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Shudro ki khoj Pdf / शूद्रों की खोज PDF Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shudro ki khoj Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shudro ki khoj Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Who is Shudra in Hindi Pdf कर सकते है।

 

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Shudro ki Khoj Pdf Download

 

 

पुस्तक का नामShudro ki khoj Pdf
पुस्तक के लेखकडॉ. भीमराव अम्बेडकर 
पुस्तक की भाषाहिंदी
फॉर्मेटPdf
श्रेणीHistory
कुल पृष्ठ245
साइज48 Mb

 

 

 

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Shudro ki khoj Pdf
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Kattarvad pdf Hindi
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जातिभेद का उच्छेद
यहां से जातिभेद का उच्छेद डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिए 

 

 

 

जिससे हम एक वर्ष में चार व्यापारियों को अपने उत्पाद की आपूर्ति बहुत सुगमता के साथ कर सकते है क्योंकि स्वचालित मशीन लग जाने पर बांस की सफाई और छटाई का समय बच जायेगा और उसका उपयोग कारीगर सामान तैयार करने में लगाएंगे।

 

 

 

 

इन मशीनों को लगाने में चार लाख रुपये का खर्च आएगा सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब स्वदेशी है तथा मणिपुर में ही मिल जाएगी। रजनी बोली ठीक है पहले दो मशीन मणिपुर से ले आओ उसका कार्य देखने के बाद हम लोग चार मशीन और मंगवा लेंगे।

 

 

 

 

लेकिन एक बात को याद रखना किसी भी कारीगर की जीविका समाप्त नहीं होनी चाहिए। चार दिन के बाद सुधीर मणिपुर से दो स्वचालित मशीन ले आया और उसे कम्पनी में लगवा दिया। कम्पनी में मणिपुर और त्रिपुरा के भी कारीगर थे।

 

 

 

 

इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई वस्तुतः उत्पादन बढ़ गया था। रजनी ने सुधीर को कह दिया था। अब रजनी हस्त कला केंद्र में मशीनों की संख्या 6 हो गयी थी। सामान की गुणवत्ता से छेड़-छाड़ किए बगैर ही उत्पादन तीव्र गति से होने लगा।

 

 

 

 

फकीरचंद जायसवाल का निर्यात का बहुत बड़ा व्यवसाय था। वह दूसरो देश से कई सामान आयात भी करते थे। एक दिन वह विंदकी गांव का पता पूछते हुए आ गए। विंदकी अब एक बड़ा सा कस्बा हो गया था। रजनी कला केंद्र तथा सरोज सेवा केंद्र के माध्यम से विंदकी और गंगापुर के लोगो में अभूतपूर्व सुधार हो जाने के कारण यहां की पहचान पूरे भारत वर्ष में हो गयी थी।

 

 

 

 

बांस की बनी हुई ऑफिस में रजनी और सुधीर के सामने ही फकीरचंद जायसवाल बैठे हुए ऑफिस की कला को देख रहे थे जो बांस के बेजोड़ कलाकृति का नमूना थी। जलपान के बाद फकीरचंद जायसवाल बोले मैं आपके पास दिल्ली से आया हूँ।

 

 

 

 

हमारा आयात और निर्यात का बहुत बड़ा कारोबार है। मैंने दिल्ली में एक व्यापारी के पास बांस से बने हुए कई उत्पाद को देखा तो उससे ही पता लगाते हुए आपके पास आया हूँ। सुधीर बोला यह तो हमारे लिए ख़ुशी की बात है आप बताइये हम लोग आपकी क्या सेवा करे?

 

 

 

 

फकीरचंद जायसवाल बोले हमे आपके यहां का बना हर सामान तीन वर्ष के लिए चाहिए जिसे मैं बाहर के देश में निर्यात करूँगा और इस तीन वर्ष के लिए मैं आपको दस करोड़ रुपये अग्रिम देने के लिए तैयार हूँ। सुधीर के मुंह से अचानक ही निकल पड़ा सिर्फ दस करोड़ रुपये।

 

 

 

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