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पूस की रात कहानी Pdf / Poos Ki Raat Kahani Premchand pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Poos Ki Raat Kahani Premchand pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Poos Ki Raat Kahani Premchand pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Setu Abhyaskram Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Poos Ki Raat Kahani Premchand pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम  Poos Ki Raat Kahani Premchand Pdf
पुस्तक के लेखक  प्रेमचंद
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  1 Mb 
पृष्ठ 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  कहानी 

 

 

 

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Poos Ki Raat Kahani Premchand Pdf
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यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

पूस की रात समरी 

 

 

 

यह लेखक द्वारा लिखी गयी बहुत ही मार्मिक कहानी है लेखक ने अपनी कहानी के पात्र के जीवन को बहुत ही मार्मिक अंदाज में लिखा है। इस कहानी के पात्र की मजबूरी पढ़ने वाले की संवेदनाओ को जगाती है।

 

 

 

हल्कू और उसकी पत्नी कोई भी काम करके जितने भी पैसे लाते थे। उस पैसे का अधिकांश भाग उधार देने में चला जाता है क्योंकि उधार के पैसे पर इतनी अधिक ब्याज दर कि हल्कू को लगता है वह पूरा कर्ज नहीं चुका पायेगा। अँधेरी और बेहद सर्द रात में हल्कू अपने खेत की रखवाली के लिए पहुंच जाता है।

 

 

 

वह खोई से बनी हुई छप्पर के नीचे एक खाट पर बैठ जाता है। उसकी खाट के नीचे उसका कुत्ता जबरा पड़ा है जो रात की ठंडी लहरों के कारण रो रहा है उसका चुप करना मुश्किल है। वह मनुष्य और पशु के बीच के सारे भेदो को भूलकर कुत्ते को अपने बिस्तर पर बुलाता और उसे गले लगाता है।

 

 

 

हल्कू को थोड़ी गर्मी मिलती है लेकिन जल्द ही कुत्ते को खेत में किसी की आहट महसूस होती है और वह खेत में दौड़ते हुए भौकने लगता है।

 

 

 

हल्कू को अचानक याद आता है कि उनके खेत से कुछ दूरी पर आम का बाग़ है और वहां पर आम के सूखे पत्ते है तो वह हल्की मसूर की फसल से एक झाड़ू तैयार करता है और गिरे हुए पत्तो के ढेर को इकट्ठा कर देता है और उसमे आग लगाता है।

 

 

 

आग लगने के बाद वह कुत्ते को आग के पास पकड़कर लाता है। सुबह होते ही सूरज की तेज किरणे जब गांव को चारो ओर से ढक लेती है तब हल्कू को उसकी पत्नी से जगाया जो उसे लापरवाही के लिए रोते हुए डांट रही है। हल्कू के कुछ समझ में आने से पहले नील गाय ने खेत को नष्ट कर दिया था।

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

सुमन परी ज्योति स्वरूपा से बोली – तुम्हे हमारा नृत्य कैसा लगा? ज्योति स्वरूपा के रूप में मिलन बोला – जिंदगी में पहली बार आज मैंने तुम्हारा नृत्य देखा वह भी एक बेजोड़, अद्भुत, अनुपम। सुमन परी बोली – हमारी प्रशंसा के लिए धन्यवाद।

 

 

 

लेकिन यह कितनी बिडंबना है। हम साथ रहते हुए भी बहुत दूर है हमारे मध्य यह ज्योति स्वरूपा आ गयी है क्या परीलोक में मिलन हमारे समीप नहीं रह सकता है? मिलन जो सुमन के समक्ष ज्योति स्वरूपा की स्थिति में था वह बोला – तुमने ही कहा था इस परीलोक में मनुष्य नहीं जा सकता है।

 

 

 

तुम्हे किन्नर स्वरुप में ही परीलोक में रहना होगा और मैं इस परीलोक में तुम्हारे कहने के अनुसार ही किन्नर का स्वरुप धारण किया है। सुमन परी ज्योति स्वरूपा से बोली – क्या मुझे अब मिलन को देखना संभव नहीं है? ज्योति स्वरूपा ने सुमन परी से कहा – मिलन को देखना इस परीलोक में भी तुम्हारे लिए संभव है।

 

 

 

लेकिन एक निश्चित अवधि के लिए तुम्हारी इच्छा होने पर। ज्योति स्वरूपा बोली – बहुत रात्रि हो चुकी है अब हमे विश्राम करना चाहिए। सुमन के साथ ही ज्योति स्वरूपा विश्राम करने लगी। ज्योति स्वरूपा की आँखों में निद्रा का अभाव था। उसने इस समय का उपयोग अपनी शक्तियों से वार्ता करने में लगा दिया।

 

 

 

चंदन की लकड़ी बोली – स्वामी! आपको किसी प्रकार की आवश्यकता होने पर हमे आज्ञा प्रदान कीजिए। स्वर्ण अंगूठी बोली – हम आपके लिए किसी भी असंभव कार्य को संभव कर सकते है मत्स्य पत्थर और कच्छप दोनों एक साथ बोले – हम लोग सिर्फ प्रकृति के बनाये हुए नियम का पालन करते है अन्यथा हम किसी भी नियम को मानने के लिए बाध्य नहीं है।

 

 

 

ज्योति स्वरूपा के रूप में मिलन बोला – हमे तुम लोगो की शक्तियों पर गर्व है। तुम लोग इस परीलोक में मुझे इस भवन में एक निश्चित अवधि के लिए मिलन का रूप प्रदान कर सकते हो। मत्स्य पत्थर और कच्छप बोले – हां एक निश्चित अवधि पुनः अपना पूर्ववत स्वरुप प्राप्त कर सकते हो।

 

 

 

हम लोग अपनी शक्ति से ऐसी व्यवस्था उत्पन्न कर देंगे कि आपको सबेरे के चार घंटो तक मिलन के रूप में रहना संभव हो जायेगा। उसके पश्चात आपको ज्योति स्वरूपा का रूप ग्रहण करना पड़ेगा क्योंकि इस परीलोक के नियम के अनुसार यहां सिर्फ परियां रहती है या फिर किन्नर अन्य किसी के लिए रहना कदापि संभव नहीं है।

 

 

 

मनुष्य के लिए तो बिलकुल नहीं? शक्तियों से वार्तालाप के मध्य मिलन निद्रा देवी के पास चला गया। सुबह हो गयी भवन के अंदर तक ऐसी व्यवस्था बन गयी थी कि बाहर से किसी परी या रानी परी या फिर स्वयं महारानी कुमुद स्वयं क्यों आये उसे चार घंटे तक ज्योति स्वरूपा नींद में ही नजर में आएगी।

 

 

 

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