Ramayan Ka Yuddh Kitne Din Tak Chala ? Janiye Sahi Uttar

मित्रो इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे है कि Ramayan Ka Yuddh Kitne Din Tak Chala ? उसका सही उत्तर क्या है ? तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें।

 

 

 

Ramayan Ka Yuddh Kitne Din Tak Chala ?

 

 

 

 

 

 

 

रामायण का युद्ध राम-रावण के बीच में लड़ा गया धर्म युद्ध है। यह असत्य पर सत्य की विजय थी, अधर्म पर धर्म की जीत थी। रामायण का युद्ध आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को शुरू हुआ था और दशहरे के दिन अर्थात दशमी को समाप्त हुआ था। इसीलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है। रामयण का युद्ध पुरे 8 दिन तक चला था। परन्तु वाल्मीकि रामायण के अनुसार रामायण का युद्ध 84 दिनों तक चला था।

 

 

रावण के पास कितनी सेना थी?

 

 

 

रावण के पास 72 करोड़ की सेना थी। भगवान श्री राम जी ने वानर सेना के साथ रावण की सम्पूर्ण सेना का नाश कर दिया।

 

 

 

रावण की सेना में सबसे शक्तिशाली योद्धा कौन था?

 

 

रावण की सेना में एक से बढ़कर एक योद्धा थे। सभी परम शक्तिशाली, मायावी और तेजस्वी थे, परन्तु मेघनाद उनमे से सबसे शक्तिशाली था। मेघनाद ने इंद्रदेव को परास्त किया था, इसीलिए उसे इंद्रजीत भी कहा जाता है।

 

 

 

त्रिजटा किसकी पुत्री थी?

 

 

इस बात का वर्णन रामायण में नहीं मिलता है कि त्रिजटा किसकी पुत्री थी , लेकिन कई जगहों पर लिखा गया है कि त्रिजटा विभीषण की पुत्री थी और उनकी माँ का सरमा था। हांलाकि इसके कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते है।

 

 

 

रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?

 

 

रावण तीनो लोको पर विजय पाना चाहता था। वह अहंकार के नशे में चूर था। इसी विषय में वह यमलोक भी पहुँच गया और वहां पर यमराज और रावण में महाभयंकर युद्ध शुरू हुआ। अंत में यमराज ने रावण पर कालदण्ड का प्रयोग करना चाहा जिसका वार खाली नहीं जाता है, पर ब्रह्मदेव ने उन्हें रोक दिया क्योंकि रावण की मृत्यु किसी देव के हाथ नहीं लिखी थी।

 

 

 

भगवान श्री राम के पुत्र लव और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?

 

 

 

अयोध्या के मंत्री सुमंत का स्वर्गवास हो गया परन्तु विद्वान पंडितो द्वारा देखने पता चला कि उनकी उम्र अभी 9 दिन शेष थी और यमराज के अनुचरो ने 9 दिन पहले ही उन्हें उठा लिया था। इस बात से भगवान श्री राम को बहुत क्रोध आया और उन्होंने यमराज को दंड देने को ठाना।

 

 

 

वह रथ पर सवार होकर यमपुरी की तरफ चले और बीच रास्ते से ही सुमंत को छुड़ा लाये। अब यमदुतो को यह बात बहुत बुरी लगी और वे यमराज के पास जाकर उन्हें धिक्कारने लगे कि वे अपने दूतो की रक्षा नहीं कर पाते।

 

 

 

अब क्या था यमराज को भी क्रोध आ गया और वे मदद मांगने के लिए इंद्र आदि के पास गए, परन्तु भगवान विष्णु जी के अवतार श्री राम जी से कौन युद्ध करे सो कोई देव तैयार ही नहीं हुए। अंत में यमराज ने स्वयं युद्ध का फैसला किया और यमदूतों के साथ अयोध्या को घेर लिया। अयोध्या के घिर जाने पर श्री राम जी ने लव को युद्ध के लिए भेजा।

 

 

 

दोनों के बीच भयंकर युद्ध होने लगा, परन्तु लव के तीखे बाणों से यमदूत बेहोश हो गए। अपनी हार देखकर यमराज ने लव पर यमदण्ड का प्रयोग कर दिया, उसके जवाब में लव ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। ब्रह्मास्त्र के तेज से यमदण्ड समाप्त हो गया और ब्रह्मास्त्र यमराज के पीछे लग गया और यमराज भागने लगे। भागते-भागते वे सूर्यदेव की शरण में गए। सूर्यदेव ने सूर्यवंश की शपथ देकर लव को ब्रह्मास्त्र वापस लेने को कहा।

 

 

 

तब लव ने ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया और यमराज के प्राण बचे। अब यमराज को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसके बाद वे अयोध्या पधारे और भगवान से क्षमा मांगी। लव के इस वीरता से उनका नाम चारो तरफ फ़ैल गया।

 

 

 

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