Advertisements

ओह, नहीं ! Pdf / Oh No! Pdf in hindi

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Oh No! Pdf in hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Oh No! Pdf in hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Vastu shastra Marathi pdf कर सकते हैं।

Advertisements

 

 

 

 

 

 

Oh No! Pdf in Hindi

 

 

पुस्तक का नाम  Oh No! Pdf in hindi
भाषा  हिंदी 
साइज  2.4 Mb 
पृष्ठ  20 
श्रेणी   कहानी 
फॉर्मेट  Pdf 

 

 

 

ओह, नहीं! Pdf Download

 

 

Advertisements
Oh No! Pdf in hindi
Oh No! Pdf in hindi Download यहां से करे।
Advertisements

 

 

Advertisements
Motu Patlu comics in Hindi pdf
मोटू पतलू और चारपाई का चक्कर कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

Advertisements
Hadse Ki Rat Novel Pdf
R-Wing Novel Pdf Free Download Part 2
Advertisements

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

अहिल्याबाई के समय विधवा के लिए कई कायदे कानून और कड़े नियम थे। अहिल्याबाई ने उन सभी नियमों का विरोध करते हुए विधवाओं को उनका हक दिलाया। उन्होंने उस समय भी महिलाओं की शिक्षा पर काफी जोड़ दिया क्योंकि वह जानती थी कि शिक्षित महिलाएं समाज का विकास कर सकती है और वह हर प्रकार के समस्याओं को हल करने में खुद के ऊपर निर्भर रह सकती है।

 

 

 

अहिल्याबाई बुद्धिमान तिक्ष्ण सोच वाली शासक थी, जो मानती थी कि प्रजा ईश्वर के द्वारा दी हुई धरोहर स्वरूप निधि है। वह कभी भी अपने आप को प्रजा से ऊपर नहीं समझती थी। यहां तक कि प्रजा ही उनके लिए सबसे ऊपर थे। वह प्रजा का पालन संतान की तरह करने कोई राजधर्म मानती थी।

 

 

 

उनका मानना था कि यदि प्रजा संतुष्ट है तो राज्य का कार्य सही से हो रहा है। एक राजा अपने राज्य को चलाने में तभी सार्थक है जब उसके राज्य में सभी प्रजा सुखी हैं। कई इतिहासकार अहिल्याबाई होलकर के कार्य को लेकर आलोचना करते हैं। उनका मानना है कि अहिल्याबाई ने अपने धर्म के विकास में अपना अहम योगदान दिया।

 

 

 

उनके लिए हिंदू धर्म सर्वोपरि था और अपने समय में इन्होंने सनातन धर्म के लिए अनेकों बड़े कार्य किए, कई मंदिर बनवाए और वह मंदिलों पर अंधाधुंध पैसा खर्च किया और दान दिया। इस तरह कुछ आलोचक उन्हें रूढ़ीवादी मानती थे, उनका मानना था कि अहिल्याबाई अंधविश्वास को बढ़ावा देती थी ना कि वह अपनी सेना को मजबूत बनाने का कार्य करती थी।

 

 

 

अहिल्याबाई होल्कर की मृत्यु 13 अगस्त सन 1795 ईसवी को इंदौर राज्य में ही हुई थी। अहिल्याबाई होल्कर की मृत्यु कब हुई थी, उस दिन की तिथि भाद्रपद कृष्णा चतुर्दशी था। अहिल्याबाई का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। इन्होंने देश के अन्य हिस्सों में लोगों की भलाई के लिए जो काम किया।

 

 

 

ऐसी महान और निडर अहिल्याबाई के व्यक्तित्व से परिचित कराने के लिए अलग-अलग राज्यों की पाठ पुस्तकों में उनका अध्याय मौजूद है ताकि आज के पीढ़ी भी इतिहास की ऐसी निडर और महान नारी के बारे में जान सके अहिल्याबाई होल्कर के महान कार्यों के कारण ही भारत सरकार द्वारा उनके नाम पर अवार्ड भी जारी किया गया।

 

 

 

उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किए गए। 25 अगस्त 1996 को भारत सरकार ने अहिल्याबाई होलकर को सम्मानित भी किया था। यहां तक कि उत्तराखंड सरकार द्वारा अहिल्याबाई होलकर भेड़ बकरी विकास योजना शुरू किया ताकि उत्तराखंड में रह रहे आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को मजबूत बनाया जा सके।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Oh No! Pdf in hindi आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Oh No! Pdf in hindi की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

Leave a Comment

Advertisements
error: Content is protected !!