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संगीत की पुस्तक Pdf / Sangeet ki Pustak Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Sangeet ki Pustak Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Sangeet ki Pustak Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Namami Shamishan Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Sangeet ki Pustak Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Sangeet ki Pustak Pdf
पुस्तक के लेखक  रामावतार 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  1 Mb 
पृष्ठ  70 
श्रेणी 

 

 

 

संगीत की पुस्तक Pdf Download

 

 

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भारतीय संगीत इतिहास Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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राग संगीत की उत्पत्ति एवं विकास का विश्लेषणात्मक अध्ययन Pdf Download यहां से करे।
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भारत का संगीत सिद्धांत Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

पतिव्रता और उसके पतिदेव उमा और महेश्वर के समान है अतः विद्वान मनुष्य उन दोनों का पूजन करे। पति प्रणव है और नारी वेद की ऋचा। पति तप है और स्त्री क्षमा, नारी सत्कर्म है और पति उसका फल। शिवे! सती नारी और उसके पति दोनों दम्पती धन्य है।

 

 

 

गिरिराजकुमारी! इस प्रकार मैंने तुमसे पतिव्रता धर्म का वर्णन किया है। अब तुम सावधान हो आज मुझसे प्रसन्नता पूर्वक पतिव्रता के भेदो का वर्णन सुनो। देवी! पतिव्रता नारियां उत्तमा आदि भेद से चार प्रकार की बताई गयी है। जो अपना स्मरण करने वाले पुरुषो का सारा पाप हर लेती है।

 

 

 

उत्तमा, मध्यमा, निकृष्टा और अतिनिकृष्टा ये पतिव्रता के चार भेद है। अब मैं इनके लक्षण बताती हूँ ध्यान देकर सुनो। भद्रे! जिसका मन सदा स्वप्न में भी अपने पति को ही देखता है दूसरे किसी पुरुष को नहीं वह स्त्री उत्तमा या उत्तम श्रेणी की पतिव्रता कही गयी है।

 

 

 

शैलजे! जो दूसरे पुरुष को उत्तम बुद्धि से पिता, भाई एवं पुत्र के समान देखती है उसे मध्यम श्रेणी की पतिव्रता कहा गया है। पार्वती! जो मन से और धर्म का विचार करके व्यभिचार नहीं करती सदाचार में ही स्थित रहती है उसे निम्नश्रेणी की पतिव्रता कहा गया है।

 

 

 

जो पति के भय से तथा कुल में कलंक लगने के डर से व्यभिचार से बचने का प्रयत्न करती है उसे पूर्वकाल के विद्वानों ने निम्नतम कोटि की पतिव्रता बताया है। शिवे! ये चारो प्रकार की पतिव्रताये समस्त लोको का पाप नाश करने वाली और उन्हें पवित्र बनाने वाली है।

 

 

 

अत्रि की स्त्री अनसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीनो देवताओ की प्रार्थना से पातिव्रत्य के प्रभाव का उपभोग करके वाराह के शाप से एक ब्राह्मण को जीवित कर दिया था। शैलकुमारी शिवे! ऐसा जानकर तुम्हे नित्य प्रसन्नता पूर्वक पति की सेवा करनी चाहिए।

 

 

 

पति सेवन सदा समस्त अभीष्ट फलो को देने वाला है। तुम साक्षात जगदंबा महेश्वरी हो और तुम्हारे पति साक्षात् भगवान शिव है। तुम्हारा तो चिंतनमात्र करने से स्त्रियां पतिव्रता हो जाएँगी। देवी! यद्यपि तुम्हारे आगे यह सब कहने का कोई प्रयोजन नहीं है तथापि आज लोकाचार का आश्रय ले मैंने तुम्हे सती धर्म का उपदेश दिया है।

 

 

 

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