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Shankh Smriti Pdf Hindi / शंख स्मृति pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Shankh Smriti Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Shankh Smriti Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  सरस्वती स्तोत्र Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Shankh Smriti Pdf / शंख स्मृति पीडीऍफ़ 

 

 

शंख स्मृति पीडीएफ डाउनलोड 

 

 

 

 

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Shankh Smriti Pdf Hindi
Shankh Smriti Pdf Hindi
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

मैं सौ बार राम की सौगंध खाकर कहता हूँ कि राम की माता कौशल्या ने इस विषय में मुझसे कभी कुछ नहीं कहा। अवश्य ही मैंने तुमसे पूछे बिना यह सब किया, इसलिए ही मेरा मनोरथ खाली गया और मनोरथ पूर्ण नहीं हो सका।

 

 

 

2- अब क्रोध छोड़ दे और मंगल साज सज। कुछ दिनों के बाद ही भरत युवराज हो जायेंगे। परन्तु एक बात दुखी लगी कि तूने दूसरे वरदान में बड़ी अड़चन पैदा कर दी है।

 

 

 

 

3- उस अड़चन भरे वरदान की आग की आंच से मेरा हृदय अब भी जल रहा है। यह दिल्लगी, क्रोध में अथवा स्वास्तव में सच्चा है? क्रोध को त्याग दो और राम का अपराध तो बताओ। सभी लोग कहते है कि राम तो बहुत साधु है।

 

 

 

4- तू स्वयं ही राम की सराहना करके उनपर स्नेह भी करती थी। अब यह सुन मुझे संदेह हो गया है कि तुम्हारी प्रसंशा और स्नेह कही झूठे तो नहीं थे जो अपने स्वभाव से शत्रु को भी अपने अनुकूल कर लेता है वह माता के साथ प्रतिकूल आचरण क्यों करेगा?

 

 

 

 

32- दोहा का अर्थ-

 

 

 

हे प्रिये! हंसी और क्रोध छोड़ दे और विवेक से उचित अनुचित विचारकर वर मांग जिससे अब मैं नेत्र भरकर भरत का राज्याभिषेक देख सकू।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- पानी के बिना मछली भले ही जीवित रहे चाहे बिना मणि के सांप भी क्यों न जीवित रहे। परन्तु मैं अपने स्वभाव के अनुसार ही कहता हूँ और मन में बिना छल रखे हुए कहता हूँ कि राम के बिना मेरा जीवन नहीं है।

 

 

 

2- हे चतुर प्रिये! अपने जी में समझ और देख मेरा जीवन श्री राम के दर्शन के अधीन है। राजा के कोमल वचन सुनकर कैकेयी अत्यंत ही जल रही है। मानो अग्नि में घी की आहुतियां पड़ रही है।

 

 

 

 

3- कैकेयी राजा दशरथ से कहती है – आप करोडो उपाय क्यों न करे, यहां आपकी माया, चालबाजी नहीं लगने पायेगी। अतः मैंने जो माँगा है सो दीजिए अन्यथा ‘नहीं’ कहकर अपयश लीजिए। मुझे तो बहुत प्रपंच, बखेड़े नहीं अच्छे लगते है।

 

 

 

 

4- राम तो साधु है और आप तो बहुत बड़े साधु है और राम की माता भी अच्छी मैंने सबको पहचान लिया है। कौशल्या ने जैसा मेरा भला चाहा है मैं भी उन्हें याद रखने योग्य फल दूंगी।

 

 

 

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