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Shikhar Par Milenge Pdf / शिखर पर मिलेंगे Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shikhar Par Milenge Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shikhar Par Milenge Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf कर सकते हैं।

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Shikhar Par Milenge Pdf Download

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

लोकसंहारकारी रूद्र ने अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक उस पर्वत के ऊपर दे मारा। मुने! भगवान शंकर के पटकने से उस जटा के दो टुकड़े हो गए और महाप्रलय के समान भयंकर शब्द प्रकट हुआ। देवर्षे! उस जटा के पूर्वभाग से महाभयंकर महाबली वीरभद्र प्रकट हुए जो समस्त के अगुआ है।

 

 

 

वे भूमंडल को सब ओर से व्याप्त करके उससे भी दस अंगुल अधिक होकर खड़े हो गए। वे देखने में प्रलयाग्नि के समान जान पड़ते थे। उनका शरीर बहुत ऊँचा था। वे एक हजार भुजाओ से युक्त थे उन सर्वसमर्थ महारुद्र के क्रोध पूर्वक प्रकट हुए निःश्वास से सौ प्रकार ज्वर और तरह प्रकार के सन्निपात रोग पैदा हो गए।

 

 

 

तात! उस जटा के दूसरे भाग से महाकाली उत्पन्न हुई जो बड़ी भयंकर दिखाई देती थी। वे करोड़ो भूतो से घिरी हुई थी। जो ज्वर पैदा हुए वे सब के सब शरीरधारी, क्रूर और समस्त लोको के लिए भयंकर थे। वे अपने तेज से प्रज्वलित हो सब ओर से दाह उत्पन्न करते हुए प्रतीत होते थे।

 

 

 

वीरभद्र बातचीत करने में बड़े कुशल थे। उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर परमेश्वर शिव को प्रणाम करके कहा – महारुद्र! सोम, सूर्य और अग्नि को तीन नेत्रों के रूप में धारण करने वाले प्रभो! शीघ्र आज्ञा दीजिए। मुझे इस समय कौन सा कार्य करना होगा? क्या मुझे आधे ही क्षण में सारे समुद्रो को सुखा देना है?

 

 

 

या इतने ही समय में सम्पूर्ण पर्वतो को पीस डालना है? हर! मैं एक ही क्षण में ब्रह्माण्ड को भस्म कर डालूं या समस्त देवताओ और मुनीश्वरो को जलाकर रख कर दूँ? शंकर! ईशान! क्या मैं समस्त लोको को उलट-पलट दूँ या सम्पूर्ण प्राणियों का विनाश कर डालूं? महेश्वर! आपकी कृपा से कही कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसे मैं न कर सकूं?

 

 

 

पराक्रम के द्वारा मेरी समानता करने वाला वीर न पहले कभी हुआ है और न आगे होगा। शंकर! आप किसी तिनके को भेज दे तो वह भी बिना किसी यत्न के क्षण भर में बड़ा से बड़ा कार्य सिद्ध कर सकता है इसमें संशय नहीं है। शंभो! यद्यपि आपकी लीला मात्र से सारा कार्य सिद्ध हो जाता है तथापि जो मुझे भेजा जा रहा है यह मुझपर आपका अनुग्रह ही है।

 

 

 

शंकर! आपकी कृपा के बिना किसी में भी कोई शक्ति नहीं हो सकती। वास्तव में आपकी आज्ञा के बिना कोई तिनके आदि को भी हिलाने में समर्थ नहीं है यह निस्संदेह कहा जा सकता है। महादेव! मैं आपके चरणों में बारंबार प्रणाम करता हूँ।

 

 

 

हर! आप अपने अभीष्ट कार्य की सिद्धि के लिए आज मुझे शीघ्र भेजिए। शंभो! मेरे दाहिने अंग बारंबार फड़क रहे है। इससे सूचित होता है कि मेरी विजय अवश्य होगी। अतः प्रभो! मुझे भेजिए। शंकर! आज मुझे कोई अभूतपूर्वएवं विशेष हर्ष तथा उत्साह का अनुभव हो रहा है और मेरा चित्त आपके चरण कमल में लगा हुआ है।

 

 

 

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