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श्री सूक्त Pdf / Shree Suktam path in Hindi pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shree Suktam path in Hindi pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shree Suktam path in Hindi pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Koka shastra Sachitra Varnan pdf कर सकते हैं।

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Shree Suktam path in Hindi pdf

 

 

 

पुस्तक का नाम  Shree Suktam path in Hindi pdf
भाषा  हिंदी 
साइज  0.20 Mb 
पृष्ठ 
फॉर्मेट  Pdf 

 

 

 

श्री सूक्त Pdf Download

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

वे परम प्रचंड और अग्रमेय बलशाली थे। उन षण्मुख को अपनी ओर आते देखकर तारक सुरश्रेष्ठो से बोला – क्या शत्रुओ का संहार करने वाला कुमार यही है? मैं अकेला वीर इसके साथ युद्ध करूँगा और मैं ही समस्त वीरो, प्रमथगणो, लोकपालों तथा श्री हरि जिनके नायक है उन देवो को भी मार डालूंगा।

 

 

 

तदनन्तर देवताओ को दुर्वचन कहकर वह असुर तारक भीषण युद्ध करने लगा। उस समय बड़ा विकट संग्राम हुआ। तब शत्रु वीरो का संहार करने वाले कुमार ने शिव जी के चरण कमलो का स्मरण करके तारक के वध का विचार किया। फिर तो महातेजस्वी एवं महाबली कुमार रोषावेश में आकर गर्जना करने लगे और बहुत बड़ी सेना के साथ युद्ध के लिए डटकर खड़े हो गए।

 

 

 

उस समय समस्त देवताओ ने जय-जयकार का शब्द किया और देवर्षियों ने इष्ट वाणी द्वारा उनकी स्तुति की। तब तारक और कुमार का संग्राम प्रारंभ हुआ जो अत्यंत दुस्सह महान भयंकर और सम्पूर्ण प्राणियों को भयभीत करने वाला था।

 

 

 

कुमार और तारक दोनों ही शक्ति युद्ध में परम प्रवीण थे अतः अत्यंत रोषावेश में वे परस्पर एक दूसरे पर प्रहार करने लगे। परम पराक्रमी वे दोनों नाना प्रकार के पैतरे बदलते हुए गर्जना कर रहे थे और अनेक प्रकार से दांव पेंच से एक दूसरे पर आघात कर रहे थे।

 

 

 

उस समय देवता, गंधर्व और किन्नर सभी चुपचाप खड़े होकर वह दृश्य देखते रहे। उन्हें परम विस्मय हुआ यहां तक कि वायु का चलना रुक बंद हो गया। सूर्य का तेज कम हो गया और पर्वत एवं वन काननों सहित सारी धरती कांप उठी। इसी अवसर पर हिमालय अदि पर्वत स्नेहाभिभूत होकर कुमार की रक्षा के लिए वहां आये।

 

 

 

तब उन सभी पर्वतो को भयभीत देखकर शंकर एवं गिरिजा के पुत्र कुमार उन्हें सांत्वना देते हुए बोले – महाभाग पर्वतो! तुम लोग खेद मत करो। तुम्हे किसी प्रकार की चिंता नहीं करनी चाहिए। मैं आज तुम सब लोगो आँखों के सामने ही इस पापी का काम तमाम कर दूंगा।

 

 

 

यों उन पर्वतो तथा देवगणो को ढांढस बंधाकर कुमार ने गिरिजा और शंभु को प्रणाम किया तथा अपनी कांतिमती शक्ति को हाथ में लिया। शंभुपुत्र कुमार महाबली तथा महान ऐश्वर्यशाली तो थे ही। जब उन्होंने तारक का वध करने  से शक्ति हाथ में ली उस समय उनकी अद्भुत शोभा हुई।

 

 

 

तदनन्तर शंकर जी के तेज से सम्पन्न कुमार ने उस शक्ति से तारकासुर पर जो समस्त लोको को कष्ट देने वाला था प्रहार किया। उस शक्ति के आघात से तारकासुर के सभी अंग छिन्न-भिन्न हो गए और सम्पूर्ण असुर गणो का अधिपति यह महावीर अचानक धराशायी हो गया।

 

 

 

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