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Rigveda Samhita In Hindi Pdf / ऋग्वेद संहिता इन हिंदी Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Rigveda Samhita In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Rigveda Samhita In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  ऋग्वेद भाष्य हिंदी Pdf भी डाउनलोड कर सकते हैं।

 

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Rigveda Samhita In Hindi Pdf / ऋग्वेद संहिता इन हिंदी पीडीएफ

 

 

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Rigveda Samhita In Hindi Pdf
ऋग्वेद भाष्य हिंदी Pdf
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Rigveda Samhita In Hindi Pdf
ऋग्वेद संहिता इन हिंदी Pdf Download
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Rigveda Samhita In Hindi Pdf
यहाँ से ऋग्वेद मंडल 8 Pdf Download करें।
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Rigveda Samhita In Hindi Pdf
ऋग्वेद संस्कृत Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

1- वह करुणा की नदी इतनी बढ़ी हुई है कि उसके जो ज्ञान वैराग्य रूपी किनारे है उनको डुबाते हुए जा रही है। शोक भरे वचन नद और नाले है।

 

 

 

 

जो इस नदी मे मिलते है और सोच की लंबी आहे (सांस) ही वायु के झोको से उठने वाली तरंगे है जो धैर्य रूपी किनारे के उत्तम वृक्षों को तोड़ रही है।

 

 

 

 

2- भयानक विषाद और शोक ही उस नदी की तेज धारा है। भय, भ्रम और मोह ही उसके असंख्य भंवर है। विद्वान मल्लाह है और विद्या ही बड़ी नाव है।

 

 

 

 

परन्तु वह लोग विद्या रूपी नाव को चलाने में असमर्थ है। उन्हें विद्या रूपी नाव चलाने के लिए सही दिशा का ज्ञान (अटकल) नहीं मिल रहा है।

 

 

 

 

3- वन में विचरने वाले कोल ही बिचारे वह यात्री है। जो उस नदी को देखकर हृदय में हारकर थक गए, वह करुणा की नदी, आश्रम के समुद्र में जाकर मिली तो मानो वह समुद्र अकुलाकर खौल उठा।

 

 

 

 

4- दोनों राज समाज शोक से व्याकुल हो गए। किसी को न ज्ञान ही था, न धीरज न लाज ही रही। राजा दशरथ जी के रूप, गुण और शील की सराहना करते हुए सब लोग रो रहे है और शोक समुद्र में डुबकी लगा रहे है।

 

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

शोक के समुद्र में डुबकी लगाते हुए सभी स्त्री-पुरुष यहां व्याकुल होकर सोच कर रहे है। वह सभी विधाता को दोष देते हुए कह रहे है कि विधाता ने प्रतिकूल होकर यह क्या कर दिया?

 

 

 

 

तुलसीदास जी कहते है कि देवता, सिद्ध, तपस्वी, योगी और मुनिगणों में कोई भी समर्थ नहीं है जो उस समय विदेह (जनकराज) की दशा को देखकर प्रेम की नदी को पार कर सके अथवा प्रेम में मगन हुए बिना रह सके।

 

 

 

 

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