करे अथवा सर्वत्र प्रणव से ही षडंग न्यास करे। ओम अद्येत्यादी रूप से संकल्प वाक्य का प्रयोग करके फिर पूजा आरंभ करे।

 

 

 

 

अर्घ्य और आचमन के लिए पात्रो को तैयार करके रखे। बुद्धिमान पुरुष विधि पूर्वक भिन्न-भिन्न प्रकार के नौ कलश स्थापित करे। उन्हें कुशाओं से ढककर रखे और कुशाओं से ही जल लेकर उन सबका प्रोक्षण करे। तत्पश्चात उन-उन सभी पात्रो में शीतल जल डाले।

 

 

 

 

फिर बुद्धिमान पुरुष देख-भालकर प्रणव मंत्र के द्वारा उनमे नामांकित द्रव्यों को डाले। खस और चंदन को पाद्यपात्र में रखे। चमेली के फूल, शीतलचीनी, कपूर, जड़, तमाल और बड़की इन सबको यथोचित रूप से कूट-पीसकर चूर्ण बना ले और आचमनीय के पात्र में डाले।

 

 

 

 

इलायची और चंदन को तो सभी पात्रो में डालना चाहिए। देवाधिदेव महादेव जी के पार्श्व भाग में नंदीश्वर का पूजन करे। धूप, गंध और भांति-भांति के दीपों द्वारा शिव की पूजा करे। फिर लिंग शुद्धि करके मनुष्य प्रसन्नता पूर्वक मंत्र समूहों के आदि में प्रणव तथा अंत में नमः पद जोड़कर उनके द्वारा इष्टदेव के लिए यथोचित आसन की कल्पना करे।

 

 

 

 

फिर प्रणव से पद्यासन की कल्पना करके यह भावना करे कि इस कमल का पूर्व दल साक्षात् अणिमा नामक ऐश्वर्य तथा अविनाशी है। दक्षिण दल लघिमा है। पश्चिम दल महिमा है। उत्तर दल प्राप्ति है। अग्निकोण का दल प्राकाम्य है, नैऋत्य कोण का दल ईशित्व है।

 

 

 

 

वायव्यकोण का दल वशित्व है। ईशान कोण का दल सर्वज्ञत्व है और उस कमल की कर्णिका को सोम कहा जाता है। सोम के नीचे सूर्य है, सूर्य के नीचे अग्नि है और अग्नि के भी नीचे धर्म आदि के स्थान है। क्रमशः ऐसी कल्पना करने के पश्चात चारो दिशाओ में अव्यक्त, महतत्व, अहंकार और उनके विकारो की कल्पना करे।

 

 

 

 

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