Sunderkand in Hindi Pdf Free / सुंदर कांड इन हिंदी Pdf

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Sunderkand in Hindi Pdf / सुंदर कांड इन हिंदी Pdf 

 

 

 

 

 

 

श्री कृष्ण कहते है – जब तुम्हारा मन वेदो की अलंकारमयी भाषा से विचलित न हो और वह आत्म साक्षात्कार की समाधि में स्थिर हो जाय तब तुम्हे दिव्य चेतना प्राप्त हो जाएगी।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – कृष्ण भावनाभावित व्यक्ति या भगवान के एकनिष्ठ भक्त को न तो वेदो की अलंकारमयी वाणी से विचलित होना चाहिए न ही स्वर्ग जाने के उद्देश्य से सकाम कर्मो में प्रवृत्त होना चाहिए। कृष्ण भावनामृत में मनुष्य सदा ही कृष्ण की सानिध्य में रहता है और कृष्ण से प्राप्त सारे आदेश उस दिव्य अवस्था में समझे जा सकते है। ऐसे कार्यो के परिणाम स्वरुप निश्चयात्मक ज्ञान की प्राप्ति निश्चित है उसे कृष्ण या उनके प्रतिनिधि गुरु की आज्ञाओ का पालन मात्र करना होगा।

 

 

 

 

‘कोई समाधि में है’ इस कथन का अर्थ यह होता है कि वह पूर्णतया कृष्ण भावनाभावित है। अर्थात उसने पूर्ण समाधि में ब्रह्म, परमात्मा तथा भगवान को प्राप्त कर लिया है। आत्म साक्षात्कार की सर्वोच्च सिद्धि यह जान लेना है कि मनुष्य कृष्ण का शाश्वत दास है और उसका एकमात्र कर्तव्य कृष्णभावनामृत में अपने सारे कर्म करना है यही समाधि की पूर्ण स्थिति होती है।

 

 

 

अर्जुन ने कहा – हे कृष्ण ! आध्यात्म में लीन चेतना वाले व्यक्ति (स्थित प्रज्ञ) के क्या लक्षण है ? वह कैसे बोलता है तथा उसकी भाषा क्या है ? वह किस तरह बैठता है और चलता है ?

 

 

 

 

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