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Super Commando Dhruv Comics Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Super Commando Dhruv Comics Pdf Download देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Super Commando Dhruv Comics Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Shagun Sharma Novel in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

 

 

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आदमखोरों का स्वर्ग Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Doga Comics Pdf
ये है डोगा कॉमिक्स Pdf Download
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मैं हूँ डोगा कॉमिक्स Pdf Download
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26/11 नागराज और डोगा कॉमिक्स Pdf Download
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डुगडुगी डोगा कॉमिक्स Pdf Download
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थांबा डोगा कॉमिक्स Pdf Free Download
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समुद्र का शैतान Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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रूहो का शिकंजा Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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महाकाल Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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ऑपरेशन सर्जरी Nagraj Comics Pdf Download
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मम्बर राज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज का बदला Pdf Download
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

पाप रूपी उल्लू छिप गए और काम-क्रोध रूपी कुमुद का खिलना बंद हो गया। अनेक प्रकार के बंधन कारक कर्म, गुण, काल और स्वभाव यह सब चकोर है जो राम प्रताप रूपी सूर्य के प्रकाश में कभी सुखी नहीं रहते है। मत्सर, डाह, मान, मोह और मद रूपी जो चोर है उनकी कला भी नहीं चल रही है।

 

 

 

 

प्रिया को अनुभव हो रहा था कि वह मन में उससे ईर्ष्या रखते हुए भी वह कितनी वाणी मधुर और अनुग्रह की प्रतिमूर्ति बनती जा रही है। राजेश ने उदार मन से कहा – बेशक भाभी साहब! मेरी ही गलती थी मैं इसे स्वीकार कर रहा हूँ। मैंने इस दृष्टि से कभी विचार ही नहीं किया था।

 

 

 

 

मगर आज तो मेरे घर पर रहिए। प्रिया राजेश से बोली – आज बिलकुल अवकाश नहीं है बच्चे घबरा रहे होंगे। तभी प्रिया की छोटी बहन पिंकी बोल उठी – मैं कितना कहके हार गयी मानती ही नहीं। राजेश अपनी कार लेकर आया था। दोनों बहन कार की पिछली सीट पर बैठ गयी।

 

 

 

 

राजेश कार चला रहा था। थोड़ी देर में ही उसका मकान आ गया। प्रिया ने बहन से उतरने के लिए आग्रह किया पर वह न मानी और बोली – लड़के घबरा रहे होंगे। आखिर पिंकी अपनी बहन प्रिया से गले मिलकर अंदर चली गयी। राजेश ने कार आगे बढ़ा दिया।

 

 

 

 

प्रिया ने उचटती हुई निगाह से पिंकी का मकान देखा एक कठोर सत्य उसे विचलित कर गया। कुछ दूर जाने के बाद राजेश बोला – भाभी मुझे तो एक अच्छा सा रास्ता मिल गया है अगर मुझे दो चार साल इसी प्रकार काम करने के लिए अवसर मिल गया तो हमारी जिंदगी सुधर जाएगी।

 

 

 

 

प्रिया ने सहानुभूति के साथ राजेश से कहा – पिंकी ने मुझे बताया था। भगवान तुम्हे हरे जगह हर हाल में खुश रखे मगर हाथ पैर जरा बचाकर रहना। राजेश अपनी बड़ी साली प्रिया से बोला – दौलत का मतलब है जब ईमानदारी से कमाई गयी हो अगर बेईमानी के पैसे मिले तो उनका कोई महत्व नहीं है।

 

 

 

 

मैं अपने मालिक की आंख बचाकर एक भी पैसा लेना पाप समझता हूँ भाभी! मैं बेईमानी के पैसे व्याज समझता हूँ और आंख किसकी बचाऊं। अब मालिक तो रहा नहीं उसकी विधवा है। उसने सब कुछ हमारे ऊपर ही छोड़ दिया है मैं चाहे सफेद को काला करू या काला को सफेद।

 

 

 

 

 

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