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51 Shakti Peeth Name List Pdf / 51 शक्तिपीठ Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको 51 Shakti Peeth Name List Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से 51 Shakti Peeth Name List Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से 108 Upanishads Pdf कर सकते हैं।

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

इतनी छोटी सी उम्र में ही इतनी अच्छी भावना है इस लड़की की बड़ी होने पर वह तो डा. भारती से भी आगे जाएगी। यह सब बातें सुनकर डा. भारती ने सरिता को गले से लगा लिया। उनका मन बहुत भारी हो गया था। काश भगवान उन्हें एक संतान दे दिया होता।

 

 

 

 

तभी उनके मन ने उन्हें समझाते हुए कहा कि यह सरिता भी तो अपनी ही संतान है क्योंकि भगवान ने उसे संतान का दुःख हल्का करने के लिए ही भेज दिया था। डा. निशा भारती सोचने लगी आज इस सरिता की वजह से ही उस अजनबी की जान बच सकी है।

 

 

 

 

वह सोचने लगी – आज सरिता सबेरे से ही डा. भारती के साथ चलने की जिद कर रही थी। सुबह तो उन्हें सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है। इसलिए उन्होंने सरिता से कहा था कि शाम के वक्त उसे अपने साथ अवश्य ही ले चलेगी। शायंकाल डा. निशा भारती के साथ सरिता भी आ गयी थी।

 

 

 

 

क्लिनिक में डा. निशा भारती मरीजों को देख ही रही थी कि सरिता आँख बचाकर क्लिनिक के बाहर ही खेल रही थी। उसने ही देखा था उस घायल आदमी को। न जाने कैसे घायल होकर गिर पड़ा था। अगर भगवान पर भरोसा करके सच्चे दिल से अगर कुछ मांगा जाय तो वह अवश्य ही फलीभूत होता है।

 

 

 

 

शायद भगवान ने डा. निशा भारती की आवाज सुन लिया था। उन्हें कुछ आशा बंध गयी थी उनके बाग़ में एक फूल खिलने वाला है और उन्होंने सोच लिया था कि चाहे जो भी फूल आये चाहे गेंदा या चमेली लेकिन सरिता के लिए उसका वही हक रहेगा जो पहले से है उसके लिए कोई भी कमी नहीं होगी प्यार दुलार में।

 

 

 

 

डा. निशा भारती हर रोज उस अजनबी का कुशल क्षेम पूछकर ही अपने क्लिनिक में आती थी। आज उस अजनबी को अस्पताल से बाहर निकलना था। डा. भारती दस हजार रूपया लेकर आयी थी उस अजनबी को अस्पताल से बाहर निकालने के लिए।

 

 

 

 

उसे निकालते समय डा. भारती ने अस्पताल संचालक से बिल माँगा तो उसने कहा – आप जैसे महान सख्सियत से पैसा लेना ना इंसाफ़ी होगी क्योंकि आपका व्यक्तित्व बहुत महान है तभी डा. निशा भारती ने कहा – अगर आपके पास हमारे जैसे कई लोग मरीज लेकर आ जाये तो आपकी बहुत हानि हो जाएगी।

 

 

 

 

तभी अस्पताल का संचालक डा. नवीन बोला – आप भी तो बिना शुल्क लिए ही क्लिनिक चलाती है क्या मैं इतना भी नहीं कर सकता आपके लिए लेकिन डा. नवीन इतना याद रखिए यदि घोडा घास से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या? मैं भी अपनी पूरा वेतन लेती हूँ सरकार से और आप तो परिवार वाले है।

 

 

 

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