Om Jai Jagdish Hare Pdf / ॐ जय जगदीश हरे आरती Pdf

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Om Jai Jagdish Hare Pdf / ॐ जय जगदीश हरे आरती पीडीएफ 

 

 

 

ॐ जय जगदीश हरे आरती पीडीएफ डाउनलोड 

 

 

 

 

 

 

 

Om Jai Jagdish Hare in Hindi 

 

 

 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

 

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

 

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

 

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

 

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

 

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

 

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

 

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

सभी लोगो ने अपने-अपने घरो को सजाते हुए मंगलमय बना लिया। गलियों को चतुर सम से सींचा गया और द्वारो पर सुंदर चौक पुराये गए।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- जहां-तहां हर जगह बिजली के जैसी शोभा वाली स्त्रियां, चंद्रमुखी, हिरन के शावक के नेत्रों वाली और अपने सुंदर रूप से कामदेव की स्त्री रति के अभिमान को छुड़ाने वाली सुहागिन स्त्रियां सभी प्रकार से सोलह श्रृंगार करके समूह में मिलकर।

 

 

 

 

2- अपनी मनोहर वाणी से मंगल गीत गा रही है। जिनके सुंदर स्वर को सुनकर कोयल को भी लज्जा आ रही है और राजमहल का वर्णन भी कैसे किया जा सकता है – जहां इतना सुंदर मंडप बना है जिसे देखकर सारा विश्व ही विमोहित हो रहा है।

 

 

 

 

3- कही भाट लोगो के द्वारा विरुदावली, कुल की कीर्ति का मनोहर उच्चारण हो रहा है और कही विद्वान ब्राह्मणो के द्वारा मधुर वेद ध्वनि हो रही है। अनेको प्रकार के मांगलिक द्रव्य शोभायमान हो रहे है और बहुत से नगाड़े बज रहे है।

 

 

 

 

4- सुंदर स्त्रियां श्री राम जी और श्री सीता जी का नाम लेकर मंगल गीत गा रही है, बहुत ही उत्साह है और उत्साह के सामने महल छोटा पड़ रहा है। इससे वह उत्साह उसमे न समाते हुए वह आनंद चारो ओर उमड़ चला है।

 

 

 

 

297- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

दशरथ के महल की शोभा का वर्णन कौन कवि कर सकता है – जहां समस्त देवताओ के शिरोमणि श्री राम जी ने अवतार लिया है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- फिर राजा ने भरत जी को बुलाया और कहा – जाकर घोड़े, हाथी और रथ को सजाओ, जल्दी श्री राम की बारात में चलो। यह सुनते ही भरत और शत्रुघ्न दोनों भाई आनंद वश पुलक से भर गए।

 

 

 

 

2- भरत जी ने साहनी ‘घोड़े की घुड़साल के अध्यक्ष’ को बुलाया और उन्हें घोड़े सजाने की आज्ञा दी। वह सभी प्रसन्न मन से उठकर दौड़ पड़े, उन्होंने रुचि के साथ यथा योग्य जीन कसकर घोड़े सजाये। रंग-बिरंगे उत्तम प्रकार के घोड़े शोभित हो रहे है।

 

 

 

 

3- सब घोड़े बहुत सुंदर और चंचलता के साथ दौड़ने योग्य है। उनकी धरती के ऊपर पैर रखने की कला ऐसी है मानो जलते हुए लोहे के पैर रखते हो।

 

 

 

अनेको प्रकार के घोड़े की प्रजातियां है जो वर्णन करने में नहीं आती है। उन सभी घोड़े की चाल ऐसी तेज है मानो वह हवा का निरादर करके उड़ना चाहते हो।

 

 

 

 

4- उन सब घोड़ो के ऊपर भरत जी के समान अवस्था वाले छैल -छबीले राजकुमार सवार हुए। उनके हाथो में धनुष बाण है तथा कमर में भारी तरकस बंधे हुए है। वह सब आभूषणों से सजे हुए है।

 

 

 

298- दोहा का अर्थ-

 

 

 

सभी चुने हुए छबीले छैल, शूरवीर, चतुर और नवयुवक है।  के साथ दो पैदल सिपाही है जो तलवार चलाने की कला में बड़े ही निपुण है।

 

 

 

 

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