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Patanjali Products list Pdf Hindi / पतंजलि प्रोडक्ट लिस्ट pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Patanjali Products list Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Patanjali Products list Pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Jamin Agreement Likhne Ka Tarika Pdf कर सकते हैं।

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Patanjali Products list Pdf Hindi Download

 

 

 

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Swami Samarth Tarak Mantra Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

उससे जो कन्या होगी वह पार्वती के नाम से विख्यात होगी। पितरो की दूसरी प्रिय कन्या योगिनी धन्या राजा जनकी की पत्नी होगी। उसकी कन्या रूप में महालक्ष्मी अवतीर्ण होगी जिनका नाम सीता होगा। इसी प्रकार पितरो की छोटी पुत्री कलावती द्वापर के अंतिम भाग में वृषभानु वैश्य की पत्नी होगी और उसकी प्रिय पुत्री राधा के नाम से विख्यात होगी।

 

 

 

योगिनी मेनका पार्वती जी के वरदान से अपने पति के साथ उसी शरीर से कैलास नामक परम पद को प्राप्त हो जाएगी। धन्या तथा उनके पति जनक  उत्पन्न हुए जीवन्मुक्त महायोगी राजा सीरध्वज लक्ष्मीस्वरूपा सीता के प्रभाव से बैकुंठ धाम में जायेंगे।

 

 

 

वृषभानी के साथ वैवाहिक मंगलकृत्य सम्पन्न होने के कारण जीवन्मुक्त योगिनी कलावती भी अपनी कन्या राधा के साथ गोलोकधाम में जाएगी इसमें संशय नहीं है। विपत्ति में पड़े बिना कहाँ किनकी महिमा प्रकट होती है। उत्तम कर्म करने वाले पुण्यात्मा पुरुषो का संकट जब टल जाता है तब उन्हे दुर्लभ सुख की प्राप्ति होती है।

 

 

 

अब तुम लोग प्रसन्नता पूर्वक मेरी दूसरी बात भी सुनो जो सदा सुख देने वाली है। मेना की पुत्री जगदंबा पार्वती देवी अत्यंत दुस्सह तप करके भगवान शिव की प्रिय पत्नी बनेगी। धन्या की पुत्री सीता भगवान श्री राम जी की पत्नी होगी और लोकाचार का आश्रय ले श्रीराम के साथ विहार करेंगी।

 

 

 

साक्षात् गोलोक में निवास करने वाली राधा ही कलावती की पुत्री होगी। वे गुप्त स्नेह में बंधकर श्री कृष्ण की प्रियतमा बनेंगी। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! इस प्रकार शाप के ब्याज से दुर्लभ वरदान देकर सबके द्वारा प्रशंसित भगवान सनत्कुमार मुनि भाइयो सहित वही अंतर्ध्यान हो गए।

 

 

 

तात! पितरो की मानसी पुत्री वे तीनो बहिने इस प्रकार शाप मुक्त हो सुख पाकर तुरंत अपने घर को चली गयी। नारद जी बोले – महामते! आपने मेना के पूर्वजन्म की यह शुभ एवं अद्भुत कथा कही है। उनके विवाह का प्रसंग भी मैंने सुन लिया। अब आगे के उत्तम चरित्र का वर्णन कीजिए।

 

 

 

ब्रह्मा जी ने कहा – नारद! जब मेना के साथ विवाह करके हिमवान अपने घर को गए तब तीनो लोको में बड़ा भारी उत्सव मनाया गया। हिमालय भी अत्यंत प्रसन्न हो मेना के साथ अपने सुखदायक सदन में निवास करने लगे। मुने! उस समय श्री विष्णु आदि समस्त देवता और महात्मा मुनि गिरिराज के पास गए।

 

 

 

उन सब देवताओ को आया देख महान हिमगिरि ने प्रशंसापूर्वक उन्हें प्रणाम किया और अपने भाग्य की सराहना करते हुए भक्ति भाव से उन सबका आदर सत्कार किया। हाथ जोड़ मस्तक झुकाकर वे बड़े प्रेम से स्तुति करने को उद्यत हुए। शैलराज के शरीर में महान रोमांच हो आया।

 

 

 

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