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Saryuparin Brahmin Vanshavali Pdf / सरयूपारीण ब्राह्मण वंशावली Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Saryuparin Brahmin Vanshavali Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Saryuparin Brahmin Vanshavali Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Saryuparin Brahmin Vanshavali Pdf 

 

 

 

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Saryuparin Brahmin Vanshavali Pdf
सरयूपारीण ब्राह्मण वंशावली पीडीएफ डाउनलोड 
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Brahman Gotravali Pdf Hindi
यहां से Brahmin Gotravali Pdf Download करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

उसी समय प्रेम और आनंद में मग्न होते हुए लक्ष्मण जी आये। वह रघुकुल रूपी कमल को खिलाने वाले चन्द्रमा श्री राम जी को प्रिय वचन कहकर उनका सम्मान किया।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- अयोध्या में बहुत प्रकार से बाजे बज रहे है। नगर के इस अतिसय आनंद का वर्णन नहीं हो सकता है। सब लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते है कि भरत का आगमन जल्दी हो जाय और राज्याभिषेक को देखकर अपने नेत्रों का फल प्राप्त करे।

 

 

 

 

2- बाजार, रास्ते, घर, गली और चबूतरों पर जहां-तहां पुरुष और स्त्री आपस में यही कहते है कि कल का शुभ लग्न मुहूर्त कितने समय है जब विधाता हमारी अभिलाषा पूरी करेंगे।

 

 

 

 

3- जब सीता जी के साथ श्री राम जी सुवर्ण के सिंहासन पर विराजेंगे और हमारी मनःकामना पूरी होगी। इधर तो सब यह कह रहे है कि कल कब होगा। उधर कुचक्री देवता विघ्न मना रहे है।

 

 

 

 

4- उन कुचक्री देवताओ को अवध में होने वाला उन्हें जरा भी हर्ष नहीं होता है। जैसे चोर को चांदनी रात अच्छी नहीं लगती है। सरस्वती जी को बुलाकर देवता उनकी विनय करते हुए उनके पैरो पर गिर पड़ते है।

 

 

 

11- दोहा का अर्थ-

 

 

 

सभी देवता सरस्वती से कहते है – हे माता! हमारी बड़ी विपत्ति को देखकर आज आप वही कीजिए जिससे श्री राम जी राज्य त्यागकर वन को चले जाये और देवताओ का सब कार्य सिद्ध हो जाय।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- देवताओ की बात सुनकर सरस्वती जी खड़ी होकर पछता रही है कि उन्हें क्यू कमलवन के लिए हेमंत ऋतु की रात बनना पड़ेगा? उन्हें पछताते देखकर देवता उन्हें फिर समझाकर कहने लगे, हे माता! इसमें आपको कोई दोष न लगेगा।

 

 

 

 

2- आप तो श्री राम जी के सब प्रभाव को जानती है, वह तो हर्ष और विषाद से रहित रहते है। जीव अपने कर्म के वश होने से ही सुख दुःख को भोगता है। अतएव आप देवताओ के हित के लिए अयोध्या जाइये।

 

 

 

 

3- देवताओ ने बार-बार सरस्वती जी के चरण पकड़कर उन्हें संकोच में डाल दिया। तब उन्होंने विचार किया कि भले ही इनका स्थान ऊँचा है लेकिन इनकी बुद्धि बहुत ही ओछी है और इनकी करनी भी नीची है यह लोग दूसरे का ऐश्वर्य नहीं देख सकते है।

 

 

 

 

4- परन्तु उन्होंने आगे के कार्य का विचार किया कि श्री राम जी के वन जाने से सभी राक्षसों का वध होगा और सारा जगत सुखमय हो जाएगा तथा जब भी कोई चतुर कवि श्री राम के वनवास के चरित्र का वर्णन करेगा तो अनायास ही वह मेरी कामना करेगा यह विचार करने के बाद सरस्वती हृदय में हर्षित होकर दशरथ की पुरी अयोध्या में आ गयी। मानो दुःसह दुःख देने वाली कोई ग्रह दशा आई हो।

 

 

 

 

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