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Rigved Sanskrit Pdf / ऋग्वेद संस्कृत Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Rigved Sanskrit Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Rigved Sanskrit Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  ऋग्वेद इन हिंदी Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Rigved Sanskrit Pdf / ऋग्वेद संस्कृत पीडीएफ

 

 

ऋग्वेद संस्कृत पीडीऍफ़ डाउनलोड 

 

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Rigved Sanskrit Pdf
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अथर्व वेद इन हिंदी पीडीऍफ़ डाउनलोड

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

देवताओ का मत सुनकर देव गुरु बृहस्पति जी ने कहा अच्छा विचार किया, तुम्हारे बड़े भाग्य है, भरत जी के चरणों का प्रेम जगत में समस्त शुभ मंगल का मूल है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- सीता राम जी के सेवक की सेवा सैकड़ो कामधेनु के समान सुंदर है। तुम्हारे मन में भरत जी की भक्ति आयी है तो अब सोच छोड़ दो। विधाता ने बात बना दी है।

 

 

 

 

2- हे देवराज! भरत जी का प्रभाव तो देखो। सहज स्वभाव से ही रघुनाथ जी पूर्ण रूप से भरत जी के वश में है। हे देवताओ! भरत जी को श्री राम जी की परछाई की भांति अनुसरण करने वाला जानकर अपना मन स्थिर करो डरने की बात नहीं है।

 

 

 

 

3- देवगुरु बृहस्पति जी और देवताओ की सम्मति और आपसी विचार और उनका सोच सुनकर अन्तर्यामी प्रभु श्री राम जी को संकोच हुआ। भरत जी ने अपने मन में जाना कि सब बोझ हमारे ऊपर ही है तो अपने हृदय में अनेक प्रकार के विचार करने लगे।

 

 

 

 

4- सब तरह से विचार करके अंत में उन्होंने मन में यही निश्चय किया कि श्री राम जी की आज्ञा में ही अपना कल्याण है। उन्होंने अपना प्रण छोड़कर मेरा प्रण रखा यह बहुत बड़ी कृपा है और स्नेह तथा अनुग्रह है।

 

 

 

 

266- दोहा का अर्थ-

 

 

 

श्री जानकी नाथ जी ने सब प्रकार से हमारे ऊपर अपार अनुग्रह किया है। तदनन्तर भरत जी दोनों भाई कर कमल जोड़कर प्रणाम करके बोले।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- हे स्वामी! हे कृपा के समुद्र! हे अन्तर्यामी! अब मैं अधिक क्या कहूं और क्या कहाऊं? गुरु जी को प्रसन्न और स्वामी जी को अनुकूल जानकर मेरे मलिन मन की कल्पित पीड़ा मिट गयी।

 

 

 

 

2- मैं मिथ्या डर से ही डर रहा था। मेरे सोच की जड़ ही न थी। दिशा भूल जाने पर हे देव! सूर्य का दोष नहीं होता? मेरा दुर्भाग्य माता की कुटिलता, विधाता की टेढ़ी चाल और काल की कठिनता।

 

 

 

 

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