Advertisements

Shiv Puran Katha Hindi Mein Pdf / शिव पुराण कथा हिंदी में Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shiv Puran Katha Hindi Mein Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shiv Puran Katha Hindi Mein Pdf Download कर सकते हैं।

 

Advertisements

 

 

Shiv Puran Katha Hindi Mein Pdf 

 

 

पुस्तक का नाम शिव पुराण कथा
पुस्तक की भाषा हिंदी 
श्रेणी धार्मिक 
फॉर्मेट Pdf
कुल पृष्ठ 812
साइज 49.2 Mb

 

 

 

 

Advertisements
Shiv Puran in Hindi PDF
यहां से Shiv Puran in Hindi PDF Download करे
Advertisements

 

 

 

शिव पुराण हिंदी Pdf Free Download
यहां से शिव पुराण हिंदी Pdf Free Download करे।
Advertisements

 

 

 

 

शिव पुराण कथा हिंदी में Pdf 
यहां से शिव पुराण कथा हिंदी में Pdf डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

पूर्णिमा व्रत कथा और पूजन विधि Pdf Download

 

शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf Download

 

कार्तिक पूर्णिम कथा Pdf Download

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

आकाश में बिखरे हुए तारेमोतियों मोतियों के समान है जो रात्रि रूपी स्त्री के श्रृंगार है। प्रभु ने कहा – भाइयो! चन्द्रमा में जो कालापन है वह क्या है? अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार कहो।

 

 

 

 

सुग्रीव ने कहा – हे रघुनाथ जी! सुनिए, चन्द्रमा में पृथ्वी की छाया दिखाई दे रही है। किसी ने कहा – चन्द्रमा को राहु ने त्रास दिया था वही घाव का काला दाग हृदय पर पड़ा है।

 

 

 

 

कोई कहता है – जब ब्रह्मा ने कामदेव की स्त्री रति का मुख बनाया तब उस्सने चन्द्रमा का सार भाग निकाल लिया। जिससे रति का मुख तो सुंदर हो गया लेकिन चन्द्रमा के हृदय में छिद्र हो गया।

 

 

 

 

वही छिद्र चन्द्रमा के हृदय में वर्तमान है जिसकी राह से आकाश की काली छाया चन्द्रमा के हृदय में दिखाई पड़ती है। प्रभु श्री राम जी ने कहा – विष चन्द्रमा का बहुत ही प्यारा भाई है।

 

 

 

 

इसलिए ही उसने विष को अपनी हृदय में स्थान दे रखा है। विष युक्त वह अपने किरण समूह को फैलाकर वह वियोगी नर-नारियो को दग्ध करता रहता है।

 

 

 

 

12- दोहा का अर्थ-

 

 

 

हनुमान जी ने कहा – हे प्रभो! सुनिए, चन्द्रमा आपका प्रिय दास है। आपकी सुंदर श्याम मूर्ति चन्द्रमा के हृदय में बसती है। वही श्यामता की झलक चन्द्रमा में है। पवनसुत हनुमान जी के वचन सुनकर श्री राम जी हँसे। फिर दक्षिण की ओर देखकर कृपानिधान प्रभु बोले।

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Shiv Puran Katha Hindi Mein Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और इस तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!