Police Verification Form Pdf Hindi / पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म पीडीएफ

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Police Verification Form Pdf देने जा रहे हैं। आप नीचे की लिंक से Police Verification form Download कर सकते हैं।

 

 

 

 

Police Verification Form Pdf / पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म Pdf 

 

 

 

 

 

 

Police Verification Form Pdf Free Download 

 

 

 

आप पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म ऊपर की लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं और अब जानते हैं कि इस फॉर्म के साथ किन – किन दस्तावेज की आवश्यकता होगी।

 

 

 

1 – पासपोर्ट

2 – Application Receipt

3 -Address proof (Current)

4 – बिजली बिल

5 – आधार कार्ड

6 – निर्वाचन कार्ड

7 – बैंक पासबुक

8 – रेंट अग्रीमेंट

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए 

 

 

 

भगवान भौतिक प्रकृति परे दिव्य रूप है – कृष्ण कहते है कि मनुष्य को चाहिए कि परम पुरुष का ध्यान, सर्वज्ञ, पुरातन, नियंता, लघुतम से भी लघुतर, प्रत्येक का पालन कर्ता, समस्त भौतिक बुद्धि से परे नित्य तथा अचिन्त्य पुरुष के रूप में करे। वे सूर्य की तरह तेजवान है और इस भौतिक प्रकृति से परे, दिव्य रूप है।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य –  यहां पर परमेश्वर के चिंतन की विधि का वर्णन हुआ है। सबसे प्रमुख बात यह है कि वे निराकार या शून्य नहीं है। ईश्वर की शक्ति हमारी कल्पना या विचार शक्ति से परे है इसलिए ही अचिन्त्य कहलाती है।

 

 

 

परमेश्वर अपनी अचिन्त्य शक्ति के द्वारा इन समस्त विशाल लोको तथा आकाश गंगाओ को धारण किए हुए है इस बात का खंडन कौन कर सकता है?

 

 

 

वह इस भहुतिक जगत में व्याप्त है फिर भी इससे परे है। हम इसी भौतिक जगत को ठीक-ठीक नहीं समझ पाते है जो आध्यात्मिक जगत की तुलना में नगण्य है तो फिर हम कैसे जान सकते है कि इसके परे क्या है?

 

 

 

 

कोई राम का चिंतन करे या कृष्ण का वह जिस तरह के है उसका वर्णन भगवद्गीता में किया गया है। कोई निराकार या शून्य का चिंतन कैसे कर सकता है?

 

 

 

 

यह अत्यंत ही कठिन है किन्तु कृष्ण के चिंतन की विधि अत्यंत सुगम है और तथ्य रूप में यहां वर्णित है। पहली बात तो यह है कि भगवान पुरुष है हम राम तथा कृष्ण को पुरुष के रूप में सोचते है।

 

 

 

 

भगवान कवि अर्थात वे भूत वर्तमान तथा भविष्य के ज्ञाता है। अतः वे सब कुछ जानने वाले है वे प्राचीनतम पुरुष है क्योंकि वही समस्त वस्तुओ के उद्गम है प्रत्येक वस्तु उन्ही से ही उत्पन्न है।

 

 

 

 

अचिन्त्य का अर्थ है इस भौतिक जगत से परे जिसे हमारा तर्क नीति शास्त्र तथा दार्शनिक चिंतन छू भी नहीं सकता जो अकल्पनीय है। भगवान ब्रह्माण्ड के परम नियंता भी है।

 

 

 

 

वह मनुष्यो के पालक तथा शिक्षक है। वह अणु से भी सूक्ष्म है, जीवात्मा बाल के अग्रभाग के दस हजारवें अंश के बराबर है किन्तु भगवान अचिन्त्य रूप से इतने लघु है कि वह इस अणु के भी हृदय में भी प्रविष्ट रहते है।

 

 

 

 

इसलिए वह लघुतम से भी लघुतर कहलाते है। परमेश्वर के रूप में वह परमाणु में तथा लघुतम के भी हृदय में प्रवेश कर सकते है और परमात्मा के रूप में उसका नियंत्रण करते है।

 

 

 

 

इतना लघु होते हुए भी वह सर्वव्यापी है और सवो का पालन करते है, उनके द्वारा ही सभी लोको का धारण होता है अर्थात सभी लोको पर उनका ही नियंत्रण रहता है और हम सभी को आश्चर्य होता है कि इतने विशाल लोक किस प्रकार से वायु में तैर रहे है।

 

 

 

 

अतः बुद्धिमान मनुष्यो को चाहिए कि व्यर्थ के तर्को तथा चिंतन से दूर रहकर वेदो भगवद्गीता तथा भागवत जैसे शास्त्रों में जो कुछ भी कहा गया है उसे स्वीकार कर ले और उनके द्वारा सुनिश्चित किए गए नियमो का पालन करे, इससे ही ज्ञान प्राप्त हो सकेगा।

 

 

 

 

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