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Sahitya Darpan Pdf / साहित्य दर्पण Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Sahitya Darpan Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Sahitya Darpan Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Hensang Ki Bharat Yatra Pdf कर सकते हैं।

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Sahitya Darpan Pdf

 

पुस्तक का नाम  Sahitya Darpan Pdf
पुस्तक के लेखक  सत्यव्रत सिंह 
भाषा  हिंदी 
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  39 Mb 
पृष्ठ  989 
श्रेणी 

 

 

साहित्य दर्पण Pdf Download

 

 

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Sahitya Darpan Pdf
Sahitya Darpan Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

विष्णु आदि देवताओ ने उसे आशीर्वाद दिया। उसके बाद भगवान शंकर ने उस वासभवन में पार्वती को बाए बिठाकर मिष्ठान्न भोजन कराया और पार्वती ने भी प्रसन्नता पूर्वक उनका मुंह मीठा किया। तदनन्तर वहां लोकाचार का पालन करते हुए आवश्यक कृत्य करके मेना और हिमवान की आज्ञा ले भगवान शिव जनवासे में चले गए।

 

 

 

मुने! उस समय महान उत्सव हुआ और वेद मंत्रो की ध्वनि होने लगी। लोग चारो प्रकार के बाजे बजाने लगे। जनवासो में अपने स्थान पर पहुंचकर शिव ने लोकाचारवश मुनियो को प्रणाम किया। श्रीहरि को और मुझे भी मस्तक झुकाया। फिर सब देवता आदि ने उनकी वंदना की।

 

 

 

उस समय वहां जय-जयकार नमस्कार तथा समस्त विघ्नो का विनाश करने वाली शुभदायिनी देव ध्वनि भी होने लगी। इसके बाद मैंने, भगवान विष्णु ने तथा इंद्र, ऋषि और सिद्ध आदि ने भी शंकर जी की स्तुति की। गिरिजानायक महेश्वर की स्तुति करके वे विष्णु आदि देवता प्रसन्नता पूर्वक उनकी यथोचित सेवा में लग गए।

 

 

 

तत्पश्चात लीला पूर्वक शरीर धारण करने वाले महेश्वर शंभु ने उन सबको सम्मान दिया। फिर उन परमेश्वर की आज्ञा पाकर वे विष्णु आदि देवता अत्यंत प्रसन्न हो अपने-अपने विश्रामस्थान को गए। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! तदनन्तर भाग्यवानो में श्रेष्ठ और चतुर गिरिराज हिमवान ने बारातियो को भोजन कराने के लिए अपने आंगन को सुंदर ढंग से सजाया तथा अपने पुत्रो एवं अन्यान्य पर्वतो को भेजकर शिव सहित सब देवताओ को भोजन के लिए बुलाया।

 

 

 

जब सब लोग आ गए तब उनको बड़े आदर के साथ उत्तमोत्तम भोज्य पदार्थ का भोजन कराया। भोजन के पश्चात् हाथ मुंह धो विष्णु आदि सब देवता विश्राम के लिए प्रसन्नता पूर्वक अपने-अपने डेरे में गए। मेना की आज्ञा से साध्वी स्त्रियों ने भगवान शिव से भक्ति पूर्वक प्रार्थना करके उन्ही महान उत्सव से परिपूर्ण सुंदर वासभवन मे ठहराया।

 

 

 

मेना के दिए हुए मनोहर रत्न सिंहासन पर बैठकर आनंदित हुए शंभु ने उस वासमंदिर का निरीक्षण किया। वह भवन प्रज्वलित हुए सैकड़ो रत्नमय प्रदीपो के कारण अद्भुत प्रभा से उद्भासित हो रहा था। वहां रत्नमय पात्र तथा रत्नो के ही कलश रखे गए थे।

 

 

 

मोती और मणियों से पूरा भवन जगमगा रहा था। रत्नमय दर्पण की शोभा से सम्पन्न तथा श्वेत चंवरो से अलंकृत था। मुक्तामणियों की सुंदर मालाओ से आवेष्टित हुआ वह वासभवन बड़ा समृद्धिशाली दिखाई देता था। उसकी कही उपमा नहीं थी।

 

 

 

वह महादिव्य, अतिविचित्र, परम मनोहर तथा मन को आह्लाद प्रदान करने वाला था। उसके फर्श पर नाना प्रकार की रचनाये की गयी थी। बेल बूटे निकाले गए थे। शिव जी के दिए हुए वर का ही महान प्रभाव दिखाता हुआ शोभाशाली भवन शिवलोक के नाम से प्रसिद्ध किया गया था।

 

 

 

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