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Ranu Novel in Hindi Pdf / बंद होंठ उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ranu Novel in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ranu Novel in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Shagun Sharma Novel in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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Ranu Novel in Hindi Pdf Download

 

 

 

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Ranu Novel in Hindi Pdf
बंद होठ हिंदी उपन्यास यहां से डाउनलोड करे।
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Ranu Novel in Hindi Pdf
जलते आंसू हिंदी नॉवेल यहां से डाउनलोड करे।
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Shagun Sharma Novel in Hindi Pdf
मैं कौन हूँ हिंदी नॉवेल यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

समय बीत रहा था विवेक और नरेश पढ़ाई करते हुए दसवीं कक्षा में पहुँच गए थे। सुधीर भी पांचवी पास करके कक्षा 6 में पहुँच गया था। नरेश की बहन अभी पांचवी में ही पढ़ रही थी।

 

 

 

 

उसे अपने पैतृक व्यवसाय में ज्यादा ही रुचि थी लेकिन किसी भी व्यवसाय में हुनर के साथ ही पढ़ाई की भी आवश्यकता होती है और पढ़ाई से ही बुद्धि का विकास होने से कोई भी अपनी मन पसंद की कार्य शैली को अच्छे तरीके से कर सकता है।

 

 

 

 

अगर पढ़ाई के साथ मन पसंद कार्य करने की शैली बन जाय तो वह सोने पर सुहागा हो जाती है। देहात या शहर दोनों जगह पर मध्यम वर्ण अपने-अपने सपने को पूर्ण करने में असमर्थ हो जाते है कोई विरला ही नसीब वाला होता है जो अपने सपने को पूर्ण करने में सफल होता है।

 

 

 

 

रजनी पढ़ाई से जो जी चुराती थी लेकिन उसे अपने पिता के साथ ही मिट्टी के खिलौने और बर्तन बनाने में बहुत आनंद प्राप्त होता था। उसके बनाये हुए बर्तन और खिलौने बाजार में अच्छे भाव से हाथो हाथ बिक जाते थे। रजनी पढ़ाई से जी चुराती थी।

 

 

 

 

लेकिन वह जितना भी पढ़ती थी वह तन्मयता के साथ और उसका परिणाम भी शत प्रतिशत आता था। सुधीर नरेश के घर आता जाता था और रजनी से इतना घुल मिल गया था कि पानी में शक्कर? वह रजनी को दीदी कहता था और उससे बर्तन और खिलौने बनाने की कला सीखता था।

 

 

 

 

रजनी भी सुधीर को बहुत विश्वास के साथ ही खिलौने बनाने की कला सिखाती थी। सुधीर रजनी से कहता – दीदी मैं बड़ा होकर खिलौने बनाने की कम्पनी लगाऊंगा जिससे हम लोग धनवान हो जायेंगे और उस कम्पनी का मालिक मैं आपको बनाऊंगा जिसमे दो-तीन सौ आदमी काम करेंगे।

 

 

 

 

रजनी बोली – लेकिन उस कम्पनी में तुम कहां होंगे। सुधीर बोला – मैं उस कम्पनी की देख-भाल करूँगा यानी तुम मैनेजर रहोगे उस कम्पनी के हां मैं उस कम्पनी का मैनेजर बनूंगा। इतना कहते ही ख़ुशी में उछल पड़ा जिससे उसके हाथ में पकड़ा हुआ मिट्टी का घोडा छूट कर गिर गया और उसकी दोनों टांगे टूट गयी। .

 

 

 

 

सुधीर उदास हो गया तभी रजनी ने उसे दूसरा घोड़ा लाकर दे दिया। लेकिन सुधीर उस टूटे हुई घोड़े को देखकर कुछ सोच रहा था रजनी ने पूछा क्या हुआ सुधीर? कुछ नहीं दीदी कुछ तो है तुम बता नहीं रहे हो। तुम हमारे मुंह बोले छोटे भाई हो मैं तुम्हारे मन की हलचल समझ रही हूँ।

 

 

 

 

अच्छा तो बताओ मैं क्या सोच रहा हूँ। रजनी ने कहा – तुम यह सोच रहे हो कि इस टूटे हुए घोड़े को फिर इस तरह से बनाया जाय कि इसकी पूरी कीमत मिले साथ ही खरीदने वाले का नुकसान भी न हो क्यों यही बात है न। सुधीर बोला – हां ठीक यही बात मैं सोच रहा था लेकिन आपको कैसे पता?

 

 

 

 

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