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Rudrashtadhyayi Pdf Free Download / Rudri Path Free Pdf Download

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मित्रों इस पोस्ट में Rudrashtadhyayi Pdf Free के बारे में बताया गया है। आप नीचे की लिंक से Rudrashtadhyayi Pdf Free Download कर सकते हैं और आप यहां से शिव के सात रहस्य Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Rudrashtadhyayi Pdf Free Download 

 

 

 

पुस्तक का नाम सम्पूर्ण रुद्राष्टाध्यायी पाठ
पुस्तक के लेखक गीता प्रेस 
पुस्तक की साइज 12.72 MB
कुल पृष्ठ 229 
फॉर्मेट PDF
श्रेणी भक्ति, धार्मिक 
पुस्तक की भाषा संस्कृत, हिंदी 

 

 

 

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Rudrashtadhyayi Pdf
सरल रुद्राष्टाध्यायी Pdf Download
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Rudri Path Pdf Hindi Free Download
संपूर्ण रुद्री पाठ Pdf Free Download
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Shiv Mantra List Pdf / शिव मंत्र लिस्ट Pdf Download
शिव मंत्र इन हिंदी Pdf Download
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Rudri Path के बारे में 

 

 

अब हम आपको Rudri Path के बारे में बताने जा रहे है। Rudri Path में हम भगवान शिव के साथ ही पंच देवताओ भगवान सूर्य, भगवान श्री गणेश, माँ दुर्गा, भगवान श्री विष्णु और भगवान रूद्र की पूजा करते है।

 

 

 

सावन माह में रुद्राभिषेक का बहुत ही ख़ास महत्व होता है। सावन माह बहुत ही पवित्र होता है और उस भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और उस समय शिव मंदिरो में बहुत ही भीड़ होती है। रूद्र भगवान शिव प्रचंड स्वरूप का नाम है। रुद्राभिषेक के दौर शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी मंत्र पढ़ा जाता है और इसे Rudri Path कहते है।

 

 

 

Rudri Path के फायदे 

 

 

Rudrashtadhyayi Pdf Free Download
Rudrashtadhyayi Pdf Free Download
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भगवान शिव अपने भक्तो पर जल्द ही प्रसन्न हो जाते है इसीलिए उन्हें भोला-भंडारी कहा जाता है। आइये अब हम Rudrashtadhyayi Path के फायदे के बारे में जानते है।

 

1- अगर जल से रुद्राभिषेक किया जाता है तो वर्षा होती है। वर्षा न होने पर जल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है।

 

2- गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने से धन वृद्धि होती है।

 

3- तीर्थस्थान के जल से अभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

4- गाय के दूध या शुद्ध घी से अभिषेक करने से आरोग्य मिलता है।

 

5- इत्र मिलाकर अभिषेक करने से विमारियो का नाश होता है।

 

 

 

 

ध्यान योग सिर्फ पढ़ने के लिए 

 

 

 

अनासक्त कर्म – श्री कृष्ण कहते है – जो पुरुष अपने कर्तव्य के प्रति अनासक्त है और जो अपने कर्तव्य का पालन, वही सन्यासी और असली योगी है, वह नही जो न तो अग्नि जलाता है न कर्म करता है।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – यहां भगवान बताते है कि अष्टांग योग पद्धति मन तथा इन्द्रियों को वश में करने के लिए साधन है। किन्तु इस कलयुग में सामान्य जनता के लिए इसे संपन्न करना बहुत कठिन है।

 

 

 

 

यद्यपि इस अध्याय में अष्टांग योग पद्धति की संस्तुति की गई है। किन्तु भगवान बल देते है कि कर्म योग या कृष्ण भावनामृत में कर्म करना इससे श्रेष्ठ विधि है।

 

 

 

 

पूर्णता की कसौटी है – कृष्ण भावनामृत में कर्म करना, कर्म के फलो का भोग करने के उद्देश्य से नहीं। कृष्ण भावनामृत में कर्म करना सब मनुष्यो का परम कर्तव्य है क्योंकि सब लोग परमेश्वर के अंश है।

 

 

 

 

इस संसार में प्रत्येक मनुष्य अपने-अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए और अपनी वस्तुओ की रक्षा के लिए कर्म करता है किन्तु कोई मनुष्य बिना स्वार्थ के कर्म नहीं करता। वह स्वार्थ आत्मकेंद्रित हो या व्यापक।

 

 

 

 

शरीर के अंग पूरे शरीर के लिए ही कार्य करते है। शरीर के अंग शरीर तुष्टि के लिए कार्य करते है न कि अपनी तुष्टि के लिए। इसी तरह से जीव जब अपनी तुष्टि के लिए नहीं परब्रह्म की तुष्टि के लिए कार्य करता है तब वह पूर्ण सन्यासी या पूर्णयोगी होता है।

 

 

 

 

कभी-कभी सन्यासी सोचते है कि उन्हें सारे कार्यो से मुक्ति प्राप्त हो गई अतः वह अग्निहोत्र यज्ञ करना देते है लेकिन वह स्वार्थी होते है। उनका कार्य तो निराकार ब्रह्म से तादात्म अस्थापित करना होता है।

 

 

 

 

जो योगी समस्त कर्म बंद करके अर्ध निमीलित नेत्रों से योगाभ्यास करता है वह ही आत्म संतुष्टि की इच्छा से से पूरित होता है। ऐसी इच्छा भौतिक इच्छा से तो श्रेष्ठ है किन्तु स्वार्थ से रहित कदापि नहीं होती है।

 

 

 

 

कृष्ण भावना भवित व्यक्ति को कभी भी आत्मसंतुष्टि की इच्छा नहीं होती है किन्तु कृष्ण भावना भावित व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के पूर्ण ब्रह्म की तुष्टि के लिए कर्म करता है। उसक एक मात्र लक्ष्य कृष्ण की प्रसन्नता होता है। उसे ही पूर्ण योगी या पूर्ण सन्यासी कहा जाता है।

 

 

 

 

त्याग के सर्वोच्च प्रतीक भगवान चैतन्य प्रार्थना करते है – हे सर्व शक्तिमान प्रभु ! मुझे न तो धन संग्रह की की कामना है, न ही मुझे अनुयायियों की कामना है। मैं तो जन्म जन्मांतर आपकी प्रेमाभक्ति की अहैतुकी कृपा का अभिलाषी हूँ।

 

 

 

 

Note- हम कॉपीराइट का पूरा सम्मान करते हैं। इस वेबसाइट Pdf Books Hindi द्वारा दी जा रही बुक्स, नोवेल्स इंटरनेट से ली गयी है। अतः आपसे निवेदन है कि अगर किसी भी बुक्स, नावेल के अधिकार क्षेत्र से या अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो आप हमें [email protected] पर सूचित करें। हम निश्चित ही उस बुक को हटा लेंगे। 

 

 

 

 

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