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Shiv Swarodaya in Hindi Pdf / शिव स्वरोदय हिंदी पीडीएफ Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shiv Swarodaya in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shiv Swarodaya in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Raghuvansham Pdf in Hindi कर सकते हैं।

 

 

 

Shiv Swarodaya in Hindi Pdf Download

 

 

पुस्तक का नाम  Shiv Swarodaya in Hindi Pdf
पुस्तक के लेखक  श्रीधर शिव लालजी
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  5.5 Mb 
पृष्ठ  93
श्रेणी  धार्मिक

 

 

 

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Shiv Swarodaya in Hindi Pdf
Shiv Swarodaya in Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

उससे तभी स्नान किया जा सकता है जब उसे धो लिया गया हो। स्नान के पश्चात देवताओ, पितरो, ऋषियों को तृप्त देने वाला स्नानांग तर्पण करना चाहिए। उसके बाद धुला हुआ वस्त्र पहने और आचमन करे। द्विजोत्तमो! तदनन्तर गोबर आदि से लीप पोतकर स्वच्छ किए हुए शुद्ध स्थान में जाकर वहां सुंदर आसन की व्यवस्था करे।

 

 

 

 

वह आसन विशुद्ध काष्ठ का बना हुआ पूरा फैला हुआ तथा विचित्र होना चाहिए। ऐसा आसन सम्पूर्ण अभीष्ट तथा फलो को देने वाला है। उसके ऊपर बिछाने के लिए यथायोग्य मृगचर्म आदि ग्रहण करे। शुद्ध बुद्धिवाला पुरुष उस आसन पर बैठकर भस्म से त्रिपुण्ड्र लगाए। त्रिपुण्ड्र से जप-तप तथा दान सफल होता है।

 

 

 

 

भस्म के अभाव में त्रिपुण्ड्र का साधन जल आदि बताया गया है। इस तरह त्रिपुण्ड्र करके मनुष्य रुद्राक्ष धारण करे और अपने नित्यकर्म का सम्पादन करके फिर शिव की आराधना करे। तत्पश्चात तीन बार मंत्रोच्चारण पूर्वक आचमन करे। फिर वहां शिव की पूजा के लिए अन्न और जल लाकर रखे।

 

 

 

 

दूसरी कोई भी वस्तु जो आवश्यक हो उसे यथाशक्ति जुटाकर अपने पास रखे। इस प्रकार पूजन सामग्री का संग्रह करके वहां धैर्यपूर्वक स्थिर भाव से बैठे। फिर जल, गंध और अक्षत से युक्त एक अर्घ्यपात्र लेकर उसे दाहिने भाग में रखे। उससे उपचार की सिद्धि होती है।

 

 

 

 

फिर गुरु का  स्मरण करके उनकी आज्ञा लेकर विधिवत संकल्प करके अपनी कामना को अलग न रखते हुए पराभक्ति से सपरिवार शिव का पूजन करे। एक मुद्रा दिखाकर सिंदूर आदि उपचारो द्वारा सिद्धि बुद्धि सहित विघ्नहरी गणेश का पूजन करे।

 

 

 

 

लक्ष और लाभ से युक्त गणेश जी का पूजन करके उनके नाम के आदि में प्रणव तथा अंत में नमः जोड़कर नाम के साथ चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग करते हुए नमस्कार करे। तदनन्तर उनसे क्षमा प्रार्थना करके पुनः भाई कार्तिकेय सहित गणेश जी का पराभक्ति से पूजन करके उन्हें बारंबार नमस्कार करे।

 

 

 

 

तत्पश्चात द्वार पर खड़े रहने वाले द्वारपाल महोदय का पूजन करके सती-साध्वी गिरिराजनंदिनी उमा की पूजा करे। चंदन, कुमकुम तथा धूप दीप आदि अनेक उपचारो तथा नाना प्रकार के नैवेद्यो से शिवा का पूजन करके  के पश्चात  जी के नजदीक जाए।

 

 

 

 

यथा संभव अपने घर में मिट्टी, सोना, चांदी, धातु या अन्य पारे आदि की शिव प्रतिमा बनाये और उसे नमस्कार करके भक्ति परायण हो उसकी पूजा करे। उसकी पूजा हो जाने पर सभी देवता पूजित हो जाते है। मिट्टी का शिव लिंग बनाकर विधि पूर्वक उसकी स्थापना करे।

 

 

 

 

अपने घर में रहने वाले लोगो को स्थापना संबंधी सभी नियमो का सर्वथा पालन करना चाहिए। भूतशुद्धि एवं मातृकान्यास करके प्राण प्रतिष्ठा करे। शिवालय में दिक्पालों की भी स्थापना करके उनकी पूजा करे। घर में हमेशा मूल मंत्र का प्रयोग करके शिव की पूजा करनी चाहिए।

 

 

 

 

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