Advertisements

Om Prakash Sharma Novel Pdf Hindi / ओम प्रकाश शर्मा नावेल फ्री डाउनलोड

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Om Prakash Sharma Novel Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Om Prakash Sharma Novel Pdf Hindi Download कर सकते हैं और आप यहां से  Nagraj कॉमिक्स Pdf Download कर सकते हैं।

 

Advertisements

 

 

Om Prakash Sharma Novel Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम Om Prakash Sharma Novel Pdf
पुस्तक के लेखक ओम प्रकाश शर्मा 
भाषा हिंदी 
श्रेणी Novel
साइज 13.9 Mb
पृष्ठ 119
फॉर्मेट Pdf

 

 

 

Advertisements
Om Prakash Sharma Novel Pdf
दो प्रेत Om Prakash Sharma Hindi Novel Pdf Download
Advertisements

 

 

 

Vishkanya Novel Pdf
विषकन्या उपन्यास डाउनलोड
Advertisements

 

 

 

Sanjh Ka Suraj by ओम प्रकाश शर्मा - Om Prakash Sharma
साँझ का सूरज Pdf Download
Advertisements

 

 

 

Om Prakash Sharma Novel Pdf
सबसे बड़ा पाप Novel Pdf Download
Advertisements

 

 

 

अंधेरे के दीप : ओमप्रकाश शर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास
अँधेरे के दीपक Novel Pdf Download
Advertisements

 

 

 

खून खराबा | KHOON KHARABA PDF : वेद प्रकाश शर्मा द्वारा लिखित हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | KHOON KHARABA NOVEL PDF : WRITTEN BY VED PRAKASH SHARMA HINDI PDF BOOK DOWNLOAD
khoon kharaba ओम प्रकाश शर्मा नॉवेल फ्री डाउनलोड
Advertisements

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें newsbyabhi247[email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

डा. मुखर्जी बोले – हां मैं यही का रहने वाला हूँ। कार्तिक उनसे नीली कोठी के विषय में पूछने लगा। डा. मुखर्जी ने उसे बताया कि वह कोठी किसी साधु के द्वारा अभिशप्त है। लेकिन इसमें रहने वाले लोग हमेशा परोपकारी ही रहते है।

 

 

 

शहरी क्षेत्र में देहात की अपेक्षा आवश्यकता अधिक रहती है। आवश्यकता के अनुसार ही सुविधा भी अधिक रहती है। इसका परिणाम यह होता है कि अकेले पुरुष अपने परिवार का दायित्व पूर्ण नहीं कर सकता है। इसलिए परिवार के परिचालन में औरतो की भागीदारी आवश्यक हो गयी है।

 

 

 

प्रायः सभी कम्पनी वालो ने औरतो के लिए भी आवश्यकतानुसार कार्य की व्यवस्था किया है। पराग एक दिन अपने पुत्र कार्तिक से बोले – मैं 20 दिन के लिए गांव जा रहा हूँ तब तक के लिए तुम्हे दुकानों के साथ ही अपनी हैंडलूम कम्पनी को भी संभालना पड़ेगा क्या तुम इसके लिए तैयार हो?

 

 

 

कार्तिक बोला – पिताजी! जिम्मेदारी तो बढ़ गयी है कोशिश करूँगा कि इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह से पूरी कर सकूँ क्योंकि भविष्य में ऐसी कोई भी चुनौती आ सकती है? यह तैयारी हमारे लिए परीक्षा का कार्य करेगी। कार्तिक की बात सुनकर पराग मन में मुस्कुराने लगे क्योंकि उनका लड़का भविष्य में आने वाली चुनौती के लिए तैयार था।

 

 

 

जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसे परिणाम उसी के अनुरूप प्राप्त होता है और पराग इस मामले में खुश थे कि उनका कर्म अच्छा था जो उनका पुत्र जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार था। पराग और केतकी अपने गांव कीरतपुर आ गए थे कीरतपुर में उनका पुश्तैनी मकान था।

 

 

 

जो पुराने जमाने का बना हुआ था और इस आधुनिक युग में वैसा मकान बनाने के लिए कारीगर और सामाग्री का सर्वथा अभाव हो गया था क्योंकि समय के साथ ही गांव में भी बदलाव की धीमी बयार बह रही थी। पराग जब छोटे थे तब उनके गांव में हर व्यक्ति के घर गाय, बैल और बकरियां हुआ करती थी।

 

 

 

प्रत्येक घर में दुग्ध आसानी से उपलब्ध होता था। जानवरो के गोबर से उपले बनते थे। उन्ही उपले को चौके में ले जाकर घर की औरते रसोई में भोजन तैयार करती थी। लोहे की कड़ाही से बनी हुई सब्जी कितनी स्वादिष्ट होती थी जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी उत्तम रहती थी।

 

 

 

पराग का परिवार बहुत ही छोटा था। उनकी जन्मदात्री माता पहले ही ईश्वर के दरबार में चली गयी थी। पांच वर्ष का होते ही इन्हे पालने वाली दादी मां भी अपनी बहू का साथ निभाने ईश्वर के पास चली गयी उन्होंने भी पराग का साथ छोड़ दिया।

 

 

 

अब तो पराग और पिता मधुकर ही रह गए थे। कई लोगो ने मधुकर के लिए शादी का प्रस्ताव दिया था लेकिन उनका एक ही जवाब होता था। जब ऊपर वाले को हमारा दर्द नहीं दिखता है तो आप लोग हमारे दर्द को कैसे कम कर सकते है।

 

 

 

हमारे पास एक लड़का है अपने सुख के लिए मैं उसकी जिंदगी को दांव पर नहीं लगा सकता हूँ। मधुकर का जवाब सुनकर लोग चुप हो जाते थे।

 

 

 

कुछ समय के बाद अन्य लोग भी इस विषय में बात करना छोड़ दिए थे। मधुकर ने अपनी नौकरी और पारग के बीच अच्छा ताल-मेल बैठा रखा था।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Om Prakash Sharma Novel Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Om Prakash Sharma Novel Pdf की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!