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Satya Vyas Novel in Hindi Pdf / चौरासी 84 उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Satya Vyas Novel in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Satya Vyas Novel in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Vardi Wala Gunda Novel pdf कर सकते हैं।

 

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Satya Vyas Novel in Hindi Pdf Download

 

 

 

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बनारस टॉकीज हिंदी नॉवेल By सत्य व्यास यहां से डाउनलोड करे।
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दिल्ली दरबार हिंदी उपन्यास यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

गंगापुर को दूषित और मैला करने के लिए गांव के आवारा लड़को के साथ-साथ बड़े बुजुर्ग विचारक चिंतक आदमियों का भी भरपूर योगदान था। गांव हो या शहर हर जगह ऐसे लोग पर्याप्त संख्या में मौजूद रहते है। स्वच्छ छवि वाले अधिकारियो की ऐसी लोगो के सामने नहीं चल सकती है।

 

 

 

 

ऐसे लोग सरकार को कोसते है तथा अपने गांव की धरोहर को सदैव ही मिटाने का अथक प्रयास करते है और बहाना रहता है कि परिवर्तन हो रहा है। लेकिन अभी भी इस दुनियां में ऐसे लोग है जो अपनी धरोहरों को सहेजते हुए परिवर्तन का प्रयास करते है।

 

 

 

 

उन्ही में से एक योग पुरुष प्रताप भारती भी थे। प्रताप भारती दूसरे दिन विंद की गांव में अपने मित्र रघुराज सोनकर के पास मिलने के लिए चले गए। रघुराज सोनकर बाजार में अपने जीविकोपार्जन के लिए जाने के लिए तैयार हो रहे थे। तभी एक नयी साइकल लेकर एक साठ साल का आदमी उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

 

 

 

 

रघु तो एकदम ही चौंक गए तभी अजनबी ने कहा – मुझे नहीं पहचानते हो रघु? रघु हतप्रभ थे लेकिन आवाज उन्हें पहचानी हुई लग रही थी। मैं गंगापुर गांव का प्रताप हूँ तभी चौकते हुए रघु सोनकर भी बोल पड़ा अच्छा प्रताप भारती आओ मेरे प्यारे दोस्त बैठो कहाँ की तैयारी कर रहे थे।

 

 

 

 

रघु बोले – जीवित रहने के लिए तो कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा। मैं बाजार में स्वर्णकार के यहां नौकरी करता हूँ साथ ही अपने खेती का भी काम कर लेता हूँ। कितने बच्चे है तुम्हारे? प्रताप भारती ने पूछा। तभी सुधीर पानी और बिस्किट लेकर आया।

 

 

 

 

रघु बोले – लो पहले पानी पियो फिर बातें होती रहेगी। रघु और प्रताप दोनों पानी पीने लगे तभी सुधीर चाय और पकौड़े लाकर रख दिया दोनों दोस्त चाय पीते हुए बातें करने लगे।

 

 

 

 

समय बीत रहा था विवेक और नरेश पढ़ाई करते हुए दसवीं कक्षा में पहुँच गए थे। सुधीर भी पांचवी पास करके कक्षा 6 में पहुँच गया था। नरेश की बहन अभी पांचवी में ही पढ़ रही थी।

 

 

 

 

उसे अपने पैतृक व्यवसाय में ज्यादा ही रुचि थी लेकिन किसी भी व्यवसाय में हुनर के साथ ही पढ़ाई की भी आवश्यकता होती है और पढ़ाई से ही बुद्धि का विकास होने से कोई भी अपनी मन पसंद की कार्य शैली को अच्छे तरीके से कर सकता है।

 

 

 

 

अगर पढ़ाई के साथ मन पसंद कार्य करने की शैली बन जाय तो वह सोने पर सुहागा हो जाती है। देहात या शहर दोनों जगह पर मध्यम वर्ण अपने-अपने सपने को पूर्ण करने में असमर्थ हो जाते है कोई विरला ही नसीब वाला होता है जो अपने सपने को पूर्ण करने में सफल होता है।

 

 

 

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