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Ram Rahim Comics pdf free download / राम रहीम कॉमिक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ram Rahim Comics pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ram Rahim Comics pdf download कर सकते हैं और आप यहां से नागराज और ध्रुव कॉमिक्स Pdf Download कर सकते हैं।

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Ram Rahim Comics pdf Download

 

 

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

घोर असुरो का विनाश करके आप जगत को हमेशा स्वास्थ्य एवं अभय प्रदान करेंगे अथवा यह भी संभव है कि आपके हाथ से कोई भी असुर न मारे जाय क्योंकि आप हमेशा योगयुक्त रहते हुए राग-द्वेष से रहित है तथा एकमात्र दया करने में ही लगे रहते है।

 

 

 

 

 

ईश! यदि वे असुर भी आराधित हो आपकी दया से अनुगृहीत होते रहे तो सृष्टि और पालन का कार्य कैसे चल सकता है। अतः वृषभध्वज! आपको हर रोज सृष्टि आदि के उपयुक्त कार्य करने के लिए उद्यत रहना चाहिए। यदि सृष्टि पालन और संहार रूप कर्म न करने हो तब तो हमने माया से जो अलग-अलग शरीर धार किए है उनकी कोई उपयोगिता ही नहीं है।

 

 

 

 

वास्तव में हम तीनो एक ही है कार्य के भेद से अलग-अलग शरीर धारण करके स्थित है। यदि कार्यभेद न सिद्ध हो तब तो हमारे रूप भेद का कोई प्रयोजन ही नहीं है। देव! एक ही परमात्मा महेश्वर तीन स्वरूपों में अभिव्यक्त हुए है। इस भेद रूप में उनकी अपनी माया ही कारण है।

 

 

 

 

वास्तव में प्रभु स्वतंत्र है। वे लीला के उद्देश्य से ही वे सृष्टि आदि कार्य करते है। भगवान श्रीहरि उनके बाए अंग से प्रकट हुए है मैं ब्रह्मा उनके दाए अंग से प्रकट हुआ हूँ और आप रुद्रदेव उन सदाशिव के हृदय से आविर्भूत हुए है अतः आप ही शिव के पूर्ण रूप है।

 

 

 

 

प्रभो! इस प्रकार अभिन्न रूप होते हुए भी हम तीन रूपों में प्रकट है। सनातनदेव! हम तीनो उन्ही भगवान सदाशिव और शिवा के पुत्र है इस यथार्थ तत्व का आप हृदय से अनुभव कीजिए। प्रभो! मैं और श्रीविष्णु आपके आदेश से प्रसन्नता पूर्वक लोक की सृष्टि और पालन के कार्य कर रहे है तथा कार्य कारणवश सपत्नीक भी हो गए है।

 

 

 

 

अतः आप भी विश्वहित के लिए तथा देवताओ को सुख पहुंचाने के लिए एक परम सुंदरी रमणी को अपनी पत्नी बनाने के लिए ग्रहण करे। महेश्वर! एक बात और है उसे सुनिए, मुझे पहले के वृतांत का स्मरण हो आया है। पूर्वकाल में आपने ही शिवरूप से जो बात हमारे सामने कही थी वही इस समय सुना रहा हूँ।

 

 

 

 

आपने कहा था – ब्रह्मन! मेरा ऐसा ही उत्तम रूप तुम्हारे अंगविशेष ललाट से प्रकट होगा जिसकी लोक में रूद्र नाम से प्रसिद्धि होगी। तुम ब्रह्मा सृष्टिकर्ता हो गए, श्रीहरि जगत का पालन करने वाले और मैं सगुण रुद्ररूप होकर संहार करने वाला होऊंगा।

 

 

 

 

एक ही स्त्री के साथ विवाह करके लोक के उत्तम कार्य की सिद्धि करूँगा। अपनी कही हुई इस बात को याद करके आप अपनी ही पूर्व प्रतिज्ञा को पूर्ण कीजिए। स्वामिन! आपका यह आदेश है कि मैं सृष्टि करूँ, श्रीहरि पालन करे और आप स्वयं संहार के हेतु बनकर प्रकट हो सो आप साक्षात् शिव ही संहारकर्ता के रूप में प्रकट हुए है।

 

 

 

 

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