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Patanjali Yog Book In Hindi Pdf / पतंजलि योग बुक इन हिंदी Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Patanjali Yog Book In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Patanjali Yog Book In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Ayurveda Books Pdf Hindi भी डाउनलोड कर सकते हैं।

 

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Patanjali Yog Book In Hindi Pdf / पतंजलि योग बुक इन हिंदी पीडीएफ

 

 

 

 

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Patanjali Yog Book In Hindi Pdf
यहां से पतंजलि योग बुक इन हिंदी पीडीऍफ़ डाउनलोड करे।
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Ayurveda Books Pdf Hindi
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पतंजलि योग दर्शन गीता प्रेस पीडीएफ डाउनलोड 
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बच्चों के लिए योग शिक्षा पीडीऍफ़ डाउनलोड 
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

श्री राम जी और सीता जी तो सबके हृदय की बात जानने वाले है और आप सर्वज्ञ तथा सुजान है। यदि आप यह सत्य कह रहे है तो हे नाथ! आप अपने वचन को प्रमाण कीजिए और उसके अनुसार ही व्यवस्था कीजिए।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- भरत के वचन सुनकर और उनका प्रेम देखकर सारी सभा सहित मुनि वशिष्ठ जी विदेह हो गए, किसी को भी अपनी देह की सुधि न रही। भरत जी महान महिमा समुद्र है, मुनि की बुद्धि उसके तट पर अबला स्त्री के समान खड़ी है।

 

 

 

 

2- वह उस समुद्र के पार जाना चाहती है, इसके लिए उसने हृदय में उपाय भी ढूंढे। पर उसे पार जाने का साधन नाव, जहाज या बेडा कुछ भी नहीं पाता। भरत जी की बड़ाई और कौन कर सकता है? तलैया की सीप में भी कही समुद्र समा सकता है?

 

 

 

 

3- मुनि वशिष्ठ जी की अंतरात्मा में भरत जी बहुत अच्छे लगे और वह समाज सहित श्री राम जी के पास आये। प्रभु श्री राम जी ने प्रणाम करके उन्हें उत्तम आसन दिया। सब लोग मुनि की आज्ञा सुनकर बैठ गए।

 

 

 

 

4- श्रेष्ठ मुनि देश काल और अवसर के अनुसार विचार करते हुए वचन बोले। हे सर्वज्ञ! हे सुजान! हे धर्म, नीति, गुण और ज्ञान के भंडार राम! सुनिए।

 

 

 

 

257- दोहा का अर्थ-

 

 

 

आप सबके हृदय के भीतर बसते है और सबके भले-बुरे भाव को जानते है। जिसमे पुरवासियों का माताओ का भरत का हित हो वही उपाय बतलाइये।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- आर्त (दुखी) लोग कभी विचार कर नहीं कहते। जुआरी को अपना ही दाव सूझता है। मुनि का वचन सुनकर श्री रघुनाथ जी कहने लगे – हे नाथ! उपाय तो आपके ही हाथ है।

 

 

 

 

2- आपका रुख रखने में और आपकी आज्ञा को सत्य कहकर प्रसन्नता पूर्वक पालन करने में ही सबका हित है, पहले तो जो आज्ञा हमारे लिए हो मैं उसी शिक्षा को माथे से लगाकर करूँगा।

 

 

 

 

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