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Rajvansh Novel in Hindi Pdf / आंसू उपन्यास Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Rajvansh Novel in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Rajvansh Novel in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Shudro ki khoj Pdf कर सकते हैं।

 

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Rajvansh Novel in Hindi Pdf Download

 

 

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Rajvansh Novel in Hindi Pdf
आंसू उपन्यास यहां से डाउनलोड करे।
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Rajvansh Novel in Hindi Pdf
लव स्टोरी By राजवंश हिंदी उपन्यास यहां से डाउनलोड करे।
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Fifty Shades Of Gray in Hindi Pdf
Fifty Shades Of Gray in Hindi Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

मैं तो जन्म से ही यह सब देख रही हूँ तथा इतने सालो से तुम भी यहां आते हो क्या एक बहन अपने भाई के विचारो को पढ़ने में समर्थ नहीं हूँ सकती है। इन सब बातो के बीच में ही रजनी ने घोड़े के दोनों पैर को इतनी सफाई से जोड़ दिया जो देखने में और मजबूती में पहले वाली स्थिति में आ गया थे।

 

 

 

 

सुधीर तो भविष्य की बातो में ही उलझा हुआ था। तभी रजनी बोली – सुधीर यह तुम्हारा घोडा फिर से दौड़ सकता है। सुधीर ने घोड़े को हाथ में लेकर देखा तो उसमे कही भी कमी नहीं दिखाई पड़ती थी सिर्फ उसे रंग लगाना बाकी था। दीदी अब तो आप ही मैनेजर और मालिक दोनों ही बनेंगी फिर वही बात आकर रुक गयी कि तुम उस कम्पनी में क्या करोगे।

 

 

 

 

सुधीर सोच में पड़ गया तभी रजनी ने ककहा तुम ही मैनेजर रहोगे क्योंकि तुम्हे हानि लाभ की बराबर चिंता रहती है। तभी राजीव और मालती दोनों इन बच्चो की बात को सुनते हुए अपना काम कर रहे थे। एक साथ ही बोल उठे – कम्पनी बाद में बनाना पहले समय देखो तुम लोगो के स्कूल जाने का ससमय हो गया है। रजनी और सुधीर हड़बड़ी में तैयार होने के लिए चले गए।

 

 

 

 

सरिता नाम था उस छोटी सी बच्ची का जो अपनी मां की गोद में रोये जा रही थी शायद वह भूख से बेहाल थी और जिसकी गोद में सरिता थी वह तो खुद ही भूख से परेशान लग रही थी। लेकिन अपनी बेटी की क्षुधा की शांति के लिए उसे अपने वक्ष से लगा लेती थी परन्तु उसके जर्जर तन से अमृत की एक भी बूंद नहीं निकलती थी।

 

 

 

 

लेकिन वह बच्ची उसके वक्ष से ऐसे लिपट रही थी उसे बहुत सारा अमृत का खजाना प्राप्त हो गया हो। सायंकाल के पांच बज रहे थे डा. निशा भारती एक ऑटो रिक्शा से अपने घर के लिए निकली थी उनकी नजर अकस्मात ही उस जर्जर तन वाली ऊपर पड़ गयी थी।

 

 

 

 

जिसकी गोद में एक साल की नन्ही बच्ची भूख से बेहाल होकर अपने लिए अपनी मां के वक्ष से अमृत की खोज कर रही थी लेकिन उसे हर बार ही असफल होना पड़ता था। वह बेबस मां भी अपनी मजबूरी पर परेशान थी जो अपनी छोटी सी बच्ची के लिए दो घूंट अमृत को नहीं दे सकती थी।

 

 

 

 

तभी डा. निशा भारती ने ऑटो रिक्शा रुकवा दिया और ड्राइवर को किराया देकर उस दुबली औरत के पास पहुँच गयी और उसका नाम पूछने लगी उसने अपना नाम कोमल बताया था। निशा भारती उस औरत को साथ लेकर मेडिकल की दुकान से दवा दिलाया और उस छोटी बच्ची की उदर पूर्ति के लिए अमृत की व्यवस्था किया।

 

 

 

 

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