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Rigved Mandal 9 Pdf Download / ऋग्वेद मंडल 9 Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Rigved Mandal 9 Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Rigved Mandal 9 Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  मार्कण्डेय पुराण गीता प्रेस Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Rigved Mandal 9 Pdf / ऋग्वेद मंडल 9 पीडीएफ

 

 

 

 

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Rigved Mandal 9 Pdf Download
ऋग्वेद मंडल 9 Pdf Download 
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Rigved Mandal 9 Pdf
ऋग्वेद इन हिंदी Pdf Download 
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

2- किन्तु संकोची रघुनाथ जी चुप ही रह गए। प्रभु की यह मौन की स्थिति देखकर सारी सभा सोच में पड़ गयी, उसी समय जनक जी के दूत आये, यह सुनकर मुनि वशिष्ठ जी ने उन्हें तुरंत ही बुलवा लिया।

 

 

 

 

3- उन्होंने आकर प्रणाम करते हुए श्री राम जी को देखा। उनका मुनि के जैसा वेश देखकर वह बहुत दुखी हुए। मुनि श्रेष्ठ वशिष्ठ जी ने दूतो से बात पूछी कि राजा जनक का कुशल समाचार कहो।

 

 

 

 

4- यह मुनि का कुशल प्रश्न सुनकर सकुचाते हुए पृथ्वी पर मस्तक नवाकर वह श्रेष्ठ दूत हाथ जोड़कर बोले – हे स्वामी! आपका आदर के साथ पूछना ही, हे गोसाई! कुशल का कारण हो गया।

 

 

 

 

270- दोहा का अर्थ-

 

 

 

नहीं तो हे नाथ! कुशल-क्षेम तो सब कोशल नाथ, दशरथ जी के साथ ही चली गयी। उनके जाने से सारा जगत ही बिना स्वामी के अनाथ हो गया। किन्तु मिथिला और अवध तो विशेष रूप से अनाथ हो गए है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- अयोध्यानाथ जी की गति (दशरथ जी का स्वर्गवास) सुनकर जनकपुर के वासी सभी लोग शोक वश बावले होकर अपनी सुध-बुध भूल गए।

 

 

 

 

उस समय जिन लोगो ने विदेह को शोक मग्न देखा उनमे से किसी को नहीं लगा कि उनका देहाभिमान से रहित नाम विदेह सत्य है क्योंकि देह के अभिमान से शून्य पुरुष को शोकंही होता है।

 

 

 

 

2- रानी की कुचाल सुनकर जनक को कुछ भी सूझ न पड़ा, जैसे मणि के बिना सांप को नहीं सूझता है। फिर भरत जी को राज्य और श्री राम जी को वनवास सुनकर मिथिलेश्वर जनक जी के हृदय में बहुत दुःख हुआ।

 

 

 

 

3- राजा ने मंत्रियों और विद्वानों के समाज से पूछा कि विचार कर कहिए आज इस समय क्या करना उचित है? अयोध्या की दशा समझकर और दोनों प्रकार से असमंजस जानकर किसी ने भी ‘चलिए या रहिए’ कुछ नहीं कहा।

 

 

 

 

 

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