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Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf / सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Jeet ki Ranneeti Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम  Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf
पुस्तक के लेखक  मुहम्मद इक़बाल 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  0.6 Mb 
पृष्ठ 
श्रेणी  Poetry 

 

 

 

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Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

तदनन्तर हर्ष से भरे हुए विष्णु आदि समस्त देवता और मुनि उस दिशा को प्रणाम करके अपने-अपने धाम में चले गए। नारद जी ने पूछा – पिता जी! जब देवी दुर्गा अंतर्ध्यान हो गयी और देवगण अपने-अपने धाम को चले गए उसके बाद क्या हुआ?

 

 

 

ब्रह्मा जी ने कहा – मेरे पुत्रो में श्रेष्ठ विप्रवर नारद! जब विष्णु आदि देव समुदाय हिमालय और मेना को देवी की आराधना का उपदेश दे चले गए। तब गिरिराज हिमालय और मेना दोनों दम्पति ने बड़ी भारी तपस्या आरंभ की। वे दिन रात शंभु और शिवा का चिंतन करते हुए भक्ति युक्त चित्त से नित्य उनकी सम्यक रीति से आराधना करने लगे।

 

 

 

हिमवान की पत्नी मेना बड़ी प्रसन्नता से शिव सहित शिवा देवी की पूजा करने लगी। वे उन्ही के संतोष के लिए सदा ब्राह्मणो को दान देती रहती थी। मन में संतान की कामना ले मेना चैत्र मास के आरंभ से लेकर सत्ताईस वर्षो तक प्रतिदिन तत्परता पूर्वक शिवा देवी की पूजा और आराधना में लगी रही।

 

 

 

वे अष्टमी को उपवास करके नवमी को लड्डू बलि सामग्री पीठी खीर और गंध पुष्प आदि देवी को भेट करती थी। गंगा के किनारे ओषधिग्रस्थ में उमा की मिट्टी की मूर्ति बनाकर नाना प्रकार की वस्तुए समर्पित करके उसकी पूजा करती थी।

 

 

 

मेना देवी कभी निराहार रहती कभी व्रत के नियमो का पालन करती कभी जल पीकर रहती और कभी हवा पीकर ही रह जाती थी। विशुद्ध तेज से दमकती हुई दीप्तिमती मेना ने प्रेम पूर्वक शिवा में चित्त लगाए सत्ताईस वर्ष व्यतीत कर दिए।

 

 

 

सत्ताईस वर्ष पूरे होने पर जगन्मयी शंकर कामिनी जगदंबा उमा अत्यंत प्रसन्न हुई। मेना की उत्तम भक्ति से संतुष्ट हो वे परमेश्वरि देवी उनपर अनुग्रह करने के लिए उनके सामने प्रकट हुई। तेजोमंडल के बीच में विराजमान तथा दिव्य अवयवों से संयुक्त उमादेवी प्रत्यक्ष दर्शन दे मेना से हंसती हुई बोली।

 

 

 

गिरिराज हिमालय की रानी महासाध्वी मेना! मैं तुम्हारी तपस्या से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हारे मन में जो अभिलाषा हो उसे कहो। मेना! तुमने तपस्या व्रत और समाधि के द्वारा जिस-जिस वस्तु के लिए प्रार्थना की है वह सब मैं तुम्हे दूंगी। तब मेना ने प्रत्यक्ष प्रकट हुई कालिका देवी को देखकर प्रणाम किया और इस प्रकार कहा।

 

 

 

देवी! इस समय मुझे आपके रूप का प्रत्यक्ष दर्शन हुआ है। अतः मैं आपकी स्तुति करना चाहती हूँ। कालिके! इसके लिए आप प्रसन्न हो। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! मेना के ऐसा कहने पर सर्वमोहोनी कालिका देवी ने मन में अत्यंत प्रसन्न हो अपनी दोनों बाहो से खींचकर मेना को हृदय से लगा लिया।

 

 

 

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