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Raj Comics Pdf Download / Nagraj कॉमिक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Raj Comics Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Nagraj Comics Pdf Download Google Drive कर सकते हैं और आप यहां से यार जादूगर pdf download कर सकते हैं।

 

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Raj Comics Pdf / राज कॉमिक्स Pdf

 

 

 

पुस्तक का नाम Raj Comics Pdf
पुस्तक के लेखक राज कॉमिक्स 
भाषा हिंदी 
श्रेणी कॉमिक्स 
फॉर्मेट Pdf
साइज 31.1 MB
पृष्ठ 52

 

 

 

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Raj Comics Pdf
ऑपरेशन सर्जरी Nagraj Comics Pdf Download
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 न्यूमेरो ऊनो राज कॉमिक्स pdf
न्यूमेरो ऊनो राज कॉमिक्स pdf download
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मम्बर pdf
मम्बर राज कॉमिक्स Pdf Download
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शरणकाण्ड pdf
शरणकाण्ड (चतुर्थ खण्ड ) राज कॉमिक्स Pdf Download
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ज़हरीला बारूद
ज़हरीला बारूद राज कॉमिक्स Pdf Download
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हरी मौत Pdf
हरी मौत राज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज हरण काण्ड (तृतीय खण्ड)
नागराज हरण काण्ड(तृतीय खण्ड) राज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज ग्रहण काण्ड (द्वितीय खण्ड)
नागराज ग्रहण काण्ड (द्वितीय खण्ड) राज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज वरण काण्ड (प्रथम खण्ड)
नागराज वरण काण्ड (प्रथम खण्ड) राज कॉमिक्स Pdf Download
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महायुद्ध नागराज, राज कॉमिक्स हिंदी पीडीऍफ़
महायुद्ध नागराज, राज कॉमिक्स हिंदी पीडीऍफ़ Download
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नागराज और बौना शैतान, राज कॉमिक्स हिंदी पीडीऍफ़
नागराज और बौना शैतान, राज कॉमिक्स हिंदी पीडीऍफ़ Download
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये Raj Comics Pdf Free Download

 

 

 

इस उत्तर से रचना और प्रिया दोनों हंसने लगी लेकिन रचना की हंसी बेजान थी। एक दिन ऑफिस में कार्य करते हुए कार्तिक रचना और प्रिया की फ़ाइल का निरीक्षण कर रहा था उसी समय प्रिया बोली कार्तिक जी आपके माता-पिता गांव से अभी आये नहीं है तो आपके लिए भोजन की व्यवस्था कहाँ से होती है।

 

 

 

 

कार्तिक बोला हमारी भोजन की समस्या भोजनालय से खत्म हो जाती है। आप कहे तो हम आपकी सहायता कर सकते है प्रिया कार्तिक से बोली थी।

 

 

 

रचना ने उसे चुप रहने का इशारा किया लेकिन वह कहाँ मानने वाली थी। कार्तिक बोला आप लोग हमारे भोजन की समस्या कैसे खत्म कर सकती है?

 

 

 

प्रिया बोली हर औरत जन्मजात ही व्यवस्थापक होती है वह अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण करने के लिए उचित रूप से प्रबंध और व्यवस्था कर लेती है जिसका उदाहरण आप हम लोगो को देख रहे है प्रिया के इस अकाट्य तर्क से कार्तिक निरुत्तर हो गया था जबकि रचना को प्रिया का इतना बोलना बहुत ही खराब लग रहा था। उसे यह नहीं पता था कि प्रिया उसके लिए ही रास्ता तैयार कर रही है।

 

 

 

प्रभा बोली ठीक तो है जो अपना घर बनवा लेंगे क्योंकि यहां तो सभी के घर खंडहर बन चुके है। बिरजू बोला उन्होंने अपने घर के साथ-साथ हमारा भी घर बनवाने के लिए कह दिया है और जानती हो उन्होंने दोनों घर के लिए कितना बजट बनाया है।

 

 

 

प्रभा बोली जरा हमे भी तो बताओ उन्होंने कितना बजट बनाया है मैं इसलिए पूछ रही हूँ कि एक घर बनवाने में ही किसी को भी पसीना आ जाता है तो भी उन्होंने दो बनाने की की बात कही है। बिरजू बोला पराग भाई ने दो मकान बनाने के लिए पचास लाख का बजट रखा है।

 

 

 

अगर जरूरत पड़ी तो बजट और भी बढ़ा सकते है और इस सभी कार्य की जिम्मेदारी उन्होंने हमे ही सौप दिया है हमारे खेती और गाय के लिए कोई व्यवधान पैदा न होने पाए इसलिए उन्होंने मुझे अपने लिए एक नौकर भी रखने के लिए कह दिया है।

 

 

 

मैं आज ही अपने गांव के बगल से एक आदमी लेकर आऊंगा जो हमारी खेती और गाय की देखभाल करेगा। यह सब सुनकर प्रभा को विश्वास नहीं हो रहा था वह बोली यह तो किसी सपने जैसा लग रहा है।

 

 

 

बिरजू बोला अभी तो सपना है लेकिन यह जल्द ही सच्चाई बन जायेगा क्योंकि मैं अभी जाकर रामचरन राज मिस्त्री से मकान के ठेके को लेकर बात करूँगा और वह राज मिस्त्री रामचरन के पास चला गया।

 

 

 

लेकिन तुम हमारी मानती कहा हो। ठीक है आगे से ध्यान रखूंगी बाबा। उस लड़की का नाम अब कार्तिक के सामने जाहिर हो गया था। वह कुत्ते की मरहम पट्टी करने लगी। कार्तिक बोला – क्या आप डाक्टर है? नहीं, लड़की ने उत्तर दिया।

 

 

 

कार्तिक बोला – क्या आप बैंक मैनेजर है? लड़की ने हां कहा, क्या आप भिखारी बनकर भीख मांगती है अब तो इस हकीकत पर भी हां कहना पड़ा। लेकिन भिखारी और और भीख की असलियत पर रचना के चेहरे का रंग बदलने लगा।

 

 

 

कार्तिक बोला – आप मुझे जासूस मत समझिए हमारे पास इस कार्य के लिए समय नहीं है। आपका नाम तो उस महाशय ने बताया जिन्हे आपने बाबा कहा था। चार दिन पहले आपने जो कार्ड दिखाया था उसपर ही बैंक मैनेजर चितपुर ब्रांच लिखा हुआ था और आपसे सिग्नल पर मुलाकात एक भिखारी के रूप में हुई थी।

 

 

 

इतना कहते हुए कार्तिक वहां से अपनी कम्पनी के लिए चला गया। वहां पहुंचकर डा. भुवन मुखर्जी को फोन पर बताया कि वह घायल हो गया है।

 

 

 

डा. मुखर्जी तुरंत ही कार्तिक के कम्पनी में आकर उसकी मरहम पट्टी करने लगे। कार्तिक ने डा. भुवन मुखर्जी से पूछा – अंकल आप तो यही के रहने वाले है ना।

 

 

 

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