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Reema Bharti Upanyas Pdf / रीमा भारती हिंदी उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Reema Bharti Upanyas Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Reema Bharti Upanyas Pdf Download कर सकते हैं और यहां से आखिरी गोली नावेल Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Reema Bharti Upanyas Pdf Free

 

 

 

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साढ़े सात करोड़ उपन्यास Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

विवेक और नरेश आठ बजते ही कुंवर कन्हैया सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँच गए थे। इन दोनों का सातवा आठवा नंबर था। क्लर्क के ऑफिस में सबके फॉर्म और अंक पुस्तिका जमा कर दिया गया उसके साथ ही प्रत्येक से चार्ज रूप में दो-दो हजार रुपया लेकर एक छोटी सी पर्ची प्रधानाचार्य की मुहर लगी हुई सबको वितरित की जा रही थी।

 

 

 

जो इस बात की पहचान थी कि छात्र का नाम लिख लिया गया है और उसे इस विद्यालय में पढ़ने का अधिकार प्राप्त हो गया है। विवेक और नरेश दोनों बहुत खुश थे कि उन्हें कोई ज्यादा परेशानी नहीं हुई क्योंकि उनका प्रवेश बहुत ही आसानी से हो गया था।

 

 

 

विवेक ने घर आकर अपने तथा नरेश के लिए कॉपी और किताब की सारी व्यवस्था किया जो सरोज सेवा केंद्र द्वारा ही संभव हो सका था ऐसे ही और विद्यार्थी थे जो सरोज सेवा केंद्र से सहायता प्राप्त करते थे। नरेश और विवेक की पढ़ाई अच्छी चल रही थी।

 

 

 

सरोज सेवा केंद्र से उन्हें दो सायकल की सहायता प्राप्त हो गयी थी उनको अब स्कूल जाने में सहूलियत हो गयी थी। समय तो अपनी मंद गति से आगे चलता रहता है। उसे किसी की परवाह नहीं रहती है लेकिन जो कोई भी समय की परवाह करता है समय उसे भी अपने साथ ही आगे बढ़ाता रहता है।

 

 

 

सभी छात्र पढ़ाई में अपनी योग्यता के अनुसार ही प्रयास करते है ज्यों ही वार्षिक परीक्षा की सूचना मिली तब से सभी छात्रों की विशेष सक्रियता भी बढ़ गयी। सुधीर और रजनी भी अपनी तैयारी में व्यस्त थे। समय पर ही सबकी परीक्षा हुई।

 

 

 

नरेश विवेक ग्यारहवीं के छात्र थे। सुधीर नवी कक्षा में पढ़ता था लेकिन रजनी दसवीं में पढ़ती थी और उसकी परीक्षा बोर्ड द्वारा होनी थी। परीक्षा के बाद एक महीने की छुट्टी थी। सभी छात्र छुट्टी का आनंद ले रहे थे। वह समय भी आ गया जब दसवीं का परीक्षा फल घोषित होना था।

 

 

 

नरेश को उम्मीद थी कि रजनी इस बार भी दूसरे नंबर पर ही रहेगी। वह अनमने ढंग से रजनी का परीक्षा फल देखने चला गया। परीक्षफल बोर्ड द्वारा अखबारों में निकल चुका था। लेकिन उसमे रजनी का रोल नंबर कही नहीं था। तभी नरेश जिला के प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची देखा तो उछल ही पड़ा।

 

 

 

वहां तो सिर्फ एक ही रोल नंबर था और वह रोल नंबर केवल रजनी का था। नरेश को अपनी आँखों पर विश्वास हुआ ही नहीं था फिर भी वह एक अख़बार को खरीद लिया और घर चला आया। सुधीर अपनी कक्षा में सबसे ज्यादा नंबर लेकर प्रथम आया था।

 

 

 

स्कूल में सभी छात्र एक दूसरे से पूछ रहे थे कि हमेशा दूसरे स्थान पर रहने वाला सुधीर कैसे सारे छात्रों को छोड़ता हुआ एक नम्बर पर आ गया? तभी एक छात्र ने कहा शायद इस बार उसने विशेष रूप से तैयारी किया था क्योंकि अगले साल दसवीं की परीक्षा देना है।

 

 

 

यही तैयारी उसे दसवीं में सफल बनाएगी। नरेश अख़बार लेकर सीधा विवेक के घर गया और बोला विवेक भाई! रजनी का परीक्षाफल तो देखो। इसबार रजनी ने पूरे जिला में पहला स्थान प्राप्त किया है। विवेक खुश होकर अख़बार देखने लगा तो उसे रजनी का रोल नंबर कही दिखाई नहीं दिया।

 

 

 

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